प्राइवेट स्पेस सेक्टर की बड़ी उड़ान: चीन-पाकिस्तान पर नजर रखना हुआ आसान, दुनिया का पहला OptoSAR सैटेलाइट लॉन्च

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Tue, 05 May 2026 01:27 PM IST
सार

GalaxEye Mission Drishti:

भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर ने अंतरिक्ष में एक नया इतिहास रच दिया है। बंगलूरू के स्टार्टअप GalaxEye ने दुनिया का पहला 'ऑप्टोसार' (OptoSAR) सैटेलाइट 'मिशन दृष्टि' सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह घने बादलों, खराब मौसम और रात के अंधेरे में भी धरती की बिल्कुल साफ और सटीक तस्वीरें ले सकता है। आइए जानते हैं कि यह नई तकनीक कैसे काम करती है और भारत की रक्षा, खेती और आपदा प्रबंधन के लिए यह कैसे एक 'गेम चेंजर' साबित होने वाली है।

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India’s GalaxEye Launches World’s First OptoSAR Satellite ‘Drishti’ on SpaceX Falcon 9
Mission Drishti - फोटो : AI

    विस्तार

    भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। बंगलूरू के स्टार्टअप गैलेक्सीआई (GalaxEye) ने अपने खास सैटेलाइट 'मिशन दृष्टि' को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया है। 3 मई, 2026 को कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स (SpaceX) के 'फाल्कन 9' रॉकेट के जरिए इसे लॉन्च किया गया। 'दृष्टि' दुनिया का पहला ऑप्टोसार (OptoSAR) सैटेलाइट है।

    आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्रों की टीम के जरिए महज कुछ ही वर्षों में बनाया गया यह 190 किलोग्राम का सैटेलाइट, भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट 'अर्थ ऑब्जर्वेशन' सैटेलाइट भी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि चाहे दिन हो या रात और मौसम कैसा भी हो, यह धरती की बिल्कुल साफ और सटीक तस्वीरें ले सकता है।

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    आखिर क्या है यह 'ऑप्टोसार' (OptoSAR) तकनीक?

    आमतौर पर अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी करने वाले सैटेलाइट्स मुख्य रूप से दो तकनीकों में से किसी एक पर निर्भर होते हैं। पहली तकनीक ऑप्टिकल कैमरा है, जो बिल्कुल हमारे स्मार्टफोन या डिजिटल कैमरे की तरह काम करता है। यह रंगों और बारीकियों से भरी स्पष्ट तस्वीरें तो लेता है। लेकिन इसकी एक बड़ी सीमा यह है कि बादल छाए होने, धुंआ होने या रात के अंधेरे में यह बिल्कुल नाकाम हो जाता है।

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    इसी चुनौती से निपटने के लिए दूसरी तकनीक यानी सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) का इस्तेमाल किया जाता है। रडार सिग्नल्स पर आधारित होने के कारण यह तकनीक बादलों, बारिश और घने अंधेरे को भी चीरकर देख सकती है और 24 घंटे काम करने में सक्षम है। हालांकि, इसमें कमी यह है कि इसके के जरिए ली गई तस्वीरें ब्लैक-एंड-वाइट और तकनीकी रूप से जटिल होती हैं। इन्हें समझना विशेषज्ञों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

    इन्हीं दोनों तकनीकों की खूबियों को एक साथ मिलाकर ऑप्टोसार (OptoSAR) तकनीक तैयार की गई है, जो ऑप्टिकल कैमरे जैसी स्पष्टता और रडार जैसी 'ऑल-वेदर' ताकत एक साथ प्रदान करती है।

    ऑप्टोसार (OptoSAR) का कमाल

    यह तकनीक इन दोनों खूबियों को एक ही सैटेलाइट में मिला देती है। 'दृष्टि' सैटेलाइट में एक ऑप्टिकल इमेजर और एक SAR सेंसर दोनों लगे हैं, जो एक ही समय पर एक ही जगह की तस्वीरें लेते हैं। इससे अलग-अलग सैटेलाइट्स का डेटा मिलाने पर होने वाली गड़बड़ियां दूर हो जाती हैं। इसका नतीजा ये होता है कि इसमें ऑप्टिकल कैमरे जैसी साफ तस्वीर, वो भी रडार की 'ऑल-वेदर' परिस्थिति में मिलती है।

    क्या हैं इसके खास फीचर्स?

    इस सैटेलाइट की सबसे बड़ी खूबी इसकी नेक्स्ट-जनरेशन इमेजिंग तकनीक है, जिसमें लगे बेहद एडवांस कैमरे और सेंसर्स जमीन की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम हैं। साथ ही, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह हर मौसम में काम कर सकता है। फिर चाहे आसमान में घने बादल हों, मौसम खराब हो या रात का अंधेरा, यह सैटेलाइट बिना किसी रुकावट के अपनी पैनी नजर बनाए रखने की काबिलियत रखता है।

    देश की सुरक्षा होगी और मजबूत

    इस सैटेलाइट के आसमान में पहुंचने से भारत की रक्षा ताकत को एक नई मजबूती मिलेगी। इसकी रियल-टाइम ट्रैकिंग क्षमता की मदद से बॉर्डर के पार होने वाली किसी भी छोटी से छोटी हलचल को तुरंत ट्रैक किया जा सकेगा, जो विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित होगा।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सैटेलाइट से मिलने वाले सटीक डेटा की बदौलत हमारी सेना न सिर्फ खतरों का बेहतर अंदाजा लगा पाएगी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में कहीं अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से फैसले भी ले सकेगी।

    सिर्फ रक्षा ही नहीं, हैं और भी कई फायदे

    खास बात यह है कि 'दृष्टि' सिर्फ रक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक डुअल-यूज तकनीक है जिसके फायदे नागरिक सेवाओं में भी देखने को मिलेंगे। यह सैटेलाइट आपदा प्रबंधन के दौरान बाढ़, तूफान या भूकंप जैसी स्थितियों की सटीक जानकारी देगा, तो वहीं पर्यावरण निगरानी के जरिए जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन पर भी नजर रखेगा।

    इसके अलावा, देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और हाईवे की प्लानिंग व देखरेख में भी इसकी डेटा रिपोर्ट बेहद कारगर साबित होगी। कुल मिलाकर, 'दृष्टि' सैटेलाइट भारत के स्पेस सेक्टर में आत्मनिर्भरता और आधुनिक इनोवेशन का एक शानदार उदाहरण पेश करता है।

    भारत के लिए यह तकनीक क्यों है इतनी जरूरी?

    भारत जैसे देश के लिए यह तकनीक बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली है, क्योंकि यहां मानसून के दौरान लंबे समय तक आसमान बादलों से ढका रहता है। ऐसी स्थिति में पुराने सैटेलाइट्स के साथ सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि वे खेती, आपदा प्रबंधन और रक्षा निगरानी के लिए लगातार और सटीक डेटा नहीं दे पाते।

    लेकिन 'दृष्टि' सैटेलाइट अपनी खास खूबियों के साथ इन चुनौतियों को खत्म कर देता है। यह लगभग 1.8 मीटर रेजोल्यूशन के साथ न सिर्फ बेहतरीन क्लैरिटी और शानदार डेटा प्रदान करता है, बल्कि इसका इस्तेमाल भी बहुउद्देशीय है। इसकी मदद से फसलों की सेहत जांचने और समुद्री तटों की निगरानी करने से लेकर बाढ़ या जंगल की आग जैसी आपदाओं का तुरंत पता लगाना आसान हो जाएगा।

    सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरा सिस्टम दिन हो या रात और मौसम चाहे कितना भी खराब क्यों न हो, बिना रुके काम करता रहेगा, जिससे देश की सुरक्षा और आम नागरिकों की जरूरतों के लिए हमेशा सटीक जानकारी उपलब्ध रहेगी।

    पीएम मोदी ने सराहा

    गैलेक्सीआई की यह सफरनामा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। जो कहानी कभी आईआईटी मद्रास के एक छोटे से स्टूडेंट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई थी, वह आज एक बड़ी वैश्विक उपलब्धि बन चुकी है। इसरो (ISRO) के मजबूत सहयोग और मार्गदर्शन से तैयार किया गया यह मिशन, असल में भारत के तेजी से उभरते प्राइवेट स्पेस सेक्टर की काबिलियत का एक बड़ा उदाहरण है।

    इस एतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के जरिए टीम की सराहना की। उन्होंने इस उपलब्धि को देश के युवाओं के नाम करते हुए कहा कि स्वदेश में निर्मित यह सैटेलाइट हमारे युवाओं के इनोवेशन और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके जज्बे का एक शानदार प्रमाण है। साथ ही उन्होंने गैलेक्सीआई के संस्थापकों और पूरी टीम को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं।

    अब जैसे ही 'मिशन दृष्टि' पूरी तरह सक्रिय होगा, यह न केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी का नजरिया बदल देगा। इसके साथ ही हम अपनी धरती को पहले से कहीं ज्यादा बेहतर, सटीक और 24x7 मॉनिटर करने के एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

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