टेक्नोलॉजी में ‘अजेय’ बनता जा रहा है चीन, 'नकलची' बन रही हैं अमेरिकी टेक कंपनियां

Harendra Chaudhary
टेक डेस्क, अमर उजालाHarendra Chaudhary
Tue, 01 Oct 2019 07:58 PM IST
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china us trade war: chinese tech companies are unstoppable, US companies becoming copycat
President Donald Trump and President Xi Jinping - फोटो : SCMP

    अमेरिका और चीन के बीच पिछले एक साल से चल रही ट्रेड वॉर का असर अब दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ने लगा है। इस ट्रेड वॉर के पीछे मुख्य वजह हुवावे की टेक्नोलॉजी को माना जाता है। अमेरिका ने सबसे पहले हुवावे की 5जी टेक्नोलॉजी पर लगाया था। वहीं अमेरिका को कहीं न कहीं ये डर भी है कि टेक्नोलॉजी के मामले में चीन उसे आगे चुनौती दे सकता है। लेकिन लगता है कि चीन ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ‘अश्वमेध यज्ञ’ की शुरूआत कर दी है।

    चिप और AI में चीन की चुनौती

    artificial intelligence
    artificial intelligence - फोटो : becominghuman

    अमेरिका को लगता है कि टेक्नोलॉजी के कुछ क्षेत्रों में चीन जल्द ही उसे पीछे छोड़ देगा। जिस तरह से चीन की घरेलू कंपनियों ने चिप टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़त दिखाई है, उससे लगता है कि वे जल्द ही इस क्षेत्र की बादशाहत हासिल कर लेंगी। अमेरिका के एक थिंक टैंक द काउसिंल ऑन फॉरेन रिलेशन की हालिया एक रिपोर्ट के मुताबिक जल्द ही दोनों देशों के बीच तकनीक का तकनीक को लेकर जो दूरियां बनी हुई हैं वे सिमटती जा रही हैं।

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    खुद को साबित करने में जुटा चीन

    रिपोर्ट के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एनर्जी स्टोरेज, 5जी टेक्नोलॉजी, क्वांटम इंफॉरमेशन सिस्टम और बॉयो टेक्नोलॉजी क्षेत्र में चीन अमेरिका समेत बाकी देशों को पीछे छोड़ देगा। मंगलवार को चीन की 70वीं सालगिरह के जश्न के मौके पर चीन ने ये साबित भी कर दिया है। इस मौके पर चीन ने जिस तरह से हथियारों का प्रदर्शन किया, उससे चीन की मंशा साफ दिखती है कि वह हर क्षेत्र में बादशाह बनने की कुव्वत रखता है।

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    चीन में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 85 करोड़

    चीन की इस बढ़त के पीछे सबसे योगदान टेक्नोलॉजी का ही है। चीन के कुल घरेलू सकल उत्पाद का 34 फीसदी हिस्सा डिजिटल अर्थव्यवस्था से आता है। वहीं चीन में दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी वाली कंपनियां भी हैं जिनमें ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा और टेंसेंट शामिल है। वहीं इंटरनेट की लोकप्रियता बढ़ने का फायदा इन कंपनियों को भी मिला। 2008 के आखिर में जहां चीन में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 29.8 करोड़ थी, जो कुल जनसंख्या का 22 फीसदी थी। वहीं अब यह संख्या बढ़ कर 85 करोड़ को पार कर गई है, जो जनसंख्या का 60 फीसदी है।

    99 फीसदी चीनी यूजर्स मोबाइल पर

    चीन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 99 फीसदी चीनी यूजर्स मोबाइल पर एक्सेस करते हैं। वहीं अमेरिका में 92 फीसदी लोग मोबाइल पर इंटरनेट एक्सेस करते हैं। मोबाइल पर फोकस करने का चीन को फायदा यह है कि कंपनियों के प्रोडक्टस की पहुंच बड़े स्तर पर हो जाती है। वहीं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन का आगे बढ़ना सीधे-सीधे अमेरिका को चुनौती देना है।

    ‘नकल’ करने के आरोप

    हालांकि चीन की कंपनियों की इमेज भी खासी अच्छी नहीं है। चीन की कंपनियों पर बौद्धिक संपदा की चोरी करने जैसे आरोप लग चुके हैं। चीनी टेक कंपनियों के बारे में आमधारणा है कि वे ‘नकल’ अच्छे से करती हैं। एपल आईफोन का डिजाइन कॉपी करने को लेकर कई आरोप पहले ही लगाए जा चुके हैं, साथ ही अलीबाबा की तुलना अमेजन से होती है।

    चीन में नई खोजों की क्षमता

    लेकिन अब चीनी कंपनियों की इस इमेज में सुधार आ रहा है। टेक टाइटन ऑफ चाइन की लेखिका रेबेका फैनिन का कहना है कि सालों से सिलिकॉन वैली चीनी टेक कंपनियों के बारे में सोचती थी कि वे सिर्फ कॉपी करना ही जानते हैं, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, अब अमेरिकी कंपनियां सोचती हैं कि चीन में नए अविष्कार करने की क्षमता है और कई टेक्नोलॉजी क्षेत्र में चीन बहुत शानदार प्रदर्शन कर रहा है।

    फेसबुक ने की टिकटॉक की कॉपी

    यहां तक कि सिलिकॉन वैली कई टेक फर्म्स को भी चीन की नकल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। फेसबुक ने पिछले साल शॉर्ट वीडियो एप लासो लॉन्च किया था, माना जाता है कि फेसबुक ने ये एप टिकटॉक के मुकाबले में लॉन्च किया था। गौरतलब है कि टिकटॉक एप को चीन की कंपनी बाइटडांस ने बनाया है।

    2030 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बादशाह

    पिछले कुछ सालों से चीन भी टेक फील्ड में आगे बढ़ने की अपनी महत्वाकांक्षा को लगातार सार्वजनिक कर रहा है। चीन पहले ही कह चुका है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेक्स्ट जेनरेशन सुपर फास्ट नेटवर्क 5जी में आगे बढ़ना चाहता है। यहां तक कि अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर शुरू होने से पहले 2017 में चीन ने कहा था कि वह 2030 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वर्ल्ड लीडर बनना चाहता है। अलीबाबा, हुवावे, टेंसेंट और बैदू जैसी टैक्नोलॉजी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही हैं। पिछले हफ्ते अलीबाबा ने हुवावे के नक्शे कदम पर चलते हुए खुद की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप लॉन्च कर दी।

    हुवावे ने उड़ाई अमेरिका की नींद

    वहीं 2025 तक चीन की योजना है कि वह सेमीकंडक्टर फील्ड में अहम भूमिका निभाए, चीन अब इस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहा है। अमेरिका की चिंता यह है कि चीन की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल हुवावे पिछले साल स्मार्टफोन की बिक्री में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई, यहां तक एपल को भी पीछे छोड़ दिया, और सैमसंग के बगल में आकर खड़े गई। वहीं नोकिया और एरिक्सन के मुकाबले हुवावे को 5जी टेक्नोलॉजी ट्रायल के कॉन्ट्रैक्ट्स मिलने से अमेरिका की नींद उड़ गई है।

    अमेरिका रिसर्च पर बढ़ाए फंडिंग

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका ने जिस तरह से हुवावे पर बैन लगाया है उसे लगता है कि अमेरिका आगे बढ़ने के प्रयासों की बजाय वहीं पर चीनी टेक कंपनियों की रफ्तार को थामना चाहता है। अमेरिका की कोशिश है कि किस तरह से चीन को इस क्षेत्र में धीमा किया जाए और जरूरी टेक्नोलॉजी को चीन के हाथ लगने से रोका जाए। सीएफआर रिपोर्ट के लेखक एडम सेगल कहते हैं कि अमेरिका को अब ज्यादा से ज्यादा खोजें करने की जरूरत है।

    इसके लिए अमेरिका को रिसर्च और डेवलपमेंट पर ज्यादा फंडिंग बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि इसका असर देश की जीडीपी पर पड़ सकता है। वहीं फैनिन का कहना है कि यूएस-चीन ट्रेड वॉर से दोनों देशों को नुकसान हो रहा है, वे कहते हैं कि चीन की महत्वाकांक्षा टेक या ट्रेड वॉर में आगे बढ़ने की नहीं है, बल्कि वह ग्लोबल लीडर बनना चाहता है।

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