HACKER: दुनिया के कई विदेश मंत्रियों के ईमेल सर्वर हैक, चीनी हैकर्स ‘फैंटम टौरस’ ग्रुप ने की बड़ी सेंधमारी
चीनी हैकर्स के एक ग्रुप ‘फैंटम टौरस’ ने दुनिया के विदेश मंत्रियों के ईमेल सर्वर हैक किए, माइक्रोसॉफ्ट एक्सचेंज सर्वर पर गुप्त राजनयिक सूचनाओं और सैन्य डेटा को निशाना बनाया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

विस्तार
चीन से जुड़े हैकर्स ने दुनिया भर के कई देशों के विदेश मंत्रियों के ईमेल सर्वर हैक कर लिए हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्म पालो ऑल्टो नेटवर्क्स की रिसर्च टीम यूनिट 42 ने यह खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला कई वर्षों से चल रहा था और इसका मकसद राजनयिकों की गुप्त जानकारी हासिल करना था।
हैकर्स ने माइक्रोसॉफ्ट एक्सचेंज ईमेल सर्वर तक पहुंच बनाई और विदेशी मंत्रालयों की संवेदनशील सूचनाओं को खोजा। रिसर्चर्स का कहना है कि 2022 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुए चीन-अरब सम्मेलन से जुड़े कीवर्ड्स को खासतौर पर टारगेट किया गया। यहां तक कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लीयुआन के नाम भी खोजे गए। कंपनी ने इस हैकिंग ग्रुप को ‘फैंटम टौरस’ नाम दिया है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन देशों को निशाना बनाया गया लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि इन हमलों का सीधा संबंध चीन के आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों से है।
पालो ऑल्टो नेटवर्क्स के शोधकर्ता लियोर रोचबर्गर ने कहा "जब मैंने देखा कि हैकर्स राजनयिक कीवर्ड्स खोज रहे हैं और दूतावासों व सैन्य गतिविधियों से जुड़ी ईमेल्स निकाल रहे हैं, तभी समझ गया कि यह एक गंभीर खुफिया जानकारी जुटाने का प्रयास है।" चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हैकिंग हर देश के लिए समस्या है और चीन सभी तरह के साइबर हमलों का विरोध करता है। उन्होंने जोड़ा कि साइबरस्पेस काफी जटिल और वर्चुअल है, जहां किसी भी हमले के स्रोत को ट्रेस करना आसान नहीं होता।
रिपोर्ट के अनुसार, फैंटम टौरस की ज्यादातर गतिविधियों का सीधा संबंध खास भू-राजनीतिक घटनाओं और सैन्य गतिविधियों से है। इसमें अफगानिस्तान और पाकिस्तान से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को भी खोजा गया। हाल ही में गूगल ने भी खुलासा किया था कि चीनी हैकर्स ने अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों को निशाना बनाया है। इसके अलावा सितंबर की शुरुआत में हमलावरों ने अमेरिकी संसद की चीन संबंधी समिति के चेयरपर्सन का बन कर संवेदनशील व्यापारिक डेटा चुराने की कोशिश की थी।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का सबूत है कि चीन से जुड़े हैकर्स लगातार दुनियाभर में साइबर जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।