MeitY: सरकार ने टेक कंपनियों के तर्क को किया खारिज, कहा 3 घंटे में ही हटाना होगा अवैध कंटेंट, नहीं बढ़ेगा समय
3-Hour Content Takedown Rule:
भारत सरकार ने आईटी नियमों के सख्त पालन को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। हाल ही में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में सरकार ने दिग्गज कंपनियों को स्पष्ट कर दिया है कि 3 घंटे वाला टेकडाउन आदेश हर हाल में लागू होगा, इस नियम में कोई बदलाव नहीं होगा।

विस्तार
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि नए संशोधित आईटी नियमों के तहत अवैध कंटेंट हटाने की 3 घंटे की समयसीमा में कोई ढील नहीं दी जाएगी। 25 फरवरी को हुई उच्चस्तरीय बैठक में टेक कंपनियों और उद्योग संगठनों की चिंताओं के बावजूद सरकार ने कहा कि नियम लागू होंगे। ये प्रवर्तन गृह मंत्रालय के सहयोग पोर्टल के जरिए आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत होगा। एक तरफ जहां उद्योग परिचालन चुनौतियों का हवाला दे रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर जानकारी के वायरल होने की रफ्तार को देखते हुए अब 36 घंटे का इंतजार नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार ने एआई से तैयार किए गए डिजिटल कंटेंट को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। 10 फरवरी 2026 को नोटिफिकेशन जारी होने के बाद 20 फरवरी से ये नियम प्रभावी हो गए। अब अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया जाता है, तो उस पर साफ तौर पर लेबल लगाना जरूरी होगा। साथ ही, किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा। पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी।
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- नो यू-टर्न: सरकार ने साफ कहा कि अधिसूचित नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा।
- 36 घंटे या 3 घंटे: पहले कंपनियों के पास आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे थे, जिसे अब घटाकर तीन घंटे कर दिया गया है।
- प्रवर्तन की प्रक्रिया: यह आदेश गृह मंत्रालय के सहयोग पोर्टल (CyTrain) और आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से जारी किए जाएंगे।
- जटिल मूल्यांकन: डीपफेक या गलत सूचना (Misinformation) जैसे मामलों में यह तय करना कठिन होता है कि कंटेंट अवैध है या नहीं।
- कानूनी पेच: 180 मिनट का समय कानूनी और तथ्यात्मक जांच के लिए बहुत कम है।
- सिस्टम आउटेज: कंपनियों ने पोर्टल एक्सेस में देरी या तकनीकी खराबी जैसी स्थितियों पर भी सवाल उठाए।
सरकार का जवाब
दिग्गजों की इस बात पर सरकार ने तर्क देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर कंटेंट की वायरल गति इतनी तेज है कि देरी से नुकसान बढ़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, बड़े प्लेटफॉर्म्स के पास स्केल पर मॉडरेशन करने की तकनीकी क्षमता है और उन्हें रियल-टाइम रिस्पॉन्स सिस्टम विकसित करना चाहिए। कहा कि भले ही सरकार डेडलाइन नहीं बढ़ा रही है, लेकिन वह कंपनियों की तकनीकी मदद करने को तैयार है। आने वाले समय में कार्यशालाएं (Workshops) आयोजित की जाएंगी ताकि पोर्टल के उपयोग और तकनीकी बाधाओं को दूर किया जा सके।
आईटी एक्ट की धारा 79 सेफ हार्बर प्रावधान देती है, जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स को यूजर-जनरेटेड कंटेंट के लिए सीमित दायित्व मिलता है बशर्ते वे सरकार या अदालत के निर्देशों का पालन करें। नई 3 घंटे की समयसीमा इस सेफ हार्बर को अधिक सख्ती से जोड़ती है। अनुपालन न करने पर कानूनी सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है।