iPhone 14: सैटेलाइट कनेक्टिविटी कैसे काम करेगी? भारत में क्या है इसका भविष्य ?
सैटेलाइट कनेक्टिविटी के इमरजेंसी कॉन्टेक्ट फीचर्स में सपोर्ट के लिए एपल ने ग्लोबलस्टार से साझेदारी भी की है। सैटेलाइट कनेक्टिविटी की मदद से यूजर्स बिना सेल्युलर कवरेज के भी कॉल्स और मैसेज भेज सकते हैं।

विस्तार
एपल ने इस साल के अपने सबसे बड़े इवेंट में iPhone 14 सीरीज को लॉन्च कर दिया है। इस इवेंट को एपल ने ‘Far Out' नाम दिया गया था। इस इवेंट में iPhone 14 सीरीज के तहत चार नए आईफोन लॉन्च किए हैं जिनमें आईफोन 14, आईफोन 14 प्लस, आईफोन 14 प्रो और आईफोन 14 प्रो मैक्स को लॉन्च किया गया है। iPhone 14 सीरीज को ई-सिम सपोर्ट और सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ पेश किया गया है। सैटेलाइट कनेक्टिविटी के इमरजेंसी कॉन्टेक्ट फीचर्स में सपोर्ट के लिए एपल ने ग्लोबलस्टार से साझेदारी भी की है। सैटेलाइट कनेक्टिविटी की मदद से यूजर्स बिना सेल्युलर कवरेज के भी कॉल्स और मैसेज भेज सकते हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि सैटेलाइट कनेक्टिविटी कैसे काम करती है और भारत में इसका भविष्य क्या है। चलिए जानते हैं
सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए मोबाइल टावर नहीं होने पर भी स्मार्टफोन में सीधे सैटेलाइट के जरिए नेटवर्क कनेक्टिविटी मिलती है। इस प्रक्रिया में स्मार्टफोन लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट से कम्युनिकेशन करता है और इमरजेंसी सर्विस प्रोवाइडर्स तक फाइंड माई (Find My) एप के इस्तेमाल से अपनी लोकेशन शेयर कर सकता है या सीधे कॉल-मैसेज से भी कॉन्टेक्ट कर सकता है। हालांकि, सैटेलाइट से कम्युनिकेशन करने और सिग्नल मिलने में एक से दो मिनट तक का समय लग सकता है। सैटेलाइट नेटवर्क उस समय बहुत उपयोगी हो जाता है जब दूर-दराज के क्षेत्र में मोबाइल टावर से नेटवर्क कनेक्टिविटी मिलना मुश्किल होता है। इसमें यूजर्स स्मार्टफोन पर सेल्युलर नेटवर्क के बिना भी सैटेलाइट कनेक्टिविटी की मदद से कॉल और मैसेज कर सकते हैं। यानी कि फोन में नेटवर्क कनेक्टिविटी होने से यूजर्स को मोबाइल टावर से नेटवर्क की चिंता नहीं करनी पड़ती, बल्कि यूजर्स इसके बिना भी कॉल और मैसेज कर सकेंगे। बता दें कि नए आईफोन में शुरू के दो साल के लिए ही सैटेलाइट कनेक्टिविटी फ्री में उपलब्ध कराया जाएगा। दो साल के बाद एपल इसके लिए शुल्क लेना शुरू करेगी।
एपल ने सैटेलाइट कनेक्टिविटी के इमरजेंसी कॉन्टेक्ट फीचर्स में सपोर्ट के लिए ग्लोबलस्टार से साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत ग्लोबलस्टार और एपल के बीच में 450 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,000 करोड़ रुपये की डील हुई है, जिसमें एपल अपने नए सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर को सपोर्ट करने के लिए ग्लोबलस्टार के एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का यूज करेगा। बता दें कि ग्लोबलस्टार लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट की मैन्युफैक्चरिंग का काम करती है और हाल ही में ग्लोबलस्टार ने टी-मोबाइल और स्पेसएक्स के सैटेलाइट को एक्वॉयर भी किया था।