फ्रांस में सख्ती: अब 15 साल से कम आयु के बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, मैक्रों सरकार ने क्यों लिया फैसला?

राकेश कुमार
पीटीआई, पेरिस।राकेश कुमार
Wed, 22 Jul 2026 02:34 AM IST
सार

फ्रांस ने बच्चों को इंटरनेट के गंभीर दुष्प्रभावों से बचाने के लिए 15 साल से कम उम्र में सोशल मीडिया पर बैन का फैसला लिया है। यद्यपि इसे लागू करने में तकनीकी और कानूनी अड़चनें हैं, फिर भी यह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ा कदम है।

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france passes historic social media ban for under 15s Emmanuel Macron
इमैनुएल मैक्रों, फ्रांस के राष्ट्रपति - फोटो : @AI/ अमर उजाला ग्राफिक्स

    विस्तार

    फ्रांस की संसद ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा और कड़ा कानून पास कर दिया है। संसद के दोनों सदनों ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से रोक लगाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कठोर कदम उठाने वाला पूरे यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस प्रमुख अभियान के तहत अब हाई स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह पाबंदी रहेगी।

    आखिर क्यों सोशल मीडिया से कांप रहे हैं अभिभावक?

    फ्रांस में कई परिवारों ने बच्चों की आत्महत्या के मामलों को लेकर टिकटॉक जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर केस दर्ज कराया है। परिजनों का आरोप है कि प्लैटफॉर्म पर मौजूद खतरनाक कंटेंट बच्चों को मानसिक रूप से बीमार बना रहा है। एक मां गाएल बर्बोन्डे ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि सातवीं कक्षा में मोबाइल मिलने के बाद उनकी बेटी डिप्रेशन और खुद को नुकसान पहुंचाने की शिकार हो गई। उसे डेढ़ साल अस्पताल में बिताना पड़ा। अभिभावक इस कानून को शराब की तरह ही बच्चों को बचाने का एकमात्र जरिया मान रहे हैं।

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    संसद के इस सख्त फैसले की सात बड़ी बातें

    1. उम्र की सीमा:15 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पूरी तरह बैन रहेंगे।
    1. हाई स्कूल में नो फोन:हाई स्कूल के परिसरों में मोबाइल इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है।
    2. पढ़ाई वाले ऐप सुरक्षित:ऑनलाइन ज्ञानकोश, पढ़ाई और विज्ञान से जुड़ी साइट्स इस नियम से बाहर रहेंगी।
    3. सितंबर का लक्ष्य:राष्ट्रपति मैक्रों चाहते हैं कि नया सत्र शुरू होते ही सितंबर से यह कानून लागू हो जाए।
    4. संविधान की जांच:लागू होने से पहले कानून की संवैधानिक समीक्षा होगी, जिससे समय लग सकता है।
    5. पहचान का संकट:पुराने खातों को बंद करना और नए खातों के लिए उम्र जांचना बड़ी चुनौती होगी।
    6. यूरोपीय संघ के नियम:ईयू के डिजिटल सेवा अधिनियम (डीएसए) से तालमेल बैठाने के लिए बिल में संशोधन किए गए हैं।

    क्या इस बैन को लागू कर पाएगी मैक्रों सरकार?

    वामपंथी पार्टी 'फ्रांस अनबॉव्ड' के सांसदों ने इस कानून का पुरजोर विरोध किया है। उनका कहना है कि इस नियम से इंटरनेट पर लोगों की पहचान छिपना बंद हो जाएगी। इसके अलावा, तकनीकी तौर पर इतने बड़े स्तर पर बैन को लागू करना पूरी तरह से नामुमकिन साबित होगा।

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    सोशल मीडिया बैन करने वाला पांचवां देश बना फ्रांस

    फ्रांस ऐसा सख्त कदम उठाने वाला पांचवां और यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया है। संसद के दोनों सदनों ने मंगलवार को (स्थानीय समय) इस कानून के पक्ष में मतदान किया। यह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दूसरे कार्यकाल की एक प्रमुख पहल है। नए कानून के तहत हाईस्कूलों में मोबाइल के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। बच्चों को नुकसान से बचाने के लिए कई अन्य देश भी ऐसे कदम उठा चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, तुर्किये और इंडोनेशिया ने 15 साल या 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून पारित किए हैं।

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