Viral Video: एआई डीपफेक का जाल, वायरल हुआ पीएम मोदी का फर्जी वीडियो ; जानें क्या है सच
Narendra Modi Fake Video:
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का एक कथित वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो राफेल जेट को पाकिस्तान की ओर से नष्ट किए जाने का दावा कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सरकार की फैक्ट-चेक इकाई ने इस वीडियो को फर्जी और एआई से छेड़छाड़ किया हुआ बताया है।

विस्तार
हाल ही में कुछ पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक वीडियो शेयर किया गया, जिसमें पीएम मोदी को भाषण देते दिखाया गया। वीडियो में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने भारत के राफेल जेट को नष्ट कर दिया। हालांकि पीआईबी फैक्ट चेक ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो एआई तकनीक से एडिट और मैनिपुलेट किया गया है। आधिकारिक एक्स अकाउंट से सही वीडियो का लिंक साझा करते हुए बताया गया कि वायरल क्लिप में ऑडियो और विजुअल दोनों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
कैसे बनता है फर्जी वीडियो?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डीपफेक तकनीक किसी भी व्यक्ति के चेहरे और आवाज की नकल कर सकती है। मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म हजारों फोटो और वीडियो डेटा से ट्रेन होकर हूबहू आवाज और हावभाव तैयार कर देते हैं। सरकार ने डीपफेक वीडियो पहचानने का तरीका भी बताया है। जैसे होंठों की मूवमेंट और आवाज में हल्का अंतर, आंखों की झपकने की असामान्य दर, चेहरे की लाइटिंग में असंगति और वीडियो की क्वालिटी में अनियमित बदलाव को ध्यान से देखकर फर्जी वीडियो को पहचाना जा सकता है।
लोगों को दी गई चेतावनी
फैक्ट चेक ने कहा कि यह भारत के खिलाफ गलत सूचना फैलाने की कोशिश है। लोगों से अपील की गई है कि वह किसी भी संदिग्ध वीडियो को बिना सत्यापन शेयर न करें, फर्जी कंटेंट मिलने पर तुरंत रिपोर्ट करें, साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं।
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सरकार के सख्त डिजिटल नियम
केंद्र सरकार ने डीपफेक और एआई से बने भ्रामक कंटेंट पर रोक लगाने के लिए डिजिटल नियमों को भी सख्त किया है। उन्होंने एआई से बने कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य कर दी है। साथ ही कंटेंट के स्रोत की जानकारी देना जरूरी, गैरकानूनी सामग्री को 3 घंटे के भीतर हटाना और प्लेटफॉर्म्स के लिए कम समय-सीमा में कार्रवाई अनिवार्य कर दी है। इन नियमों का उद्देश्य सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाना है।
टेक एक्सपर्ट विश्लेषण
एआई जहां शिक्षा, हेल्थ और टेक्नोलॉजी में क्रांति ला रहा है, वहीं डीपफेक जैसी तकनीक राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक भरोसे के लिए खतरा बन सकती है। आने वाले समय में एआई रेगुलेशन और डिजिटल साक्षरता दोनों ही बेहद अहम होंगे।