Google: बस 5 से 10 साल का इंतजार, दुनिया के पास होगी ये ताकतवर तकनीक, Google CEO सुंदर पिचाई ने किया खुलासा
Quantum Computers: क्वांटम कंप्यूटर्स का अब जल्द ही व्यावहारिक इस्तेमाल शुरू होने वाला है। वर्तमान में क्वांटम कंप्यूटर्स का इस्तेमाल वैज्ञानिक शोध और बहुत सीमित क्षेत्रों में होता है।

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दुबई में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में बोलते हुए, Google के सीईओ सुंदर पिचाई ने क्वांटम कंप्यूटिंग के बारे में एक बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा की हम अगले 5 से 10 वर्षों के भीतर क्वांटम कंप्यूटर्स का व्यावहारिक उपयोगी करना शुरू कर देंगे। वर्तमान में, क्वांटम कंप्यूटिंग का उपयोग रिसर्च के उद्देश्य तक ही सीमित है। पिचाई ने कहा कि 10 साल पहले AI बहुत सीमित चीजें करने में सक्षम था और आज इसका उपयोग कितना बदल गया है।
व्यावसायिक उपयोग होगा शुरू
इस साल की शुरुआत में, Nvidia के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने थोड़ी अलग भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था कि क्वांटम कंप्यूटर बहुत उपयोगी जरूर बन जाएंगे, लेकिन इसमें दशकों लगेंगे। हुआंग के दावों का जवाब देते हुए, Google क्वांटम AI के संस्थापक और प्रमुख, हार्टमुट नेवेन ने सुझाव दिया कि क्वांटम कंप्यूटिंग हुआंग की कल्पना से कहीं अधिक "व्यावहारिक" हो जाएगी। उन्होंने कहा कि Google का लक्ष्य पांच वर्षों के भीतर क्वांटम कंप्यूटिंग का व्यावसायिक उपयोग शुरू करना है।
1000 गुना ज्यादा ताकतवर होंगे क्वांटम कंप्यूटर
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि पांच वर्षों के भीतर हम वास्तविक दुनिया के ऐसे प्रयोग देखेंगे जो केवल क्वांटम कंप्यूटर पर ही संभव हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिस पर वर्षों से, मुख्य रूप से वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स द्वारा चर्चा की जा रही है। हम यह सुनते आ रहे हैं कि क्वांटम कंप्यूटर पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में 1000 गुना अधिक शक्तिशाली होंगे और सूचनाओं को बहुत तेजी से प्रोसेस करेंगे।
पिचाई ने कहा, "अगर हम थोड़ा पीछे देखें, तो वर्तमान में क्वांटम कंप्यूटिंग वैसी ही है जैसी हमने कुछ साल पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को देखा या समझा था। 2022 में ChatGPT लॉन्च होने से पहले, AI को ज्यादातर वैज्ञानिक ही समझते थे और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से व्यावसायिक रूप से किया जा रहा था। इसी तरह, क्वांटम कंप्यूटिंग को ज्यादातर लोग सिर्फ तेज कंप्यूटर के तौर पर समझते हैं। इसकी पूरी क्षमता को अभी सिर्फ वैज्ञानिक, शोधकर्ता और इस पर काम करने वाले तकनीकी दिग्गज ही समझ सकते हैं।"