DPDP Rules: 28 सितंबर को जारी होंगे DPDP एक्ट के नियम, जानिए इस कानून की कुछ खास बातें
DPDP Rules Important Regulations:
भारत सरकार अब आपके डिजिटल डेटा को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियमों को 28 सितंबर को जारी किया जाएगा।

विस्तार
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम अब तैयार हो चुके हैं और अगले 10 दिनों में जारी कर दिए जाएंगे। यह जानकारी केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को दी। उन्होंने बताया कि इन नियमों को लाने से पहले व्यापक स्तर पर परामर्श प्रक्रिया पूरी की गई है। वैष्णव ने कहा, “डीपीडीपी नियम तैयार हैं और कुछ ही दिनों में प्रकाशित कर दिए जाएंगे।” उन्होंने पुष्टि की कि इन्हें 28 सितंबर तक लागू कर दिया जाएगा। मंत्री एआई इंपैक्ट समिट के प्री-इवेंट में बोल रहे थे।
इस कानून का मकसद नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित करना और कंपनियों द्वारा उसके दुरुपयोग पर रोक लगाना है। आइए जानते हैं नागरिकों की डिजिटल जानकारियों को सुरक्षित रखने के लिए इस कानून के तहत क्या प्रावधान किए गए हैं।
क्यों लाया जा रहा है यह कानून?
आज हर कोई ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करता है, फिर चाहे वह बैंकिंग हो, सोशल मीडिया या ई-कॉमर्स। इस दौरान हमारा नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल और यहां तक कि वित्तीय जानकारी भी कई कंपनियों और एप्स के पास पहुंच जाती है। यदि यह डेटा लीक हो जाए या गलत हाथों में चला जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी खतरे को देखते हुए यह कानून बनाया गया है, ताकि डिजिटल दुनिया में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा की गारंटी दी जा सके।
कानून की कुछ प्रमुख बातें
- नए डेटा संरक्षण कानून के तहत अब हर व्यक्ति को अपने निजी डेटा पर पूरा अधिकार मिलेगा। किसी भी कंपनी को किसी का डेटा इस्तेमाल करने से पहले उसकी स्पष्ट और आसान भाषा में सहमति लेनी होगी, जिसे भारत की 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में दिया जा सकता है।
- कंपनियों को यह भी बताना होगा कि वे डेटा क्यों ले रही हैं और उसका इस्तेमाल कहां होगा। साथ ही, वे केवल उतना ही डेटा इकट्ठा कर पाएंगी जितना जरूरी हो और उसका इस्तेमाल सिर्फ तयशुदा उद्देश्य के लिए ही किया जाएगा।
- यदि किसी तरह का डेटा लीक होता है तो कंपनियों को तुरंत प्रभावित यूजर्स और नियामक संस्थाओं को इसकी जानकारी देनी होगी।
- 18 साल से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा के लिए भी खास नियम बनाए गए हैं, ताकि उन्हें टारगेटेड विज्ञापनों और संभावित दुरुपयोग से बचाया जा सके।
- इस कानून के तहत नागरिकों को अपने डेटा को देखने, उसमें सुधार करने, हटाने और दी गई सहमति वापस लेने का हक भी मिलेगा।
- इसके अनुपालन की निगरानी और शिकायतों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड (DPB) बनाया जाएगा, जो नियम तोड़ने वालों पर दंड भी लगाएगा।
मीडिया सेक्टर की चिंता
DPDP कानून को लेकर कई पत्रकार संगठनों और एडिटर्स गिल्ड ने चिंता जताई है। उनकी सबसे बड़ी चिंता धारा 7 को लेकर है। इस प्रावधान के तहत किसी भी व्यक्ति की जानकारी एकत्रित करने या प्रकाशित करने से पहले उसकी सहमति लेना अनिवार्य है। मीडिया संगठनों का कहना है कि यह प्रावधान पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी भ्रष्ट अधिकारी या ठेकेदार पर खबर करनी हो, तो उससे सहमति लेना ही खबर के उद्देश्य को खत्म कर देगा।
इसके अलावा, यह आशंका भी जताई जा रही है कि कानून के कुछ प्रावधान डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को पत्रकारों से उनके स्रोत उजागर करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। मीडिया निकायों को डर है कि इससे सूचना का अधिकार (RTI) कानून भी कमजोर हो जाएगा और जनता को महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
भारी जुर्माने का प्रावधान
कानून के तहत 50 से 200 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कारण है कि पत्रकार संगठनों ने सरकार से या तो इस कानून में संशोधन करने या नियमों में स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान जोड़ने की मांग की थी। लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है। इसी वजह से मीडिया क्षेत्र में यह डर बना हुआ है कि यह कानून प्रेस की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है।