देश में कोरोना वायरस की प्रतिदिन की स्थिति को लेकर हर रोज स्वास्थ्य मंत्रालय प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है। सोमवार यानी 13 अप्रैल को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 796 नए मामले और 35 लोगों की मौत हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना को लेकर कर्नाटक की तैयारी और राज्य द्वारा टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर राज्य सरकार की तारीफ हुई। कोविड19इंडिया पोर्टल के मुताबिक कर्नाटक में कोरोना संक्रमितों की संख्या 247 हो गई है लेकिन इसी बीच एक राहतभरी खबर यह है कि कर्नाटक में कोरोना वायरस से संक्रमित लोग तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। छह अप्रैल के बाद राज्य में काफी सुधार देखने को मिल रहा है। कर्नाटक में कोरोना से अभी तक 59 लोग ठीक हो चुके हैं और बाकियों का इलाज चल रहा है। कोरोना को हराने में कर्नाटक ने टेक्नोलॉजी का किस तरह इस्तेमाल किया है आइए जानते हैं... मॉनिटरिंग के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर्नाटक सरकार की स्पेशल टास्क फोर्स टीम ने कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रति लोगों को आगाह करने के लिए Corona Watch एप लॉन्च किया। इस एप को अभी तक एक लाख से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया है। कोरोना वॉच एक लोकेशन ट्रैकर एप है जो लोगों को कोरोना से संक्रमित इलाकों के बारे में अलर्ट करता है। इस एप से उनलोगों पर भी नजर रखी गई जिन्हें 14 दिनों की लिए क्वारंटीन किया गया था या सेल्फ आइसोलेशन में रखा गया था। कर्नाटक में जिन लोगों को होम क्वारंटीन किया गया है उन्हें इस एप पर हर घंटे सेल्फी अपलोड करने का भी आदेश दिया गया है। एप पर अपलोड होने वाली सेल्फी की मॉनिटरिंग कोरोना वायरस वॉर रूम में होती है। एप को डाउनलोड करना और साथ ही 24x7 घंटे एप को ऑन भी रखना होता था। अगर होम क्वारंटीन में रखे गए लोग नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उन्हें फिर अस्पताल में क्वारंटीन करने का प्रावधान है। इसकी जानकारी खुद कोरोना वॉर रूम के सचिव मुनीश मौदगिल ने दी है। कर्नाटक सरकार की ओर से टेलीग्राम एप पर एक ग्रुप भी बनाया गया है जिसका नाम ‘COVID-19 Karnataka: Sahaya Group’ है। इस ग्रुप से राज्य के हजारों लोग जुड़े हैं जो डॉक्टर्स और एक्सपर्ट से कोरोना को लेकर सवाल पूछते हैं। जवाब देने के लिए सरकार ने डॉक्टर्स की एक टीम बनाई है। इसके लिए 25 हजार लोगों की ट्रेनिंग हुई है। इस ग्रुप के जरिए लोगों को कोरोना से बचने, संक्रमण रोकने और प्राथमिक उपचार के बारे में जानकारी दी जाती है। इसके अलावा टास्क फोर्स मोबाइल कंपनियों की मदद से लोगों की लोकेशन ट्रैक कर रही हैं और संक्रमण वाले इलाके में जाने पर लोगों को अलर्ट कर रही हैं।