बैग खोने की टेंशन खत्म: गूगल के नए फीचर से अब एयरलाइन देख सकेगी खोए लगेज की लाइव लोकेशन; जानें कैसे करेगा काम
Google lost luggage tracking: यात्रा के दौरान सामान खो जाना सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है। अब इस समस्या को कम करने के लिए गूगल ने अपने फाइंड हब एप में एक नया फीचर जोड़ा है। इस फीचर की मदद से यात्री अपने बैग की रीयल-टाइम लोकेशन सीधे एयरलाइन के साथ सुरक्षित लिंक के जरिए साझा कर सकते हैं।

विस्तार
हवाई यात्रा के दौरान सामान खो जाना या गलत जगह पहुंच जाना एक आम समस्या है। इसे ध्यान में रखते हुए गूगल ने अपना फाइंड हब प्लेटफॉर्म में नया शेयर आइटम लोकेशन फीचर जोड़ा है। इस फीचर की मदद से यात्री अपने खोए हुए बैग की लोकेशन सीधे एयरलाइन के साथ शेयर कर सकते हैं। इससे एयरलाइन को सामान ढूंढने में ज्यादा सटीक जानकारी मिलती है और यात्रियों को बार-बार अपडेट लेने की जरूरत कम पड़ती है।
कैसे काम करेगा यह फीचर?
- फाइंड हब एप खोलें और अपने ट्रैकर से जुड़े बैग को चुनें।
- शेयर आइटम लोकेशन विकल्प पर टैप करें।
- फिर एप एक सुरक्षित और यूनिक लिंक तैयार करेगा।
- इस लिंक को एयरलाइन के लॉस्ट-बैगेज फाॅर्म, एप या वेबसाइट में साझा करें।
ट्रैकिंग कैसे करें?
- एंड्रॉइड स्मार्टफोन हो तो उसमें फाइंड हब एप इंस्टॉल करें।
- बैग में लगा फाइंड हब-संगत ट्रैकर टैग करें। ऐसी एयरलाइन जो इस सिस्टम को सपोर्ट करती हो।
- अब कुछ लगेज ब्रांड जैसे सैमसोनाइट ऐसे सूटकेस भी पेश कर रहे हैं जिनमें यह ट्रैकिंग तकनीक पहले से मौजूद होती है।
गूगल ने कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में जैसे एयर इंडिया, एजेट, चाइना एयनलाइन, लुफ्थांसा ग्रुप (लुफ्थांसा, ऑस्ट्रियन एयरलाइंस, ब्रुसेल्स एयरलाइंस, स्विस), सऊदी अरब, स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस और टर्किश एयरलाइंस के साथ इस फीचर को जोड़ने के लिए साझेदारी की है। इसके अलावा क्वांटास में यह सुविधा जल्द शुरू होने की संभावना है। यह फीचर वर्ल्डट्रेसर और नेटट्रेसर जैसे बैगेज ट्रैकिंग सिस्टम के साथ भी काम करता है, जो दुनिया के सैकड़ों एयरपोर्ट और एयरलाइंस में इस्तेमाल होते हैं।
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क्या यह सुरक्षित है?
- एन्क्रिप्टेड लोकेशन डेटा:लोकेशन जानकारी सुरक्षित रूप से एन्क्रिप्टेड रहती है।
- यूजर कंट्रोल:लिंक केवल वही व्यक्ति शेयर करता है जिसे वह अनुमति देना चाहता है।
- ऑटो एक्सपायरी: शेयर किया गया लिंक लगभग 7 दिनों बाद अपने-आप बंद हो जाता है।
- ऑटो स्टॉप:जैसे ही फोन को पता चलता है कि बैग यूजर के पास वापस आ गया है, लोकेशन शेयरिंग बंद हो जाती है।
एयर ट्रैवल में हर साल लाखों बैग गलत जगह पहुंच जाते हैं। पहले यात्रियों को एयरलाइन के अपडेट का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब वे खुद भी सटीक लोकेशन जानकारी साझा करके खोज प्रक्रिया तेज कर सकते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह फीचर भविष्य में स्मार्ट लगेज ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत बना सकती है।