Deepseek: डीपसीक ने लॉन्च किया नया स्पर्श अटेंशन मॉडल, लंबे कॉन्टेक्स्ट ऑपरेशन होंगे सस्ते
चीन की कंपनी डीपसीक ने नया स्पर्श अटेंशन मॉडल V3.2-exp लॉन्च किया है, जो लंबे कॉन्टेक्स्ट ऑपरेशंस की लागत आधी कर सकता है। जानें पूरी डिटेल्स।

विस्तार
चीन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च कंपनी डीपसीक ने सोमवार को अपना नया एक्सपेरिमेंटल मॉडल V3.2-exp जारी किया है। यह मॉडल खासतौर पर लंबे कॉन्टेक्स्ट ऑपरेशंस के दौरान इनफेरेंस कॉस्ट को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है। डीपसीक ने एआई कम्यूनिटी प्लेटफार्म हगिंग फेस पर इसकी घोषणा की और गिटहब पर इससे जुड़ा एक रिसर्च पेपर भी जारी किया। कंपनी का दावा है कि इस मॉडल से एपीआई (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) कॉल की कीमत आधी तक कम की जा सकती है।स्पर्श अटेंशन क्या है?
नए मॉडल की सबसे अहम तकनीक है डीपसीक स्पर्श अटेंशन। इसमें दो अहम सिस्टम शामिल हैं पहली लाइटनिंग इंडेक्सर, जो कॉन्टेक्स्ट विंडो से जरूरी हिस्सों को चुनता है। दूसरी फाइन-ग्रेन टोकन सिलेक्शन सिस्टम, जो इन हिस्सों से खास टोकन चुनकर अटेंशन विंडो में लोड करता है। इन दोनों प्रक्रियाओं की मदद से मॉडल लंबे टेक्स्ट को भी कम सर्वर लोड पर प्रोसेस कर सकता है।शुरुआती टेस्टिंग और नतीजे कैसे रहे?
कंपनी के शुरुआती परीक्षणों में पाया गया कि स्पर्श अटेंशन की मदद से लंबे कॉन्टेक्स्ट वाले एपीआई कॉल्स की कीमत 50% तक घटाई जा सकती है। चूंकि यह मॉडल ओपन-वेट है और हगिंग फेस पर उपलब्ध है इसलिए अन्य रिसर्च टीमें भी इसका परीक्षण कर पाएंगी।एआई रिसर्च पर असर
एआई इंडस्ट्री में इनफेरेंस कॉस्ट यानी पहले से ट्रेन किए गए मॉडल को रन करने का खर्च एक बड़ी चुनौती है। डीपसीक का कहना है कि स्पर्श अटेंशन की मदद से ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर को ज्यादा एफिशिएंट बनाया जा सकता है। डीपसीक पहले भी आर1 मॉडल लॉन्च कर सुर्खियों में आया था, जिसे रिइंफोर्समेंट लर्निंग से कम लागत पर ट्रेन किया गया था। हालांकि, उससे उम्मीद के मुताबिक बड़ा बदलाव नहीं हुआ। स्पर्श अटेंशन से कंपनी अब एआई को और किफायती बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह आर1 की तरह बड़ी हलचल न मचाए, लेकिन स्पर्श अटेंशन अमेरिकी कंपनियों के लिए इनफेरेंस कॉस्ट घटाने का एक अहम सबक साबित हो सकता है।निष्कर्ष
डीपसीक का यह नया मॉडल एआई इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर इसके शुरुआती नतीजे सही साबित होते हैं, तो यह लंबे कॉन्टेक्स्ट वाले ऑपरेशंस को सस्ता और तेज बना सकता है।