आईटी में चीन से बहुत आगे है भारत, आईटी तकनीक पर पकड़ बना रहीं चीनी कंपनियां, चाइनीज आईटी विशेषज्ञ का दावा

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Sun, 11 Dec 2022 04:54 PM IST
सार

माइक इंफोसिस के पहले चाइनीज मूल के प्रमुख थे और एचपी जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अलावा भारतीय और चीनी दोनों फर्मों में काम करते थे। माइक का तर्क है कि भारतीय आईटी फर्म चीन में स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।

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India is far ahead of China in IT Chinese companies are catching up on IT technology says Chinese IT expert
भारत-चीन - फोटो : iStock

    विस्तार

    चाइनीज आईटी विशेषज्ञ माइक लियू ने दावा किया है कि आईटी में भारत चीन से काफी आगे है। उन्होंने कहा कि भारत का आईटी क्षेत्र, इसकी अर्थव्यवस्था के मुख्य आधारों में से एक है, जो वैश्विक बाजारों में अपने चीनी समकक्ष से बहुत आगे है। लियू के अनुसार, चाइनीज कंपनियां ई-कॉमर्स, ऑटोनोमस ड्राइविंग, एआई और क्लाउड सेवाओं में पकड़ बना रही हैं और अच्छा कर रही हैं।

    'द राइज ऑफ इंडियन आईटी' नामक पुस्तक के लेखक माइक लियू ने कहा कि भारतीय फर्मों के विपरीत, जिनका अभी भी वैश्विक बाजारों में बोलबाला है, विशेष रूप से आईटी आउटसोर्सिंग में चीन का सॉफ्टवेयर रेवेन्यू ज्यादातर घरेलू मार्केट से होता है। उन्होंने कहा कि चीन की आईटी आय का 95 प्रतिशत से अधिक घरेलू यानी चाइनीज घरेलू मार्केट से आता है। लेकिन वैश्विक आईटी बाजार में भारत चाइनीज मार्केट के खिलाड़ियों से काफी आगे है।

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    शीर्ष भारतीय कंपनी इंफोसिस के साथ वर्षों तक काम करने वाले चीनी आईटी अधिकारियों में से एक माइक ने अपनी किताब के विमोचन से पहले कहा कि चीनी कंपनियां वैश्विक बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए खतरा नहीं हैं। बता दें कि माइक लियू की दशकों से भारतीय और चीनी सूचना प्रौद्योगिकी के विकास में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करने वाली पुस्तक हाल ही में चाइनीज भाषा में प्रकाशित हुई है। इसे जल्द ही अंग्रेजी में प्रकाशित किया जाएगा।

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    माइक का तर्क है कि भारतीय आईटी फर्म चीन में स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, क्योंकि वह "कॉस्ट कॉन्शियस" और "शॉर्ट-टर्म रिटर्न" रणनीति अपनाते हुए काम कर रही हैं। बता दें कि माइक इंफोसिस के पहले चाइनीज मूल के प्रमुख थे और एचपी जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अलावा भारतीय और चीनी दोनों फर्मों में काम करते थे।

    आईटी क्षेत्र का जीडीपी में आठ फीसदी का योगदान

    चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MIIT) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी से जुलाई तक चीन का सॉफ्टवेयर कारोबार राजस्व 5.456 ट्रिलियन युआन (797.26 बिलियन अमरीकी डालर) तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 10.3 प्रतिशत की वृद्धि है। माइक के अनुसार, दोनों देशों के आईटी क्षेत्र उनके सकल घरेलू उत्पाद में लगभग आठ प्रतिशत का योगदान करते हैं, हालांकि चीन की अर्थव्यवस्था के आकार को देखते हुए चीन का आईटी राजस्व कहीं अधिक है।

    माइक लियू का कहना है कि जहां भारतीय आईटी फर्मों ने वैश्विक बाजारों पर राज किया है, वहीं चीनी कंपनियों ने टेक्नोलॉजी में प्रभुत्व स्थापित किया है। हालांकि, वैश्विक अंतरराष्ट्रीय मार्केट में सेंध लगाने के लिए चीनी कंपनियों को अभी लंबा रास्ता तय करना है। माइक का तर्क है कि मुझे लगता है कि अंग्रेजी मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने के लिए चीनी खिलाड़ियों को अभी भी सीखने की आवश्यकता है। चीनी लोग अक्सर पूछते हैं, भारतीय अमेरिका में व्यवसाय में इतने प्रमुख क्यों हो गए हैं? विशिष्ट दृष्टिकोण यह है कि भारतीय अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं। लेकिन यह शायद एक प्रतिशत कारक है।

    रिसर्च में कम खर्च करती हैं भारतीय टेक फर्म

    माइक के अनुसार, हुआवै, अलीबाबा, बैडू और टेनसेंट जैसी चीनी कंपनियों ने प्रौद्योगिकी विकास में बड़ी छलांग लगाई है, जबकि भारतीय आईटी क्षेत्र मोटे तौर पर सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग तक ही सीमित है, जो नवाचार और रिसर्च एवं विकास पर बहुत कम खर्च करता है।

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