Starlink: स्टारलिंक को भारत में भी मिला लाइसेंस, 15 दिन में शुरू होगा ट्रायल, गली-गली में पहुंचेगा इंटरनेट

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Fri, 06 Jun 2025 05:03 PM IST
सार

TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) ने सैटकॉम कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम के प्रशासनिक आवंटन की सिफारिश की है, लेकिन DoT ने इन सिफारिशों को अभी तक मंज़ूरी नहीं दी है। TRAI ने यह भी सिफारिश की है कि सैटकॉम कंपनियों से AGR (एजजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) का 4% शुल्क लिया जाए।

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Indian government gave license to Starlink, satellite internet service will start soon in India
Starlink India - फोटो : Starlink

    विस्तार

    भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने एलन मस्क की कंपनी Starlink को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (SatComm) सेवाएं देने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी कर दिया है, हालांकि इसकी जानकारी फिलहाल पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से दी है। सरकार या स्टारलिंक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

    दूरसंचार विभाग के सूत्रों ने पुष्टि की है कि स्टारलिंक को लाइसेंस मिल गया है और कहा कि आवेदन करने के 15-20 दिनों के भीतर उन्हें परीक्षण स्पेक्ट्रम प्रदान कर दिया जाएगा। Starlink को भारत में ब्रॉडबैंड और सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की हरी झंडी मिल गई है। यह मंजूरी भारत के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकती है।

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    TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) ने सैटकॉम कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम के प्रशासनिक आवंटन की सिफारिश की है, लेकिन DoT ने इन सिफारिशों को अभी तक मंज़ूरी नहीं दी है। TRAI ने यह भी सिफारिश की है कि सैटकॉम कंपनियों से AGR (एजजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) का 4% शुल्क लिया जाए। अब Starlink को भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम की मंजूरी का इंतजार है। अगर TRAI की सिफारिशें मंजूर होती हैं, तो Starlink जल्द ही भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू कर सकती है।

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    बता दें कि हाल ही में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि स्टारलिंक सैटेलाइट कनेक्टिविटी टेलीकॉम के गुलदस्ते में एक और फूल की तरह है। मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ-साथ हमारे पास ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी भी है, लेकिन सैटेलाइट कनेक्टिविटी दूरदराज के इलाकों में बहुत अहम है, जहां वायर्ड कनेक्शन आसानी से नहीं पहुंच सकते।"

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