AI Chatbots: सावधान! पहले मजे से चलाएंगे AI चैटबॉट, फिर हो जाएंगे अकेलेपन का शिकार, स्टडी में खुले कई राज

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Mon, 24 Mar 2025 05:45 PM IST
सार

स्टडी में सामने आया कि AI चैटबॉट के साथ रोजाना ज्यादा समय बिताने वाले लोग, भावनात्मक रुप से अलग-थलग पड़ जाते हैं। ऐसे लोग दूसरे लोगों से मेलजोल कम होन के वजह से अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं।

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excessive use of ai chatbots can lead to loneliness and emotional dependence claims study
चैटबॉट बढ़ा रहे अकेलापन - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    स्कूल और कॉलेज से लेकर अस्पताल और न्यायालयों तक में आज AI चैटबॉट का इस्तेमाल होने लगा है। एआई से चुटकियों में बड़े से बड़े पेचीदा काम सुलझाए जा सकते हैं। यह समय बचाने के साथ साथ प्रोडक्टिविटी को भी बढ़ा रहा है। हालांकि, एआई का एक पहलु और भी है जो काफी डरावना है। इनका ज्यादा इस्तेमाल खतरों से खाली नहीं है। एक स्टडी में सामने आया है कि इन चैटबॉट के ज्यादा इस्तेमाल से अकेलापन बढ़ रहा है और लोग दूसरे लोगों से मेलजोल और बातचीत में कम समय बीता रहे हैं। ChatGPT को बनाने वाली कंपनी OpenAI और MIT की एक रिसर्च में यह जानकारी सामने आई है।

    चैटबॉट बढ़ा रहे अकेलापन

    स्टडी में सामने आया कि ChatGPT के साथ रोजाना ज्यादा समय बिताने वाले लोग, भावनात्मक रुप से अलग-थलग पड़ जाते हैं। ऐसे लोग दूसरे लोगों से मेलजोल कम होन के वजह से अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं। इसके वजह से उन्हें दूसरे लोगों से मेलजोल बढ़ाने में परेशानी आने लगती है। रिसर्च में पाया गया कि इंसानों से अधिक सोशल रहने वाले लोग भावनात्मक रूप से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं, जबकि चैटबॉट पर ज्यादा भरोसा करने वाले लोग तुलनात्मक रुप से अधिक अकेलापन और असहाय महसूस करते हैं।

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    ज्यादा इस्तेमाल के खतरे

    बता दें कि पिछले काफी समय से एक्सपर्ट एआई चैटवबॉट से इनसानी बरताव में आने वाले बदलावों पर रिसर्च कर रहे हैं। कुछ शोधकर्ताओं ने मानसिक रोग और अकेलेपन से जूझ रहे युवाओं में AI चैटबॉट्स के बढ़ते उपयोग को लेकर चिंता भी जाहिर की है। पिछले साल एक कंपनी के चैटबॉट पर बच्चों को आत्महत्या करने के लिए उकसाने का भी आरोप लगा। इसी मामले में एक 14 वर्षीय बच्चे ने आत्महत्या भी कर ली थी।

    ताजा स्टडी करने वाले रिसर्चर का कहना है कि अभी तक यह रिसर्च शुरुआती चरण में है और इनसानों के बरताव पर इसका पूरा असर जानने की कोशिश की जा रही है। शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि इस स्टडी से एआई चैटबॉट्स को बेहतर बनाने के लिए कई रास्ते खुलेंगे। AI का इस्तेमाल करना वाकई में काफी मजेदार हो सकता है, लेकिन इसके दूसरे पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एआई से लोगों पर क्या असर पड़ता है, यह आने वाले समय में तय करेगा कि यह हमारे उपयोग के लिए कितना मददगार होगा।

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