Nick Clegg: भारत का डिजिटल ढांचा जनहित पर केंद्रित, मेटा के अध्यक्ष निक क्लेग बोले- दूसरों के लिए शानदार मॉडल
‘डिजिटल बदलाव...भारत की कहानी’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में क्लेग ने कहा कि मेटा और वॉट्सएप ने स्वास्थ्य (कोविड टीकाकरण प्रमाणपत्र डाउनलोड के दौरान) और भुगतान सहित भारत की डिजिटल सार्वजनिक पहल को आत्मसात किया।

विस्तार
भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (डीपीआई) एक अद्भूत मॉडल है। यह जनहित पर केंद्रित है। व्यापक आधार पर प्रौद्योगिकी आधारित यह मॉडल अन्य देशों के लिए शानदार है, जिसका इस्तेमाल कर वे अपने नागरिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बना सकते हैं। मेटा के वैश्विक मामलों के अध्यक्ष निक क्लेग ने बुधवार को कहा, जब डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण की बात आती है तो भारत में यह जिस स्तर पर हुआ है और सार्वजनिक हित के जिस दर्शन पर आधारित है, वह अपने आप में अनूठा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी व्यापक स्तर पर शुरुआत है।
उन्होंने कहा, भले ही यह सरकार के जरिये संचालित नहीं है, लेकिन इसमें सुनिश्चित किया गया है कि यह एक मुक्त व हर जगह काम करने वाली व्यवस्था हो। मेरे लिए बड़ी बात यह है कि इसमें राज्य के फायदे से ज्यादा नागरिक हित को तवज्जो दी गई है।
बड़ी कंपनियों ने डिजिटल पहल को किया आत्मसात
‘डिजिटल बदलाव...भारत की कहानी’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में क्लेग ने कहा कि मेटा और वॉट्सएप ने स्वास्थ्य (कोविड टीकाकरण प्रमाणपत्र डाउनलोड के दौरान) और भुगतान सहित भारत की डिजिटल सार्वजनिक पहल को आत्मसात किया। उसे आगे बढ़ाने में मदद की। मेटा जैसी निजी क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियां भी भारत के डिजिटल बदलाव की कहानी से जुड़ने और उसे आगे बढ़ाने की इच्छुक हैं। क्लेग ने कहा, हम इस समय ओएनडीसी के साथ काम कर रहे हैं ताकि देखा जा सके कि हम और क्या कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं कि कार्ड से भुगतान और मर्चेंट भुगतान की सुविधा हो।
नागरिकों को मिलना चाहिए प्रौद्योगिकी का लाभ: कांत
कार्यक्रम में भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा, प्रौद्योगिकी समाज के लिए लंबी छलांग लगाने को हकीकत बनाने में मददगार है क्योंकि यह खुला स्रोत है। यह बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे इसी प्रकार की व्यवस्था अपनाएं। उन्होंने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) उभरते बाजारों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और कई चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इसलिए, प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ने देना चाहिए और उसका लाभ नागरिकों को मिलना चाहिए।
इसलिए नवप्रवर्तन में पिछड़ा यूरोप
कांत ने कहा, नवाचार में नियामक बहुत पीछे रहते हैं। इसलिए, एआई को बहुत अधिक नियमन के दायरे में लाने की कोशिश न हो। यूरोप यही कर रहा है। उसने एआई अधिनियम बनाया है। कायदे-काननू पर अत्यधिक जोर से ही यूरोप नवप्रवर्तन में अमेरिका से पिछड़ गया है। एआई का प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है। ऐसे में कायदे-कानून के बजाय हमें उपयोगकर्ता मामलों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की जरूरत है।