ई-मुद्रा की बड़ी चूक: कमजोर डिजिटल चाबियों से खतरे में पड़ सकती थीं करोड़ों वेबसाइटें, साइबर अटैक का जोखिम टला

विस्तार
बंगलूरू स्थित जानी-मानी टेक कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) इन दिनों एक बड़े साइबर सिक्योरिटी विवाद के केंद्र में है। यह कंपनी वेब ब्राउजर्स को वेबसाइट्स प्रमाणित करने वाले डिजिटल सर्टिफिकेट्स जारी करती है। हाल ही में खुलासा हुआ है कि कंपनी द्वारा जनरेट किए गए आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट्स से जुड़ी प्राइवेट क्रिप्टोग्राफिक कीज (Cryptographic Keys) बेहद कमजोर थीं। इस खामी ने पूरी दुनिया की इंटरनेट सिक्योरिटी की नींद उड़ा दी है। आशंका है कि हैकर्स इन कमजोर चाबियों का फायदा उठाकर सुरक्षित कनेक्शंस में सेंध लगा सकते हैं और असली दिखने वाली फर्जी वेबसाइट्स तैयार कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई चूक?
- ई-मुद्रा ने 21 अक्टूबर 2026 को जारी एक प्रेस रिलीज में बताया कि इन आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट्स की प्राइवेट कीज 30 अप्रैल 2025 को बनाई गई थीं। इस प्रक्रिया के दौरान एक तकनीकी खामी आ गई, जिससे असली और मजबूत कीज के साथ-साथ 'वीक कीज' (कमजोर चाबियों) का एक सेट भी जनरेट हो गया।
- आमतौर पर वेब सिक्योरिटी के लिए इस्तेमाल होने वाली प्राइवेट कीज में 116 अंक (384 बिट्स) होते हैं, जिन्हें क्रैक करना लगभग नामुमकिन होता है। लेकिन इस मामले में, जनरेट हुई कीज का साइज 3 से 8 बिट्स के बीच था। कुछ कीज तो सिर्फ '4' जैसे एक सिंगल डिजिट जितनी छोटी थीं।
रिसर्चर ने कैसे खोली पोल?
इस गंभीर खामी का खुलासा बीते वीकेंड तब हुआ जब 'वेन' (Wayne) नाम के एक इंडिपेंडेंट रिसर्चर ने एआई तकनीक की मदद से इन कमजोर कीज को रिवर्स-इंजीनियर कर लिया। मामले की गंभीरता को साबित करने के लिए वेन ने ई-मुद्रा के नाम से एक वेबसाइट बनाई और ई-मुद्रा के ही प्राइवेट की से डिजिटल साइन करके एक मैसेज पोस्ट किया। इसके बाद उन्होंने तुरंत एपल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी कंपनियों को इस बड़े खतरे से अलर्ट कर दिया।
टेक दिग्गजों ने क्या उठाए कदम?
- रिसर्चर का अलर्ट मिलते ही टेक जगत में खलबली मच गई। ब्राउजर निर्माता कंपनियों, ऑपरेटिंग सिस्टम वेंडर्स और क्लाउडफ्लेयर जैसी वेब इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों ने बिना कोई देरी किए ई-मुद्रा के सभी आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट्स को ब्लॉक कर दिया।
- गूगल ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए अपने क्रोम रूट स्टोर से ई-मुद्रा के रूट सर्टिफिकेट को ही हटाने का एलान कर दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि उन एप्लिकेशन्स और डिवाइसेस को भी बचाया जा सके जिन्हें समय पर अपडेट्स नहीं मिलते।
साइबर एक्सपर्ट्स और CERT-In ने जताई गंभीर चिंता
भारत की नोडल साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) ने भी इस मामले में अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इन कमजोर प्राइवेट कीज की मदद से हैकर्स फर्जी डोमेन बनाकर 'मैन-इन-द-मिडिल' अटैक कर सकते थे। इससे एन्क्रिप्टेड बातचीत को आसानी से इंटरसेप्ट या मॉडिफाई किया जा सकता था।
सुरक्षा चूक पर ई-मुद्रा ने क्या कहा?
- चौतरफा आलोचनाओं के बीच ई-मुद्रा ने स्पष्ट किया है कि उनके इंटरनल सिस्टम में कोई सेंधमारी नहीं हुई है। भारतीय यूजर्स के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी ने साफ कहा है कि भारत में दी जाने वाली डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) और eSign सर्विस पर इस खामी का कोई असर नहीं पड़ा है।
- कंपनी के मुताबिक, जिस ग्लोबल बिजनेस में यह गड़बड़ी हुई है, वह उनके भारतीय बिजनेस के इंफ्रास्ट्रक्चर से पूरी तरह अलग है और यह कंपनी के कुल रेवेन्यू का सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि, ई-मुद्रा ने माना है कि इस घटना से उनकी साख को नुकसान जरूर हुआ है। फिलहाल, कंपनी प्रभावित ग्राहकों को नए और सुरक्षित सर्टिफिकेट्स जारी करने का काम कर रही है, ताकि कोई अहम सर्विस बाधित न हो।
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