क्रिप्टोकरेंसी से बने अरबपति हुए लैंबॉर्गिनी के दीवाने, 1 साल में 10% बढ़ी कार की बिक्री

आजकल डिजिटल करेंंसी का बोलबाला है। अभी हाल ही में बिट्कॉइन और इसकी जैसी ही दूसरी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर काफी बवाल हुआ था। भारत सरकार और आरबीआई ने बताया था कि बिट्कॉइन को भारत में कानूनी और लीगल टेंडर नहीं माना जाएगा।
वैसे बिट्कॉइन की कीमत जानने के बाद आपको दिमाग में सवाल घूम रहा होगा कि आखिर बिट्कॉइन में निवेश करने वाले अमीर लोग इतने सारे पैसों का करते क्या हैं तो आपको बता दें कि बिट्कॉइन खरीदने और बेचने वाले लोग लैंबॉर्गिनी जैसी महंगी कारें खूब खरीद रहे हैं। इसका खुलासा एक रिपोर्ट से हुआ है जिसमें बताया गया है कि लग्जरी कारों की बिक्री 10% तक बढ़ गई है।
रिपोर्ट की मानें तो इन लोगों ने महज 9,000 रुपए का निवेश किया था जो आज 6 करोड़ रुपये हो गया है। ऐसे में चाहे कितनी भी महंगी कार हो इन्हें क्या फर्क पड़ता है। इसका ट्रेंड सिलिकॉन वैली में काफी देखने को मिल रहा है। आमतौर पर करोड़पति लोग पार्टी या फिजूलखर्ची पर पैसे खर्च करते हैं लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अटलांटा के 35 साल के कोडिंग करने वाले पीटर सेडिंगटन ने 45 बिटकॉइन बेचकर लैंबॉर्गिनी हुराकेन खरीदी। इस कार की कीमत करीब 1.30 करोड़ रुपए है। पीटर ने 2011 में बिटकॉइन खरीदे थे, तब इनकी कीमत तीन डॉलर से भी कम थी। उन्होंने पूरी राशि बिटकॉइन में ही दी। क्रिप्टोकरेंसी से घर दिलवाने वाली कंपनी के फाउंडर पाइपर मोरेट्टी बताते हैं कि उनकी एक क्लाइंट बिटकॉइन से 20.80 करोड़ रुपए का घर खरीदना चाहती थीं, लेकिन डील नहीं होने पर उन्होंने लैंबॉर्गिनी कार ही खरीद ली।
तीन साल में कंपनी ने हुराकेन मॉडल की 9,000 कारें बनाईं

लैंबॉर्गिनी कारों को लेकर इस दीवानगी का फायदा कंपनी को हुआ है। कंपनी का कहना है कि उनकी सेल्स काफी तेजी से बढ़ रही है। 2017 में जहां कंपनी ने 3,815 कारें बेचीं थी, वहीं 2016 में 3,457 ही कार बिकीं थीं। इस दौरान सिर्फ हुराकेन मॉडल की 2,642 कारें बिक गईं। इस मॉडल की डिमांड ज्यादा होने के कारण तीन साल में कंपनी ने 9,000 से ज्यादा कारें बनाई। अब कंपनी को अपनी एसयूवी उरूस से भी ऐसी ही उम्मीदें हैं। इससे कंपनी की सेल्स दोगुनी हो जाने का अनुमान है। क्रिप्टोकरेंसी से अमीर बनने वालों का जुनून ऐसा ही रहा तो ये टारगेट भी पूरा हो जाएगा।