काम की बात: फ्लाइट में वाई-फाई कैसे काम करता है और कहां से मिलता है सिग्नल?

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Mon, 13 Jan 2025 05:54 PM IST
सार

विमान के अंदर वाई-फाई सिग्नल को वितरित करने के लिए विशेष राउटर लगाए जाते हैं। ये राउटर इंटरनेट सिग्नल को पूरे केबिन में फैलाते हैं, जिससे यात्री अपने डिवाइस को कनेक्ट कर पाते हैं। हर यात्री को इंटरनेट का उपयोग करने के लिए एक पासवर्ड या लॉगिन सिस्टम प्रदान किया जाता है।

विज्ञापन
How does Wi-Fi work in flight and where does the signal come from
How Wi-Fi work in flight - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    आजकल उड़ान के दौरान भी वाई-फाई का उपयोग करना संभव हो गया है, जिससे यात्री यात्रा के दौरान इंटरनेट का आनंद ले सकते हैं। फ्लाइट में वाई-फाई एक अत्याधुनिक तकनीक है जो विशेष डिवाइस और सेटेलाइट के माध्यम से काम करती है। आइए जानें कि फ्लाइट में वाई-फाई कैसे काम करता है और सिग्नल कहां से मिलता है।

    फ्लाइट में वाई-फाई दो मुख्य तकनीकों के माध्यम से काम करता है जिनमें पहला एयर-टू-ग्राउंड (ATG) है और दूसरा सैटेलाइट-आधारित नेटवर्क है।

    विज्ञापन
    • एयर-टू-ग्राउंड (ATG) नेटवर्क:इस तकनीक में विमान और जमीन के बीच रेडियो सिग्नल का उपयोग किया जाता है। विमान में एक रिसीवर लगा होता है, जो जमीन पर लगे टावरों से इंटरनेट सिग्नल प्राप्त करता है। जब विमान हवा में होता है, तो यह सिग्नल लगातार नज़दीकी टावर से संपर्क में रहते हैं, हालांकि यह तकनीक अधिक ऊंचाई और समुद्र के ऊपर कम प्रभावी होती है।
    • सैटेलाइट-आधारित नेटवर्क:इस तकनीक में विमान सीधे उपग्रह (Satellite) से सिग्नल प्राप्त करता है। विमान में एक एंटीना होता है, जो उपग्रह से कनेक्ट होकर इंटरनेट सिग्नल प्राप्त करता है। यह तकनीक अधिक सटीक और व्यापक होती है, क्योंकि उपग्रह पूरे ग्लोब को कवर करते हैं।
    • Geostationary Satellites (GEO): ये स्थिर रहते हैं और विमान को सिग्नल प्रदान करते हैं।
    • Low-Earth Orbit Satellites (LEO): ये तेजी से घूमते हैं और बेहतर सिग्नल प्रदान करते हैं।
    और पढ़ें...
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें