ChatGPT बना हैकर्स का नया हथियार: फर्जी शॉपिंग साइट्स पर लालच दिखा हो रही ठगी; जानें इस स्कैम से कैसे बचें आप

Jagriti
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीJagriti
Sun, 14 Jun 2026 08:13 AM IST
सार

AI Poisoning

: आजकल एआई लोगों का पर्सनल असिस्टेंट बन गया है। ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर कोई भी कन्फ्यूजन हो, लोग सबसे पहले ChatGPT जैसे AI टूल्स से सही और गलत पूछने लगते हैं। जिसका फायदा अब साइबर अपराधी उठाकर AI सर्च रिजल्ट्स को निशाना बनाकर लोगों को नकली शॉपिंग वेबसाइट्स तक पहुंचा रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं यह नया स्कैम क्या है? कैसे काम करता है और आप इससे कैसे बच सकते हैं....

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Fake Shopping Sites Sneaking ChatGPT Results, Experts Warn
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    Fake Shopping Website

    : आज के समय में जब भी हमें किसी नए प्रोडक्ट, मोबाइल या ब्रांडेड बैग के बारे में जानना होता है, तो हम तुरंत एआई टूल्स की मदद लेते हैं। हम यह मानकर चलते हैं कि एआई हमें सबसे सटीक और सुरक्षित जानकारी देगा। जिसका अब पूरा फायदा साइबर अपराधियों ने उठाना शुरू कर दिया है। एआई टूल्स यूजर को प्रोडक्ट से संबंधित चीजों को दिखाकर उन्हें तो संतुष्ट कर देते हैं, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब इन सुझावों में कुछ ऐसी वेबसाइट्स शामिल हो जाती हैं जो असली ब्रांड्स की हूबहू नकल होती हैं।

    क्या है यह नया स्कैम?

    • इस नए स्कैम कोAI Poisoning (एआई पॉइजनिंग)कहा जा रहा है। देखिए, चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स इंटरनेट पर मौजूद डेटा को पढ़कर ही हमें जवाब देते हैं। जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाकर इंटरनेट पर भारी मात्रा में फर्जी कंटेंट, फेक रिव्यूज और नामी ब्रांड्स जैसी दिखने वाली क्लोन वेबसाइट्स अपलोड कर देते हैं।
    • जब एआई इंटरनेट खंगालता है, तो वह इस फर्जी कंटेंट को असली समझकर अपने डेटाबेस में शामिल कर लेता है। इसी प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में एआई पॉइजनिंग कहा जा रहा है। इस फ्रॉड का खुलासा मशहूर स्कैम-डिटेक्शन कंपनी 'Ask Silver' ने अपनी हालिया जांच में किया है। ब्रिटेन में इसके कई पीड़ित भी सामने आए हैं।

    भारी डिस्काउंट का लालच बन रहा ठगी की वजह

    • जैसे ही कोई यूजर एआई के सुझाए इन फर्जी लिंक्स पर क्लिक करता है, वह एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जहां 70% से लेकर 90% तक के भारी-भरकम डिस्काउंट (बंपर छूट) का लालच दिया जाता है।
    • इस बड़े डिस्काउंट के चक्कर में आकर जैसे ही ग्राहक सामान ऑर्डर करने की कोशिश करता है, यह नकली साइट्स उनसे उनकी सीक्रेट पेमेंट डिटेल्स, क्रेडिट कार्ड नंबर या नेट बैंकिंग की पूरी जानकारी मांग लेती हैं और पलक झपकते ही उनका बैंक खाता साफ हो जाता है।

    एआई के दौर में सुरक्षित शॉपिंग के नियम

    • URL को बेहद ध्यान से चेक करें: किसी भी लिंक पर क्लिक करने के बाद सबसे ऊपर दिख रहे ऑफिशियल डोमेन (जैसे .com, .co.in) को एक बार जरूर चेक करें। अगर वेबसाइट के नाम में ही ‘official’, ‘deals’, या ‘sale’ जैसे अतिरिक्त शब्द जुड़े हों, तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है।
    • चमकीले डिस्काउंट पर तुरंत शक करें:अगर कोई वेबसाइट आपको किसी नामी ब्रांडेड प्रोडक्ट पर अचानक 70 से 90 प्रतिशत तक की छूट दे रही है, तो उस पर कभी भरोसा न करें।
    • एआई के दिए लिंक्स पर सीधा क्लिक न करें:चैटजीपीटी ने अगर आपको कोई वेबसाइट सुझाई है, तो उस लिंक पर सीधे टैप करने की भूल न करें। इसके बजाय खुद ब्राउजर खोलें, ब्रांड का सही नाम टाइप करें और उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ही शॉपिंग करें।
    • बैंक डिटेल्स और OTP की सुरक्षा:किसी भी अनजानी या संदिग्ध लगने वाली वेबसाइट पर अपनी बैंकिंग जानकारी, कार्ड नंबर या मोबाइल पर आया ओटीपी (OTP) भूलकर भी साझा न करें।
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