Fact Check: क्या वाकई अमेरिका के पेंटागन कॉम्प्लेक्स में हुआ धमाका? जानें सोशल मीडिया पर वायरल खबर की सच्चाई
कई यूजर्स का कहना है कि यह खबर गलत है और इस इमेज को एआई द्वारा बनाया गया है। चलिए जानते हैं सोशल मीडिया पर वायरल इस खबर की सच्चाई।

विस्तार
सोशल मीडिया पर अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी के पेंटागन कॉम्प्लेक्स में जोरदार ब्लास्ट की खबर वायरल हो रही है। खबर को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है। खबर के साथ एक फोटो भी शेयर की जा रही है, जिसमें कॉम्पलेक्स के बाहर विस्फोट के बाद का धुएं का गुबार देखा जा सकता है। कई यूजर्स का कहना है कि यह खबर गलत है और इस इमेज को एआई द्वारा बनाया गया है। चलिए जानते हैं सोशल मीडिया पर वायरल इस खबर की सच्चाई।
ट्विटर ने डिलीट किया ट्वीट
अमेरिका के पेंटागन कॉम्प्लेक्स में ब्लास्ट को लेकर OSINTdefender नामक न्यूज और मीडिया कंपनी ने ट्विटर पर जानकारी दी थी। हालांकि, ट्विटर ने इस पोस्ट को हटा दिया है। अब न्यूज कंपनी ने खुद इस खबर को गलत बताया है और कहा है कि कुछ समय के लिए हमने वाशिंगटन डी.सी. में पेंटागन के पास विस्फोट के संबंध में अपना पोस्ट हटा दिया है, भले ही इस पर बहुत सारे अकाउंट रिपोर्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तस्वीर और इन प्रारंभिक रिपोर्ट के अलावा इसके होने का कोई सबूत नहीं है। बता दें कि इस वायरल न्यूज को कई अन्य प्रमाणित अकाउंट्स ने भी पोस्ट किया था।
मीडिया फर्म ने इसको लेकर माफी भी मांगी है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "भ्रम और संभावित गलत सूचना के लिए क्षमा करें, इस समय बहुत सारी रिपोर्ट और दावे चल रहे हैं कि मैं एक व्यक्ति के रूप में इसे संभालने के लिए संघर्ष कर रहा हूं।
ब्लास्ट को लेकर अमेरिकी अधिकारियों ने क्या कहा?
अमेरिकी अधिकारियों ने ब्लास्ट की खबर को नकार दिया है। पेंटागन में अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आज सुबह परिसर में या उसके पास कोई विस्फोट या इस तरह की कोई घटना नहीं हुई। जिस मीडिया कंपनी ने सबसे पहले ब्लास्ट का दावा किया है, उसका कहना है कि यह फोटो एआई द्वारा बनाई गई है।
कंपनी ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि सर्कुलेट की जा रही फोटो एक एआई जनरेट की गई फोटो है जो सिर्फ यह दिखाती है कि इस प्रकार की फोटो का उपयोग आसानी से न्यूज को मैनिपुलेट करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह भविष्य में काफी खतरनाक हो सकता है।
क्या AI वाकई बना सकता है फेक फोटो?
जी हां, फेक फोटो बनाने या खबर को मैनिपुलेट करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पहले भी एआई द्वारा बनाई गई फोटो को सच बताया गया है। हाल ही में एआई की मदद से डोनाल्ड ट्रम्प की गिरफ्तारी की फेक तस्वीरें बनाई गईं थीं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं थीं। इन फोटो में डोनाल्ड ट्रम्प को पोर्नस्टार-हश मनी मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया दिखाया गया था।

यह फोटो एकदम असली लग रही थीं और इसे सोशल मीडिया पर जमकर शेयर भी किया गया। मिडजर्नी द्वारा तैयार की गई यह तस्वीरें अविश्वसनीय रूप से वास्तविक दिख रही थीं। इन फोटो में पुलिस द्वारा ट्रंप की गिरफ्तारी एकदम असली लग रही थी। इन फोटो में ट्रंप को जेल में दिखाया गया था। यहां तक कि इन फोटो में जेल में ट्रंप इधर-उधर भागते हुए और नारंगी जंपसूट पहने कैंटीन में खाना खाते हुए भी दिख रहे थे। एआई ने ट्रंप को जेल के फर्श पर झाड़ू लगाते हुए भी दिखाया था।
क्या है वायरल न्यूज की सच्चाई?
अमर उजाला के फेक्ट चेक में खबर एकदम गलत पाई गई है। वायरल न्यूज में जिस फोटो का इस्तेमाल किया गया है वह एआई द्वारा बनाई गई है और इसमें गई गलतियां भी हैं। फोटो में दिखने वाले पिलर में डिटेलिंग की कमी और ध्यान से देखने पर यह नकली लग रहे हैं। वहीं अमेरिकी अधिकारियों और ट्विटर ने भी दावे को गलत बताया है।