Airport: दिल्ली एयरपोर्ट का GPS 'सिग्नल ब्लास्टिंग' से हुआ था हैक, ISRO का NavIC बन सकता है सुरक्षा कवच

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Mon, 10 Nov 2025 11:03 AM IST
सार

Delhi Airport GPS Signal Spoof:

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 7 नवंबर को हुई तकनीकी गड़बड़ी के पीछे चौंकाने वाली वजह सामने आई है। जांच में पता चला कि एयरपोर्ट के GPS सिग्नल के साथ छेड़छाड़ की गई थी, जिससे पायलटों को गलत पोजिशन दिखाई दी।

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जानिए क्या है सिग्नल ब्लास्टिंग - फोटो : Adobe Stock

    विस्तार

    दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पिछले सप्ताह हुई तकनीकी गड़बड़ी के पीछे बड़ा साइबर खतरा सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) के सिग्नल्स से जानबूझकर छेड़छाड़ की थी, जिससे उड़ान संचालन पर भारी असर पड़ा। 7 नवंबर की सुबह 9 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के ऑटोमैटिक मैसेज स्विच सिस्टम (AMSS) में खराबी आने के बाद एयरपोर्ट पर 12 घंटे से ज्यादा समय तक फ्लाइट्स बाधित रहीं। 800 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी हुई, जबकि 20 को रद्द करना पड़ा। देर रात करीब 9:30 बजे सिस्टम दोबारा सामान्य हुआ।

    पायलटों को ट्रैक के जगह दिखे खेत

    6 से 7 नवंबर की शाम के बीच कई पायलटों ने बताया कि उन्हें GPS से फेक सिग्नल मिलने लगे। कॉकपिट स्क्रीन पर रनवे की जगह खेत और गलत लोकेशन दिखाई देने लगी। इससे विमान की ऊंचाई और पोजिशन को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई। हालात को संभालने के लिए पायलटों ने ऑटोमैटिक की बजाय मैनुअल मोड में विमान नियंत्रित किया, जिससे बड़ी दुर्घटनाएं टल गईं।

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    GPS की इस खामी के वजह से हुआ अटैक

    साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सिविलियन GPS ओपन सीए सिग्नल देता है जिसे स्यूडो रैंडम नॉयज (पीआरएन) के आधार पर रिसीव किया जाता है। पीआरएन सिग्नल की कॉपी की जा सकती है, जबकि मिलिट्री ग्रेड GPS एनक्रिप्टेड होते हैं, यानी इनमें किसी तरह की दखल नहीं की जा सकती। इस घटना में GPS के ओपन सिविलियन सिग्नल की कॉपी बनाकर “सिग्नल ब्लास्ट” किया गया। इससे पायलटों को नकली सिग्नल मिलने लगे और ATC सिस्टम भी क्रैश हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला किसी विदेशी सरकार या अंतरराष्ट्रीय हैकर्स की मदद से किया गया हो सकता है।

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    ‘नाविक’ सिस्टम बन सकता है सुरक्षा की ढाल
    ‘नाविक’ सिस्टम बन सकता है सुरक्षा की ढाल - फोटो : Adobe Stock

    देशभर में बढ़े GPS छेड़छाड़ के मामले

    DGCA की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में भारत में 465 से ज्यादा GPS इंटरफेरेंस के मामले दर्ज किए गए हैं। ज्यादातर घटनाएं जम्मू और अमृतसर जैसे सीमावर्ती इलाकों में हुई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भारत की विमानन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

    ‘नाविक’ सिस्टम बन सकता है सुरक्षा की ढाल

    इसरो द्वारा विकसित स्वदेशी ‘नाविक’ (NavIC) नेविगेशन सिस्टम को जल्द ही भारतीय हवाई मार्गों में लागू किया जाएगा। यह पूरी तरह भारत के नियंत्रण में है और GPS की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नाविक सिस्टम पहले से सक्रिय होता, तो दिल्ली एयरपोर्ट की यह घटना टल सकती थी।

    केंद्र सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। NSA कार्यालय में हुई बैठक में एयरपोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों से पूरी रिपोर्ट मांगी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें साइबर हमला या विदेशी ताकतों की भूमिका तो नहीं थी।

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