Google: कार्बन क्रेडिट खरीदेगी गूगल, जानिए क्या होता है ये और कंपनियां इसे क्यों खरीद रही हैं?
गूगल ने एलान किया कि वह ब्राजील की कंपनी मोम्बाक (Mombak) से 2 लाख मीट्रिक टन कार्बन क्रेडिट खरीदेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत, खेती की जमीन खरीदी जाएगी और उसे फिर से जंगल में बदला जाएगा, ताकि पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सके।

विस्तार
कार्बन क्रेडिट क्या होता है?
एक कार्बन क्रेडिट का मतलब है कि किसी कंपनी को एक मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) या किसी दूसरी ग्रीनहाउस गैस को उत्सर्जित करने की अनुमति मिलती है। यह शेयर या कमोडिटी की तरह ही एक ट्रेड करने लायक संपत्ति होती है यानी इसे कंपनियां खरीद और बेच सकती हैं। कार्बन क्रेडिट उन पर्यावरणीय प्रोजेक्ट्स से बनते हैं जो प्रदूषण घटाते या खत्म करते हैं। जैसे पेड़ लगाना, सौरऊर्जा बनाना, पवन ऊर्जा बनाना, या ऊर्जा दक्षता बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट्स का निर्माण करना।
कार्बन क्रेडिट क्यों खरीदती हैं कंपनियां?
अगर किसी कंपनी का प्रदूषण तय सीमा से ज्यादा हो जाता है, तो उसे उन कंपनियों से कार्बन क्रेडिट खरीदना पड़ता है जिन्होंने अपनी उत्सर्जन सीमा से कम प्रदूषण किया है। इससे कुल मिलाकर प्रदूषण का संतुलन बना रहता है। कुछ कंपनियां स्वेच्छा से भी कार्बन क्रेडिट खरीदती हैं ताकि वे उन उत्सर्जनों की भरपाई कर सकें जिन्हें पूरी तरह रोकना मुश्किल है। इससे वे दिखाती हैं कि वे सिर्फ कानून का पालन ही नहीं, बल्कि जलवायु कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी से काम कर रही हैं। जब कोई कंपनी कार्बन क्रेडिट खरीदती है, तो यह ग्राहकों, निवेशकों और समाज को यह संदेश देता है कि कंपनी पर्यावरण और जलवायु चेंज को गंभीरता से लेती है। इससे उसका भरोसा और ब्रांड वैल्यू दोनों बढ़ते हैं। कार्बन क्रेडिट खरीदने से उन प्रोजेक्ट्स को फंड मिलता है जो पर्यावरण सुधार में मदद करते हैं, जैसे पेड़ लगाना, सौर या पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स, एनर्जी-एफिशिएंट चूल्हे या टेक्नोलॉजी लगाना। इनसे न सिर्फ प्रदूषण कम होता है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वास्थ्य के फायदे भी मिलते हैं।
गूगल खरीदेगी 2 लाख मीट्रिक टन कार्बन क्रेडिट
गूगल ने गुरुवार को एलान किया कि वह ब्राजील की कंपनी मोम्बाक (Mombak) से 2 लाख मीट्रिक टन कार्बन क्रेडिट खरीदेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत, खेती की जमीन खरीदी जाएगी और उसे फिर से जंगल में बदला जाएगा, ताकि पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सके। यह डील सिम्बायोसिस एलायंस के जरिए हुई है, जिसका उद्देश्य प्रकृति आधारित कार्बन निष्कासन परियोजनाओं के लिए एक मजबूत बाजार तैयार करना है। इस पहल को गूगल, मैकेंजी, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और सेल्सफोर्स जैसी बड़ी कंपनियों का समर्थन मिल रहा है। ऐसे प्रोजेक्ट्स के कई फायदे हैं, जैसे जंगल में पानी के स्रोतों को भरना, जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं, और पर्यावरण को प्राकृतिक रूप से संतुलित करना। ये काम डायरेक्ट एयर कैप्चर जैसी तकनीक नहीं कर पाती। हालांकि, इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे अगर जंगल में आग लग जाए या कोई प्राकृतिक आपदा हो जाए, तो पूरा प्रोजेक्ट खतरे में पड़ सकता है। गूगल ने कहा है कि वह अपने डीपमाइंड पर्च एआई सिस्टम का इस्तेमाल करेगा ताकि इन प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले जैव विविधता के फायदों को मापा और ट्रैक किया जा सके।