गूगल ने हटाया भारतीय सेना की जासूसी करने वाला पाकिस्तानी ऐप

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गूगल अपने प्लेस्टोर से SmeshApp नाम एक स्पाइवेयर एप्लिकेशन को हटा दिया है। सीएनएन-आईबीएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एप्लिकेशन बड़े पैमाने पर भारतीय सेना के जवानों पर जासूसी करने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था।
सीएनएन-आईबीएन की जांच से पता चला कि कथित एप्लिकेशन सेना और अन्य आतंकवाद के खिलाफ आपरेशनों की रणनीति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लेने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
सीएनएन-आईबीएन के एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्पाईवेयर एप्लिकेशन को न सिर्फ स्मार्टफोन बल्कि सैनिकों के पर्सनल कंप्यूटर को भी प्रभावित करता था। एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद यह एप्लिकेशन थर्ड पार्टी को व्यक्तिगत जानकारी फोन लॉग, टेक्स्ट मैसेज और डिवाइस में स्टोर तस्वीरों को इस्तेमाल करने की अनुमति देती है।
एप्लिकेशन के जरिए इक्टठा जानकारी को कथित तौर पर जर्मनी में एक सर्वर पर स्टोर किया गया था और इसको कराची के बाहर स्थित एक व्यक्ति द्वारा हॉस्ट किया गया था।
पठानकोट हमले में किया गया इस्तेमाल

जांच से पता चला है कि एप्लिकेशन का इस्तेमाल पाकिस्तान संचालकों द्वारा जनवरी, 2016 में पठानकोट में भारतीय वायु सेना बेस पर हमले के दौरान भी किया गया था। ऐप ने सैनिकों की आवाजाही पर महत्वपूर्ण जानकारी उन तक पहुंच में मदद की।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के कथित तौर पर फेसबुक पर भारतीय सेना जवानों को फंसाने के लिए जाल बुनता है। रिपोर्ट का दावा है कि 10 से अधिक इस तरह के फर्जी फेसबुक प्रोफाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है और कहा कि कई भारतीय सैन्य कर्मियों अनजाने में पाकिस्तानी आकाओं के साथ संवाद कर रहे हैं।
स्पाइवेयर ने कथित तौर पर सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को निशाना बनाया गया था।
रिपोर्ट के बाद गूगल ने एप्लिकेशन को प्लेस्टोर से हटा दिया गया था।
सेना के अधिकारियों द्वारा सेना कर्मियों को पठानकोट हमले के बाद इंस्टेंट मैसेंजर वॉट्सऐप के उपयोग के संबंध में नए दिशा निर्देश जारी किए थे। नए दिशा-निर्देशों के तहत, सेना जवानों को उनकी वास्तविक पहचान का खुलासा किए बिना अपने नाम के साथ वॉट्सऐप का उपयोग कर सकते हैं। इस पर पद, प्रोफाइल और पोस्टिंग का कोई जिक्र नहीं किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, वे केवल व्यक्तिगत मैसेज ही साझा कर सकते हैं और कुछ भी ऑफिशयल नहीं, यहां तक कि अपने परिवार के सदस्यों के साथ भी।
दिसंबर, 2015 में भी भारतीय सेना के अधिकारियों को अपने कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए डिजिटल में क्या करें और क्या न करें की एक 10 सूत्री विस्तृत सूची जारी की थी।
यह हिदायत 28 दिसंबर को बठिंडा से एयरमैन रंजीत केके की गिरफ्तारी के बाद दी गई थी, केके ने फेसबुक पर एक महिला के साथ एयरबेस के संबंधिंत जानकारी शेयर की थी। उसका लगा कि महिला ब्रिटेन में एक पत्रकार थी, जबकि वह वास्तव में जासूसी संगठन की एक सदस्य थी।