Deepseek Ban: डीपसीक पर दुनिया भर में सख्ती; सुरक्षा और डाटा चोरी के डर से कई देशों ने लगाया प्रतिबंध
चीनी एआई स्टार्टअप डीपसीक पर दुनिया भर की सरकारों और नियामकों की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। कम लागत में चैटजीपीटी जैसे एआई मॉडल विकसित करने के दावे के बाद से ही इसकी सुरक्षा नीतियों और डाटा गोपनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

विस्तार
चीनी एआई स्टार्टअप डीपसीक इन दिनों दुनिया भर की सरकारों और नियामकों के कड़े रुख का सामना कर रहा है। जनवरी में इस स्टार्टअप ने दावा किया था कि उसने बेहद कम लागत में चैटजीपीटी को टक्कर देने वाला एआई मॉडल विकसित कर लिया है। लेकिन तभी से इसकी सुरक्षा नीतियों और गोपनीयता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं। डीपसीक की अपनी प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार, यह उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डाटा, जैसे कि एआई से पूछे गए सवाल और अपलोड की गई फाइलों को चीन में स्थित सर्वरों पर स्टोर करता है। इसी वजह से कई देशों ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के डाटा की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं।प्रमुख देशों के जरिए की गई कार्रवाई
भारत और ऑस्ट्रेलिया के जरिए की गई कार्रवाई
भारत के वित्त मंत्रालय ने फरवरी की शुरुआत में अपने कर्मचारियों को आधिकारिक काम के लिए डीपसीक और चैटजीपीटी जैसे एआई उपकरणों का उपयोग न करने की सलाह दी है। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता को खतरा हो सकता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने फरवरी में ही सुरक्षा जोखिमों के चलते सभी सरकारी उपकरणों पर डीपसीक को प्रतिबंधित कर दिया।
अमेरिका और ताइवान के जरिए की गई कार्रवाई
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन डीपसीक पर कड़े प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। इसमें अमेरिकी तकनीक तक इसकी पहुंच रोकना और अमेरिकी नागरिकों के लिए इसकी सेवाओं को ब्लॉक करना शामिल है। अमेरिकी सांसदों ने रक्षा मंत्रालय से इसे उन कंपनियों की सूची में डालने का आग्रह किया है जो चीनी सेना की मदद करती हैं। ताइवान ने भी फरवरी में सरकारी विभागों में इसके उपयोग पर रोक लगा दी, क्योंकि उन्हें सेंसरशिप और डाटा के चीन पहुंचने का डर है।
यूरोपीय देश (जर्मनी, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड और चेक गणराज्य) के जरिए की गई कार्रवाई
जर्मनी ने डाटा सुरक्षा चिंताओं के कारण एप्पल और गूगल से अपने स्टोर से डीपसीक को हटाने के लिए कहा है। फ्रांस और नीदरलैंड की प्राइवेसी वॉचडॉग एजेंसियों ने इस स्टार्टअप के डाटा संग्रह के तरीकों की जांच शुरू कर दी है। इटली ने जनवरी 2025 में व्यक्तिगत डाटा के उपयोग की स्पष्ट जानकारी न होने के कारण इस एप को ब्लॉक कर दिया था। चेक गणराज्य ने भी जुलाई में अपने सार्वजनिक प्रशासन में इस स्टार्टअप की सेवाओं के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
दक्षिण कोरिया और रूस के जरिए की गई कार्रवाई
दक्षिण कोरिया ने नियमों के उल्लंघन के कारण फरवरी में एप के नए डाउनलोड्स पर अस्थायी रोक लगा दी थी, हालांकि अप्रैल के अंत में इसे फिर से शुरू कर दिया गया। इन सबके विपरीत रूस ने डीपसीक और चीनी एआई तकनीक के प्रति सहयोग का रुख अपनाया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने देश के सबसे बड़े बैंक (Sberbank) को चीनी शोधकर्ताओं के साथ मिलकर संयुक्त एआई प्रोजेक्ट्स पर काम करने का निर्देश दिया है।