TikTok पर ईयू का कड़ा एक्शन: बच्चों की प्राइवेसी से खिलवाड़ का आरोप, कमाई का 6% तक लग सकता है जुर्माना
यूरोपीय संघ (EU) ने टिकटॉक को बच्चों की निजता नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है। आयोग के मुताबिक, प्लेटफॉर्म की खामियों के चलते वयस्क आसानी से नाबालिगों के अकाउंट देख सकते हैं। उचित जवाब न मिलने पर टिकटॉक पर उसकी कुल वैश्विक कमाई का 6 प्रतिशत तक भारी जुर्माना लग सकता है।

विस्तार
शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक (TikTok) एक बार फिर नियामकीय जांच के घेरे में आ गया है। यूरोपीय आयोग (European Commission) ने कहा है कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की प्राइवेसी की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की। आयोग के मुताबिक, इस कमी की वजह से वयस्क यूजर्स बच्चों के अकाउंट देख सकते थे, जिससे उनकी सुरक्षा और निजता दोनों पर खतरा पैदा हुआ।
साइबर बुलिंग और शोषण का बढ़ा खतरा
- यूरोपीय आयोग ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि टिकटॉक की सेटिंग्स और सुरक्षा उपाय इतने मजबूत नहीं थे कि बच्चों की प्रोफाइल को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके। इसके चलते नाबालिग यूजर्स साइबर बुलिंग, अनचाहे संपर्क और शोषणकारी व्यवहार जैसे गंभीर जोखिमों का सामना कर सकते थे।
- आयोग का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और कंपनियों को इस दिशा में सख्त नियमों का पालन करना होगा।
TikTok को मिलेगा जवाब देने का मौका
- यूरोपीय आयोग ने फिलहाल अपनी जांच के निष्कर्ष TikTok के सामने रख दिए हैं। अब कंपनी को इन आरोपों पर अपना पक्ष रखने और जवाब देने का अवसर दिया जाएगा।
- अगर आयोग TikTok के जवाब से संतुष्ट नहीं होता, तो वह कंपनी के खिलाफ 'गैर-अनुपालन' के नियमों के तहत कार्रवाई कर सकता है। इसके बाद TikTok पर उसकी कुल वैश्विक सालाना आय का 6% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
- यह पहली बार नहीं है जब TikTok यूरोपीय संघ के निशाने पर आया हो। इसी साल फरवरी में भी यूरोपीय संघ ने कंपनी पर अपने डिजिटल सर्विस नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।
- उस समय आयोग ने कहा था कि टिकटॉक के ऑटोप्ले और अंतहीन स्क्रॉलिंग जैसे फीचर्स यूजर्स को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं। खासतौर पर बच्चों और किशोरों के लिए ये फीचर्स मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
बिग टेक पर यूरोपीय संघ की सख्ती जारी
हाल के वर्षों में यूरोपीय संघ ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों पर लगातार सख्ती दिखाई है। मेटा, एपल और अन्य वैश्विक टेक कंपनियां भी यूरोपीय डिजिटल नियमों के तहत जांच और कार्रवाई का सामना कर चुकी हैं। अब टिकटॉक भी उसी कड़ी में शामिल हो गया है। यदि कंपनी यूरोपीय आयोग की चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं दे पाती, तो उसे भारी आर्थिक दंड के साथ अपने प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव भी करने पड़ सकते हैं।
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