Research: मानव मस्तिष्क की जटिलता सुलझी, पार्किंसंस रोगियों को मिलेगी मदद, भारतीयों ने विकसित किया एल्गोरिदम

जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजलज मिश्रा
Fri, 22 Mar 2024 06:44 AM IST
सार

बंगलूरू के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) के डॉक्टरों और गुवाहाटी के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के शोधकर्ताओं ने यह नया एल्गोरिदम विकसित किया है, जिसे यूनिक ब्रेन नेटवर्क आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूबीएनआईएन) के रूप में पहचान दी है।

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Complexity of human brain solved Parkinson patients will get help Indians researchers developed algorithm
IIT Guwahati - फोटो : Social Media

    विस्तार

    तकनीक के सहारे चिकित्सा क्षेत्र एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। भारतीय शोधकर्ताओं ने इन्सानी मस्तिष्क में मौजूद न्यूरॉन्स, पार्किंसंस या अन्य विकार होने पर किस तरह का व्यवहार करते हैं इसे सुलझाते हुए एल्गोरिदम तैयार किया है। इसके जरिये न केवल पार्किंसंस बीमारी की समय से पहले पहचान की जा सकेगी, बल्कि उसके इलाज में भी मदद मिलेगी।

    बंगलूरू के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) के डॉक्टरों और गुवाहाटी के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के शोधकर्ताओं ने यह नया एल्गोरिदम विकसित किया है, जिसे यूनिक ब्रेन नेटवर्क आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूबीएनआईएन) के रूप में पहचान दी है। यह स्वस्थ मनुष्यों और पार्किंसंस (पीडी) रोगियों के मस्तिष्क नेटवर्क को एनकोड करने के लिए डिजाइन किया है।

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    इस तरह की जा सकती है पहचान

    शोधकर्ताओं ने इस डिजाइन की गुणवत्ता और परिणाम पता करने के लिए 180 पार्किंसंस रोगियों और 70 स्वस्थ व्यक्तियों पर अध्ययन किया। इन सभी के मस्तिष्क का एमआरआई कराया गया और उनकी रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने अपने डिजाइन में मस्तिष्क के क्षेत्रों को नोड्स के रूप में दर्शाया है। प्रत्येक नोड के लिए कनेक्शन मानक भी तय किया है, जिससे प्राप्त संख्यात्मक प्रतिनिधित्व यानी यूबीएनआईएन हर व्यक्ति के लिए अलग तरह से देखा गया है। इसके जरिये पता चल सकता है कि व्यक्ति को भविष्य में पार्किंसंस होने की कितनी संभावना है। शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत की यह खोज आगामी दिनों में मानसिक बीमारी के विकास और अन्य बायोमार्कर की पहचान करने में सक्षम होगी।

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    दिमाग का हो सकेगा पुनर्निर्माण

    आईआईटी गुवाहाटी बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि यूबीएनआईएन एक विशेष संख्या है जो नेटवर्क परिप्रेक्ष्य से प्रत्येक मानव मस्तिष्क की अद्वितीय विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करती है। दिलचस्प बात है कि हम मूल मस्तिष्क नेटवर्क के पुनर्निर्माण के लिए किसी भी इन्सान के यूबीएनआईएन मूल्य की रिवर्स इंजीनियरिंग भी कर सकते हैं। यह यूबीएनआईएन एल्गोरिदम हर इन्सान के मस्तिष्क नेटवर्क को कुशलतापूर्वक पहचानने और चिह्नित करने यानी एनकोड और डिकोड करने में सक्षम होगा।

    देश में 5.80 लाख लोगों को पार्किंसंस

    निम्हांस के डॉक्टरों ने बताया कि पार्किंसंस रोग एक न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है। कंपकंपी, कठोरता और धीमी गति इसके नैदानिक लक्षण होते हैं जो उम्र के साथ काफी गंभीर होने लगते हैं। हालांकि, साक्ष्य यह भी बताते हैं कि लक्षण दिखाई देने से पहले ही मरीज में न्यूरो डीजेनरेशन शुरू हो जाता है। अनुमान है कि भारत में करीब 5.80 लाख लोग पार्किंसंस बीमारी से ग्रस्त हैं, जिनकी संख्या आगामी दिनों में और अधिक हो सकती है।

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