Cop-28: कूलिंग प्लान पर कायम रहेगा भारत, एसी-फ्रिज जैसी बुनियादी वस्तुओं को आम पहुंच में बनाए रखना लक्ष्य

जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजलज मिश्रा
Sat, 28 Oct 2023 06:23 AM IST
सार

सस्टेनेबल एनर्जी फॉर ऑल में ऊर्जा दक्षता और कूलिंग के प्रमुख ब्रायन डीन ने कहते हैं कि ग्लोबल कूलिंग प्लेज की कामयाबी के लिए भारत सबसे अहम देश है क्योंकि, भारत ने अपने राष्ट्रीय कूलिंग प्लान के जरिये इस कूलिंग संकल्प को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।

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India will stick to its cooling plan aiming to keep basic items like AC-fridge easily accessible
How to fix refrigerator not cooling - फोटो : Istock

    विस्तार

    अंतरराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन को लेकर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के तहत अगले महीने दुबई में होने वाले पार्टियों के सम्मेलन (कॉप-28) के दौरान भारत ग्लोबल कूलिंग प्लेज से इतर अपने राष्ट्रीय कूलिंग प्लान पर ही कायम रहेगा। ग्लोबल कूलिंग प्लेज असल में शीतलन गतिविधियों से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 2022 के स्तर की तुलना में 2050 तक 68 फीसदी कटौती का संकल्प है। यह संकल्प लेने वाले देश शीतलन प्रौद्योगिकी को टिकाऊ बनाने में निवेश करेंगे, जिससे एसी और फ्रिज जैसे उपकरणों की लागत बढ़ेगी। जबकि, ज्यादातर भारतीय अब भी इस तरह के उपकरणों का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं है।

    इसके साथ ही भारत में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत भी वैश्विक औसत से कम है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी और लोगों की आय बढ़ेगी, तो उनका जीवनस्तर भी ऊंचा उठेगा, जिससे बिजली के उपभोग में वृद्धि होगी। अगर सरकार अभी कूलिंग प्लेज का हिस्सा बनती है, तो भारतीय को अपना जीवनस्तर सुधारने की ज्यादा कीमत चुकानी होगी और इसकी वजह से बड़ा वर्ग जीवनस्तर सुधारने होने वाले खर्च वहन नहीं कर पाएगा।

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    भारत की भूमिका सबसे अहम

    सस्टेनेबल एनर्जी फॉर ऑल में ऊर्जा दक्षता और कूलिंग के प्रमुख ब्रायन डीन ने कहते हैं कि ग्लोबल कूलिंग प्लेज की कामयाबी के लिए भारत सबसे अहम देश है क्योंकि, भारत ने अपने राष्ट्रीय कूलिंग प्लान के जरिये इस कूलिंग संकल्प को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है। कूलिंग को ऊर्जा और उत्सर्जन दक्षता के लिहाज से टिकाऊ बनाने के लिए भारत अग्रसक्रिय देशों में शामिल है और पहले से ही वह सब कर रहा है, जो जरूरी है। अगर भारत इस संकल्प को स्वीकारता है तो पूरी दुनिया के लिए यह अहम संकेत साबित होगा।

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    प्रतिबद्धता का जोखिम नहीं लेगा भारत

    एक अधिकारी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की कूलिंग जरूरत कई गुना बढ़ने वाली हैं और यह उन निवेशों के लिए प्रतिबद्ध होने का जोखिम नहीं उठा सकता है, जो कूलिंग को महंगा बनाएं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में घरेलू एयर कंडीशनर के लिए बिजली की खपत 2050 तक नौ गुना बढ़ने की उम्मीद है, जो हर अन्य प्रमुख घरेलू उपकरण में वृद्धि को पीछे छोड़ देगी।

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