बच्चों पर बुरा असर: अब गेमिंग इंडस्ट्री पर चीन सरकार की टेढ़ी नजर, ‘इलेक्ट्रॉनिक ड्रग्स’ का बाल मन पर पड़ रहा गहरा प्रभाव!
अखबार में कंप्यूटर गेम्स की आलोचना छपने के बाद टेंसेंट ने कहा है कि वह अपने सबसे लोकप्रिय गेम- हॉनर ऑफ किंग्स- को खेलने की समयसीमा और घटा देगा। अभी बच्चे इसे डेढ़ घंटे तक खेल सकते हैं। कंपनी अब इसकी समयसीमा एक घंटा कर देगी...

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खबर है कि हाई-टेक क्षेत्र के कई दूसरे उद्योगों पर लगाम कसने के बाद अब चीन सरकार कंप्यूटर गेम इंडस्ट्री पर चाबुक चलाने वाली है। इस खबर से मंगलवार को हांग कांग स्टॉक एक्सचेंज में चीन में कंप्यूटर गेम की सबसे बड़ी डेवलपर कंपनी टेंसेंट के शेयरों के भाव में 10.36 फीसदी की गिरावट आ गई। दो अन्य गेमिंग कंपनियों- नेटईज और आर्कसौर गेम्स के शेयरों के भाव में तो और भी ज्यादा गिरावट आई। नेटईज के शेयर भाव में 12.3 फीसदी और आर्कसौर गेम्स के शेयरों के भाव में 18.5 फीसदी की गिरावट आई।
इसके पहले चीन के एक सरकारी अखबार ने ऑनलाइन गेमिंग की कड़ी आलोचना की। उसमें छपे लेख में इसे ‘मानसिक अफीम’ और ‘इलेक्ट्रॉनिक ड्रग्स’ बताया गया। चीन के सरकारी अखबार इकोनॉमिक इनफॉर्मेशन डेली में छपे इस लेख में कंप्यूटर गेम्स के बच्चों पर पड़ने वाले कथित हानिकारक असर की विस्तार से चर्चा की गई। इसमें कहा गया कि बच्चों को कंप्यूटर गेम्स की ड्रग्स जैसी लत लग रही है। इसका असर उनके विकास पर पड़ रहा है।
इस लेख को इस बात का संकेत माना गया कि चीन सरकार गेम बनाने वाली कंपनियों पर नए नियम लागू करने पर विचार कर रही है। हाल में बच्चों से संबंधित कारोबार को अनुशासित करना चीन सरकार की प्राथमिकता के रूप में सामने आया है। इसी सिलसिले में कोचिंग और प्राइवेट ट्यूशन इंडस्ट्री पर सख्त कार्रवाई की गई। गेमिंग को लेकर चीन सरकार की क्या मंशा है, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मंगलवार को इकोनॉमिक इनफार्मेशन डेली में जो लेख छपा, उसे कुछ देर बाद इस प्रिंट अखबार की वेबसाइट से हटा लिया गया। लेकिन प्रिंट संस्करण में वह लेख मौजूद है।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन सरकार ने 2018 में गेमिंग के बारे में सख्त नियम लागू किए थे। तब ये कहा गया था कि इन गेम्स का बच्चों की आंख पर गहरा दुष्प्रभाव हो रहा है। उस समय किसी नए गेम को बाजार में लाने की इजाजत न देने का फैसला किया गया था। 2019 में सरकार ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के रात में 10 बजे से सुबह आठ बजे के बीच गेम खेलने पर रोक लगाने का नियम लागू कर दिया था।
लेकिन टेंसेंट और नेटईज कंपनियों ने हाल में इन नियमों से बचने के उपाय कर लिए। उन्होंने गेम की खरीदारी के समय वास्तविक नाम से रजिस्ट्रेशन कराने की शर्त हटा दी। टेंसेंट कंपनी ने स्मार्टफोन के जरिए चेहरे की पहचान (फेशियल रिकॉग्निशन) की शर्त हटा दी। पहले फेशियल रिकॉग्निशन के जरिए ये पक्का किया जाता था कि गेम खरीद रहा व्यक्ति बालिग है।
अब सरकारी अखबार में कंप्यूटर गेम्स की आलोचना छपने के बाद टेंसेंट ने कहा है कि वह अपने सबसे लोकप्रिय गेम- हॉनर ऑफ किंग्स- को खेलने की समयसीमा और घटा देगा। अभी बच्चे इसे डेढ़ घंटे तक खेल सकते हैं। कंपनी अब इसकी समयसीमा एक घंटा कर देगी। इसके अलावा कंपनी ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के गेम्स के खरीद सकने पर रोक लगाने की घोषणा भी की है।