Cheetah in India: इस कॉलर आईडी से हो रही है चीतों की ट्रैकिंग, जानें कैसे करती है काम

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Wed, 21 Sep 2022 03:40 PM IST
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Cheetah Return To India Know About Satellite Caller Id Which Is Installed Around The Neck
सैटेलाइट कॉलर आईडी से चीतों की ट्रैकिंग हो रही है। - फोटो : अमर उजाला

    लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार देश में चीते की वापसी हो गई है। भारत में नामीबिया से 8 चीतों (5 नर और 3 मादा ) को लाया गया है। इन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया है। करीब 70 साल बाद भारत में चीतों की वापसी हुई है। बता दें कि भारत में वर्ष 1947 में अंतिम बार तीन चीतों को देखा गया था। इसके बाद वर्ष 1952 में इन्हें विलुप्त घोषित कर दिया गया था। कूनो नेशनल पार्क में एक महीने इन चीतों की निगरानी की जाएगी और सब ठीक रहने पर इन्हें मुख्य वन में छोड़ दिया जाएगा। इस चीतों पर नजर रखने के लिए इनके गले में एक कॉलर आईडी लगाई गई है। दरअसल, यह एक सैटेलाइट कॉलर आईडी है, जो चीतों की लोकेशन का पता लगाने में मदद करता है। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि यह सैटेलाइट कॉलर आईडी क्या होता है और कैसे काम करता है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं।

    Cheetah Interesting Facts
    Cheetah Interesting Facts - फोटो : iStock

    क्या होती है कॉलर आईडी ?

    जंगली जानवर जैसे बाघ, शेर और चीता सहित अन्य जानवरों पर निगरानी रखने के लिए उनके गले में सैटेलाइट कॉलर आईडी पहनाई जाती है। इससे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों को इन जानवरों की लोकेशन और एक्टिविटी पर नजर रखने में आसानी होती है। यही कॉलर आईडी नामीबिया से लाए गए 8 चीतों पर लगाई गई है। इस सैटेलाइट कॉलर आईडी की मदद से घने जंगल में भी इन चीतों को खोजा जा सकेगा।

    शेर, चीता, बाघ और तेंदुए में क्या होता है अंतर
    शेर, चीता, बाघ और तेंदुए में क्या होता है अंतर - फोटो : iStock

    लोकेशन और एक्टिविटी के साथ-साथ इस आईडी की मदद से चीतों की हेल्थ का भी अपडेट लिया जा सकेगा। इस तरह की ट्रैकिंग को एनिमल माइग्रेशन ट्रैकिंग कहा जाता है। यानी कि इन चीतों पर बहुत बारीकी से नजर रखी जाएगी और निगरानी के लिए यह सैटेलाइट कॉलर आईडी सबसे अहम डिवाइस के रूप में काम करेगा।

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