Robot Army: टर्मिनेटर जैसी दुनिया अब दूर नहीं! 5-10 साल में जंग के मैदान में उतरेंगे चीन के 'रोबोट सैनिक'
World Humanoid Robot Games:
बीजिंग में चल रहे वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स में मशीनों ने अपनी रफ्तार और ताकत से दुनिया को चौंका दिया है। अब चीन के एक रोबोटिक्स इंजीनियर ने दावा किया है कि ह्यूमनॉइड रोबोट अगले 5 से 10 साल में सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

विस्तार
आज चीन एक से बढ़कर एक ह्यूमनॉइड रोबोट्स बना रहा है। अपनी इसी क्षमता का दुनिया के सामने प्रदर्शन करने के लिए चीन अपनी राजधानी बीजिंग में 'वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स- 2026' का आयोजन कर रहा है। इस आयोजन में रोबोट्स बिलकुल इंसानों की तरह अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेते दिख रहे हैं। हालांकि, रोबोट्स की इस रेस को चीन सिर्फ खेल के मैदान तक सीमित नहीं रखना चाहता। जिस तकनीक को आज दौड़, मुक्केबाजी, जिम्नास्टिक और फुटबॉल जैसे मुकाबलों में परखा जा रहा है, उसे लेकर अब सैन्य इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज हो गई है। इस आयोजन के बाद यह खबरें भी आ रही हैं कि अब चीन बहुत जल्द रोबोट सैनिकों को भी उतार सकता है।5 से 10 साल में तैयार होंगे 'रोबोट सैनिक'
- शंघाई स्थित ह्यूमनॉइड रोबोट कंपनी एजी बीओटी के रोबोटिक्स इंजीनियर यांग कुन ने सीबीएस न्यूज को बताया कि चीनी कंपनियां अगले पांच से दस वर्षों में ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित कर सकती हैं, जिनका इस्तेमाल सैन्य अभियानों में किया जाएगा। उनका कहना है कि युद्ध के मैदान में इंसानों की जगह मशीनों का इस्तेमाल भविष्य की एक अहम दिशा हो सकती है।
- रिपोर्ट के मुताबिक, इन रोबोटों का इस्तेमाल किसी देश की ताकत दिखाने और दूसरे देशों को हमला करने से रोकने के लिए किया जा सकता है। उनके मुताबिक, मशीनों के इस्तेमाल से इंसानी सैनिकों की जान को जोखिम से बचाया जा सकेगा।
बीजिंग में हो रहा है रोबोटों का बड़ा मुकाबला
- चीन में आयोजित 2026 वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स में 16 देशों की 600 से ज्यादा टीमें हिस्सा ले रही हैं। इस आयोजन में 2,000 से अधिक रोबोट अलग-अलग खेलों में अपनी क्षमता दिखा रहे हैं।
- इनमें 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जिम्नास्टिक, फुटबॉल और बाधा दौड़ जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं। कई रोबोटों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि कुछ मशीनें दौड़ते समय गिर गईं, सुरक्षा अवरोधों से टकराईं और कुछ में आग लगने जैसी घटनाएं भी सामने आईं।
- एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने 100 मीटर की दौड़ महज 9.39 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड नया रिकॉर्ड बनाया। यह समय 2009 में उसेन बोल्ट द्वारा बनाए गए 9.58 सेकंड के रिकॉर्ड से भी बेहतर रहा।
चीन का रोबोटिक्स पर बढ़ता जोर
- वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स को चीन अपनी रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की तेजी से बढ़ती क्षमता दिखाने के मंच के तौर पर भी इस्तेमाल कर रहा है। चीन सरकार विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक बढ़त हासिल करने के लिए एआई और रोबोटिक्स पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है।
- यांग कुन का कहना है कि ह्यूमनॉइड रोबोटों का शुरुआती इस्तेमाल आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने में किया जा सकता है। ये मशीनें घरों और होटलों में सफाई जैसे काम कर सकती हैं।
- लेकिन उनके मुताबिक, इसके बाद इनका इस्तेमाल सैन्य क्षेत्र में भी हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में यही रोबोट युद्ध और अन्य सैन्य अभियानों में भूमिका निभा सकते हैं।
तकनीक की रफ्तार ने बढ़ाई चिंता
ह्यूमनॉइड रोबोटों की बढ़ती क्षमताएं एक तरफ तकनीकी प्रगति की तस्वीर दिखाती हैं, वहीं दूसरी तरफ इनके सैन्य इस्तेमाल को लेकर सवाल भी खड़े करती हैं। इन मशीनों में सोचने-समझने और फैसले लेने की क्षमता तेजी से विकसित हो रही है। इसलिए आज जो मशीनें खेल के मैदान में दौड़ और मुक्केबाजी कर रही हैं, वे भविष्य में इनके इस्तेमाल का दायरा काफी बढ़ा सकती है।
इंसानों के लिए खतरा बनेंगे रोबोट्स?
जब यांग कुन से पूछा गया कि क्या भविष्य में ये रोबोट इंसानों के लिए खतरा बन सकते हैं, तो उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि मशीनों में भावनाएं नहीं होती हैं और यह पूरी तरह से उन्हें बनाने और कंट्रोल करने वाले इंसानों पर निर्भर करेगा कि उनका इस्तेमाल कैसे किया जाता है। दरअसल, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश को विज्ञान और तकनीक के मामले में दुनिया का निर्विवाद सरताज बनाना चाहते हैं। इसी दिशा में एआई और रोबोटिक्स पर भारी निवेश किया जा रहा है। चीनी विशेषज्ञों का दावा है कि भविष्य में ये ह्यूमनॉइड रोबोट घरों और होटलों में सफाई का काम करने से लेकर सेना में एक घातक लड़ाके तक की भूमिका निभाते नजर आएंगे।
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