AI: समाचार के लिए एआई का उपयोग वैश्विक रूप से चिंतनीय; सर्वे में सामने आई लोगों का भरोसा कम होने की बात

विशांत श्रीवास्तव
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशांत श्रीवास्तव
Wed, 19 Jun 2024 01:05 AM IST
सार

समाचार और राजनीति विषय में एआई के उपयोग को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक लोगों को एआई की सहायता से बने समाचारों की विश्वसनीयता पर शक है।

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Global audiences suspicious of AI-powered newsrooms, report finds
Artificial Intelligence - फोटो : Freepik

    विस्तार

    समाचार उत्पादन और गलत सूचना में एआई के उपयोग के बारे में वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं। यह दावा रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया गया है। यह रिपोर्ट समाचार उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो पहले से ही दर्शकों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रही है। इस रिपोर्ट की प्रमुख बात यह है कि कृत्रिम मेधा द्वारा संचालित की गई खबरें सिर्फ गूगल के डाटा पर आधारित होती हैं। जो कभी भी पाठकों को भ्रामक सूचना पहुंचा सकती हैं.

    रॉयटर्स इंस्टीट्यूट ने सोमवार को रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें 47 देशों के लगभग एक लाख लोगों से सर्वेक्षण किया गया है। यह रिपोर्ट व्यवसाय और राजस्व बढ़ाने के लिए मीडिया के सामने आने वाली समस्याओं को व्यक्त करती है।

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    राजनीति जैसे विषयों के लिए AI के उपयोग का भरोसा नहीं

    वैश्विक स्तर पर न्यूजरूम जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ एक नई चुनौती का समाधान करने के लिए काम कर रहे हैं, क्योंकि गूगल और ओपेन एआई जैसे तकनीकी दिग्गज और स्टार्टअप ऐसे उपकरण बना रहे हैं जो समाचार वेबसाइटों से सूचना और ट्रैफिक लेने के लिए काम कर सकते हैं, लेकिन रिपोर्ट में पाया गया कि उपभोक्ता समाचार सामग्री बनाने के लिए एआई के उपयोग के बारे में संदिग्ध हैं, खासकर राजनीति जैसे संवेदनशील विषयों के लिए उन्हें एआई पर पूरा भरोसा नहीं है।

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    हर देश में 2 हजार लोगों का सर्वेक्षण किया गया

    सर्वेक्षण के अनुसार, 52% अमेरिकी उत्तरदाताओं और 63% यूके उत्तरदाताओं ने कहा कि वे ज्यादातर एआई के साथ उत्पादित समाचारों से असहज होंगे। रिपोर्ट में प्रत्येक देश में 2,000 लोगों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि उपभोक्ता पत्रकारों के काम को और अधिक कुशल बनाने के लिए एआई के उपयोग के साथ अधिक सहज नहीं हैं।

    रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोध सहयोगी और डिजिटल न्यूज रिपोर्ट के प्रमुख लेखक निक न्यूमैन ने इसमें कहा है, "लोगों के एआई के इस्तेमाल के लिए इस तरह शक करना आश्चर्यजनक था। अधिकतर लोगों को यह डर था कि इस तरह की सामग्री की विश्वसनीयता और भरोसे का भविष्य क्या हो सकता है।’’

    गौरतलब है कि ऑनलाइन झूठी समाचार सामग्री के बारे में चिंताए पिछले वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत अंक बढ़ गई है। इस सर्वे के 59% उत्तरदाताओं ने कहा कि वे इससे चिंतित थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका में यह आंकड़ा क्रमशः 81% और 72% अधिक था, क्योंकि दोनों देशों में इस साल चुनाव होने हैं।

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