AI: क्या देश को मिलता रहेगा क्लाउड-एंथ्रोपिक का साथ? भारत-US के बीच स्पेशल फ्रेमवर्क पर हुई बैठक, जानें शर्तें

Jagriti
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीJagriti
Tue, 30 Jun 2026 05:59 PM IST
सार

AI Partnership:

एआई आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में शामिल हो चुका है। ऐसे में भारत और अमेरिका एक सुरक्षित और भरोसेमंद फ्रेमवर्क तैयार करने की तैयारी में हैं, जिससे दोनों देशों के बीच एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान बिना किसी बाधा के हो सके। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई है।आइए जानते हैं इस बैठक में क्या खास चर्चा हुई और इससे भारत को क्या फायदा हो सकता है?

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India-US Hold  Talks Build Secure Framework AI Technology
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    India US AI Partnership:

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भारत और अमेरिका के बीच वॉशिंगटन में एक महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय बैठक हुई है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका फिलहाल एआई मॉडल्स से जुड़े अप्रूवल और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर एआई उपलब्ध कराने से पहले वह कुछ आवश्यक सुरक्षा प्रतिबंध लागू करना चाहता है।

    हालांकि इसी बीच यह भी बात सामने आ रही है कि एआई का असर केवल टेक्नोलॉजी तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर साइबर सुरक्षा समेत अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से भारत सरकार अब देश में स्वदेशी एआई मॉडल्स के विकास को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य में तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।

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    बैठक में क्या खास चर्चा हुई?

    • यह बैठक वॉशिंगटन डीसी में आयोजित पैक्स सिलिका समिट के दौरान हुई। इसमें अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स जैकब हेलबर्ग ने कहा कि दोनों देश एआई रिलीज रणनीति से जुड़े जटिल मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं।
    • उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। अमेरिका एंथ्राेपिक के क्लाउड जैसे एडवांस्ड AI मॉडल्स को सुरक्षित और चरणबद्ध तरीके से अपने सहयोगी देशों तक पहुंचाना चाहता है। साथ ही क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर ग्रिड जैसी सेवाओं की सुरक्षा भी प्राथमिकता में रखी जा रही है।

    भारत चाहता है कि जिन एआई तकनीकों का इस्तेमाल शुरू हो चुका है, उनकी उपलब्धता भविष्य में अचानक बंद न हो। सरकार ने एडवांस्ड एआई मॉडल्स तक लगातार और भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित करने की मांग रखी है।

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    MeitY सचिव ने क्या कहा?

    • इस मौके पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि भारत ने एंथ्रोपिक के क्लाउड जैसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स की उपलब्धता को लेकर अपनी चिंता अमेरिका के सामने रखी थी।
    • उन्होंने बताया कि भारत यह समझना चाहता था कि भविष्य में अमेरिका इन तकनीकों की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित करेगा। जिसपर अमेरिकी पक्ष ने भरोसा दिलाया है कि विश्वसनीय साझेदार देशों के लिए एआई तकनीकों तक पहुंच बनाए रखने की दिशा में काम किया जाएगा।

    स्वदेशी एआई मॉडल्स पर भी सरकार का जोर

    भारत केवल विदेशी एआई मॉडल्स पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यही वजह है कि सरकार देश में विकसित होने वाले स्वदेशी एआई मॉडल्स को भी बढ़ावा दे रही है।

    AI और साइबर सुरक्षा क्यों बने मुद्दे?

    इसपर एक्सपर्ट्स का मानना है कि एडवांस्ड एआई का उपयोग साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण सरकारी सिस्टम, ऊर्जा नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगा। इसलिए भारत और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सुरक्षित, नियंत्रित और भरोसेमंद तरीके से किया जाए।

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