Explainer: एआई चैटबॉट बार्ड की गलती से गूगल को हुआ अरबों का नुकसान, आखिर कैसे काम करता है एआई टूल और चैटबॉट?
इस रिपोर्ट में हम आपको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या होता के बारे में बताएंगे। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एआई चैटबॉट आखिर काम कैसे करते हैं कि भी जानकारी देंगे।

विस्तार
गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट को बुधवार को 120 अरब डॉलर यानी करीब 991 हजार 560 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। गूगल को इतना नुकसान कंपनी के अपने एआई चैटबॉट बार्ड की एक गलत जानकारी की वजह से उठाना पड़ा है। दरअसल, कंपनी के शेयरों में बुधवार को 8 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट बार्ड के लिए प्रचार सामग्री में गलत जानकारी होने की रिपोर्ट के बाद देखी गई है। अब यहां सवाल यह उठता है कि दुनियाभर का डाटा होने के बाद भी एआई चैटबॉट ऐसी गलती कैसे कर सकते हैं। यदि आप भी इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं तो यह रिपोर्ट आपके लिए है। इस रिपोर्ट में हम आपको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या होता के बारे में बताएंगे। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एआई चैटबॉट आखिर काम कैसे करते हैं कि भी जानकारी देंगे। और समझेंगे की बार्ड और चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट्स पर आंख बंद करके भरोसा किया जा सकता है या नहीं। चलिए जानते हैं।
सबसे पहले यह जान लेते हैं कि बार्ड ने आखिर कौन-से सवाल का गलत जवाब दिया, जिससे कंपनी को अरबों का नुकसान हो गया। दरअसल, एक विज्ञापन में बार्ड के सामने एक शख्स ने सवाल किया, "जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कॉप की कौन सी नई खोजों के बारे में मैं अपने 9 साल के बच्चे को बता सकता हूं?" इसके बाद बार्ड जल्दी से तीन उत्तर देता है। बार्ड पहले दो उत्तर सही देता है, लेकिन इसकी आखिरी प्रतिक्रिया गलत थी।
बार्ड ने लिखा कि टेलीस्कोप ने हमारे सौर मंडल के बाहर किसी ग्रह की पहली तस्वीरें लीं। जबकि नासा के रिकॉर्ड के अनुसार, इन एक्सोप्लैनेट्स की पहली तस्वीरें यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के बहुत बड़े टेलीस्कोप द्वारा ली गई थीं। यानी बार्ड का जवाब सटीक नहीं था और इस घटना के बाद अल्फाबेट के शेयरों में गिरावट आई।
पहले ये समझने की कोशिश करते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आखिर किस चिड़िया का नाम है, जिसकी आजकल खूब चर्चाएं हो रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी कहा जाता है और सबसे आसान शब्द में इसे एआई के रूप में जाना जाता है, की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। एआई का अर्थ है एक मशीन या डिवाइस या सॉफ्टवेयर में सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना।
एआई को कंप्यूटर साइंस का सबसे एडवांस्ड वर्जन माना जाता है। कहा जाता है कि यदि एआई को पूरा विकसित कर लिया जाए तो मशीन इंसानों की तरह सोच सकेंगी और संवेदनाओं तक को महसूस कर सकेंगी। साफ शब्दों में कहें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी किसी मशीन को इतना डेवलप कर देना कि वह खुद से ही निर्णय ले कर काम कर सके। उसे कोई भी कमांड देने की जरूरत ही न हो।