गूगल प्ले के नए नियम: ज्यादा रैम खाने वाले एंड्रॉयड एप्स पर गिरेगी गाज, फरवरी 2027 से सख्ती; क्या-क्या बदलेगा?

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Sat, 29 Aug 2026 01:25 PM IST
सार

अगर आपके फोन में कुछ ही एप्स इस्तेमाल करते समय रैम तेजी से भर जाती है, या फोन धीमा या अचानक क्रैश हो जाता है, तो आने वाले समय में आपको कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। गूगल ने गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध एंड्रॉयड एप्स और गेम्स के लिए नए मेमोरी और परफॉर्मेंस नियम एलान किए हैं। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से...

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Google Play Tightens RAM Rules, Memory-Hungry Android Apps Face Restrictions From 2027
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    गूगल के अनुसार, फरवरी 2027 से गूगल प्ले पर मौजूद एंड्रायड एप्स और गेम्स को नए मेमोरी यूसेज, बिटमैप मेमोरी और डीईएक्स कोड ऑप्टिमाइजेशन स्टैंडर्ड्स को पूरा करना होगा। कंपनी ने डेवलपर्स को पहले से समय दिया है, ताकि वे अपने एप्स को ऑप्टिमाइज कर सकें और मेमोरी का इस्तेमाल कम कर सकें।

    जो एप्स और गेम्स तय थ्रेशोल्ड को पूरा नहीं करेंगे, उनकी गूगल प्ले पर विजिबिलिटी और पब्लिशिंग कैपेबिलिटी घटाई जा सकती है। गूगल ने कहा है कि बाकी डिटेल्स इस साल के अंत में साझा की जाएंगी।

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    रैम इस्तेमाल करने के तरीके पर होगी नजर

    • नए नियमों में डायनैमिक मेमोरी यूसेज को भी शामिल किया गया है। इसके तहत यह देखा जाएगा कि कोई एप फोन की प्राइवेट मेमोरी का कितना इस्तेमाल करता है।
    • इसमें एप के फोरग्राउंड और बैकग्राउंड दोनों स्टेट्स में मेमोरी इस्तेमाल को देखा जाएगा। अलग-अलग डिवाइस की परफॉर्मेंस के हिसाब से मेमोरी लिमिट भी अलग हो सकती है।
    • इसका सीधा असर उन एप्स पर पड़ सकता है जो बैकग्राउंड में चलते हुए भी काफी मेमोरी इस्तेमाल करते रहते हैं।

    बिटमैप मेमोरी की भी होगी जांच

    गूगल सिर्फ एप के सामान्य रैम इस्तेमाल पर ही ध्यान नहीं दे रहा है। इसमें नए क्वालिटी स्टैंडर्ड में बिटमैप मेमोरी को भी शामिल किया गया है। इसमें देखा जाएगा कि जब एप के बिटमैप बैकग्राउंड में चल रहे हों, या कैश्ड स्थिति में हों, तब वे कितनी मेमोरी का यूज करते हैं। यानी इसका उद्देश्य फालतू मेमोरी खपत को कम करना है, ताकि फोन की दूसरी एक्टिविटीज के लिए भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें।

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    आर8 ऑप्टिमाइजेशन भी जरूरी

    • इसी के साथ गूगल ने एप कोड ऑप्टिमाइजेशन पर भी जोर दिया है। गूगल प्ले पर प्रकाशित होने वाले एप्स को R8 जैसे टूल्स का इस्तेमाल करके ऑप्टिमाइजेशन, श्रिंकिंग और ऑब्फस्केशन करना होगा। इसके लिए कम से कम 25 फीसदी कवरेज के साथ ऑप्टिमाइजेशन की आवश्यकता बताई गई है।
    • इस प्रक्रिया का उद्देश्य एप के कोड को अधिक कुशल बनाना और अनावश्यक कोड को कम करना है, जिससे ऐप के आकार और संसाधन इस्तेमाल को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके।

    अन्य कौन-सी समस्या पर फोकस?

    • गूगल के अनुसार, इन नए नियमों के पीछे मुख्य उद्देश्य ज्यादा मेमोरी खपत से होने वाली समस्याओं को कम करना है। अगर कोई एप जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करता है, तो दूसरे एप्स के लिए उपलब्ध मेमोरी कम हो सकती है। इसका असर डिवाइस की स्पीड पर पड़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में ऐप क्रैश भी हो सकता है।
    • ऐसे में गूगल चाहता है कि डेवलपर्स एप डिजाइन करते समय मेमोरी एफिशिएंसी और डिवाइस परफॉर्मेंस को ज्यादा प्राथमिकता दें।
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