अब चैटजीपीटी में दिखेंगे विजुअल विज्ञापन: फोटो बनाते समय ब्रांड्स करेंगे प्रमोशन, क्या है ओपनएआई का नया कदम?
क्या आप भी रोजमर्रा के काम या क्रिएटिविटी के लिए ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां, तो तैयार हो जाइए। सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI अब ChatGPT में विजुअल यानी इमेज-बेस्ड विज्ञापन पेश करने जा रही है। यानी एआई से तस्वीरें बनाते समय यूजर्स को जल्द ही ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज के स्पॉन्सर्ड प्रमोशन्स भी दिखाई देंगे। आखिर यह नया विज्ञापन फॉर्मेट कैसे काम करेगा और क्या इससे आपकी प्राइवेसी पर भी कोई असर पड़ेगा? आइए जानते हैं इस बड़े बदलाव के बारे में विस्तार से...

विस्तार
अगर आप चैटजीपीटी की मदद से अक्सर फोटो जनरेट करते हैं, तो आने वाले समय में इमेज जनरेशन के दौरान आपको सिर्फ एआई से तैयार की गई तस्वीर ही नहीं दिखेगी। ओपनएआई अब चैटजीपीटी में विजुअल विज्ञापनों की टेस्टिंग शुरू करने जा रही है। इन विज्ञापनों के जरिए ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट्स, सर्विसेज और उनसे जुड़े अनुभवों को विजुअली यूजर्स के सामने पेश कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार, विज्ञापन एआई की ओर से बनाई जा रही इमेज से अलग और साफ तौर पर मार्क किए जाएंगे।
कैसे काम करेंगे ये इमेज-बेस्ड विज्ञापन?
कंपनी के अनुसार, ये नए विजुअल ऐड्स यूजर्स को चैटबॉट के इस्तेमाल के दौरान एक खास तरीके से दिखाई देंगे।
- इमेज बनाते समय दिखेंगे विज्ञापन:ये नए विज्ञापन शुरुआती चरण में चैटजीपीटी में इमेज जनरेशन (तस्वीरें बनाते) के दौरान यूजर्स को नजर आएंगे।
- साफ पहचान होगी:कंपनी ने साफ किया है कि ये चैटजीपीटी स्पष्ट रूप से मार्क किए जाएंगे, ताकि यूजर की ओर से बनाई जा रही एआई इमेज और स्पॉन्सर्ड विज्ञापन के बीच आसानी से फर्क किया जा सके।
ओपनएआई ने क्या कहा?
कंपनी ने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि हमारा नया विजुअल एड फॉर्मेट लोगों को यह कल्पना करने में मदद करता है कि प्रोडक्ट्स और सर्विसेज उनके जीवन में कैसे फिट हो सकते हैं। प्रोडक्ट इंस्पिरेशन, यूसेज या अनुभवों को दर्शाने वाली इमेजेस के जरिए लोग नए ब्रांड्स की खोज कर सकते हैं और खरीदने का सही फैसला ले सकते हैं।
क्या विज्ञापन चैटजीपीटी के जवाबों को प्रभावित करेंगे?
यह इस बदलाव का सबसे अहम सवाल है, जिसका जवाब है..नहीं, कंपनी का कहना है कि विज्ञापन चैटजीपीटी के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे। ओपनएआई के अनुसार, Ads और ChatGPT के जवाब अलग रहेंगे। यानी किसी ब्रांड के विज्ञापन देने या न देने के आधार पर AI अपने जवाबों को बदलने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है।
ओपनएआई ने अपने विज्ञापन दृष्टिकोण में प्राइवेसी और यूजर कंट्रोल को भी जरूरी बताया है। कंपनी का कहना है कि बातचीत प्राइवेट रहेगीस और यूजर्स को अपने चैटजीपीटी अनुभव पर नियंत्रण मिलता रहेगा।
अमेरिका में इसी महीने शुरू होगी टेस्टिंग
- ओपनएआई नए Visual Ads Format की टेस्टिंग अमेरिका में इसी महीने के अंत में शुरू करने की तैयारी कर रही है। शुरुआत में कंपनी विज्ञापनदाताओं के एक सीमित समूह के साथ इस फॉर्मेट को टेस्ट करेगी। इसके बाद मिले अनुभव के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। यानी अभी यह फॉर्मेट सभी चैटजीपीटी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं होगा। पहले सीमित स्तर पर इसकी टेस्टिंग होगी और उसके बाद इसके विस्तार पर फैसला लिया जाएगा।
- बता दें कि विजुल एड्स के साथ कंपनी विज्ञापनदाताओं के लिए मेजरमेंट और एनालिटिक्स टूल्स को भी बढ़ा रही है। इसका मकसद ब्रांड्स को यह समझने में मदद करना है कि चैटजीपीटी पर चलाए गए उनके कैंपेन से वास्तव में कितना फायदा हो रहा है।
- कंपनी विज्ञापनदाताओं को यह पता लगाने में मदद करना चाहती है कि चैटजीपीटी पर दिखाई गई किसी विज्ञापन कैंपेन से यूजर वेबसाइट पर पहुंचा या नहीं, ऐप पर कोई एक्टिविटी हुई या नहीं, खरीदारी हुई या फिर कोई दूसरा कन्वर्जन हुआ। इससे ब्रांड्स सिर्फ यह नहीं देख पाएंगे कि कितने लोगों ने विज्ञापन देखा, बल्कि यह भी समझ सकेंगे कि विज्ञापन के बाद यूजर ने क्या किया।
मौजूदा मेजरमेंट सिस्टम से जुड़ सकेंगे विज्ञापन
कंपनी के अनुसार, विज्ञापनदाता अपने मौजूदा मेजरमेंट सिस्टम को चैटजीपीटी एड्स के साथ कनेक्ट कर सकेंगे। कंपनी ने इस काम के लिए कई विज्ञापन, एनालिटिक्स और एट्रिब्यूशन कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। इनमें एप्सफ्लायर, ट्रिपल व्हेल, एडजस्ट, ब्रांच, सिंगुलर और कोचावाजैसी कंपनियां शामिल हैं। इन इंटीग्रेशन की मदद से ब्रांड्स चैटजीपीटी एड्स से आने वाले एप इंस्टॉल, वेबसाइट विजिट, खरीदारी और दूसरे कन्वर्जन को माप सकेंगे।
ब्रांड्स को यह भी पता चलेगा कि Ads से कितना कन्वर्जन मिला
कंपनी अपने विज्ञापन सिस्टम को इस तरह विकसित कर रही है कि कंपनियां चैटजीपीटी एड्स के प्रदर्शन को अपने दूसरे मार्केटिंग चैनलों के साथ भी समझ सकें।
जैसे मान लीजिए, कोई ब्रांड यह देख सकता है कि चैटजीपीटी पर कैंपेन चलाने के बाद कितने यूजर्स उसकी वेबसाइट पर पहुंचे, कितने लोगों ने प्रोडक्ट देखा, कितनों ने खरीदारी की या कितने यूजर्स ने ऐप इंस्टॉल किया।
एप्सफ्लायर जैसे पार्टनर्स चैटजीपीटी एड्स से आने वाले एप इंस्टॉल, री-एंगेजमेंट और इन-ऐप इवेंट्स को मापने में मदद कर सकते हैं।
विज्ञापन दिखेंगे, इसे लेकर भी काम कर रही ओपनएआई
ओपनएआई सिर्फ विज्ञापनों की मेजरमेंट क्षमता ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि यह समझने के लिए भी नए तरीके विकसित कर रही है कि किस तरह की बातचीत में विज्ञापन दिखाना उचित है और कहां नहीं।
कंपनी का कहना है कि उसके विज्ञापन सुरक्षा उपाय इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि Ads को संवेदनशील, भावनात्मक रूप से कमजोर या अन्य अनुपयुक्त बातचीत से दूर रखा जा सके।
इसका मतलब है कि हर तरह की चैटजीपीटी बातचीत में विज्ञापन दिखाना ओपनएआई का लक्ष्य नहीं है। कंपनी विज्ञापनों के लिए एक ऐसा सिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रही है, जिसमें यूजर की स्थिति और बातचीत का संदर्भ भी ध्यान में रखा जाए।
प्राइवेसी को लेकर ओपनएआई ने क्या कहा?
ओपनएआई का कहना है कि प्राइवेसी उसके विज्ञापन मॉडल का एक अहम हिस्सा बनी रहेगी। कंपनी के अनुसार, चैटजीपीटी के जवाब फ्री रहेंगे, यूजर की बातचीत प्राइवेट रहेगी और यूजर्स को अपने अनुभव पर नियंत्रण मिलेगा। कंपनी का दावा है कि विज्ञापन को चैटजीपीटी के जवाबों से अलग रखा जाएगा, ताकि विज्ञापनदाता AI के जवाबों को प्रभावित न कर सकें।
आगे क्या होगा?
फिलहाल ओपनएआई विजुअल एड्स को सीमित विज्ञापनदाताओं के साथ अमेरिका में टेस्ट करने जा रही है। इसके बाद कंपनी टेस्ट के नतीजों के आधार पर इस फॉर्मेट को और ज्यादा विज्ञापनदाताओं और संभावित रूप से दूसरे बाजारों तक ले जा सकती है।
एक तरफ ओपनएआई ब्रांड्स को इमेज के जरिए प्रोडक्ट और सर्विस प्रमोट करने का नया तरीका दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी यह भी स्पष्ट कर रही है कि विज्ञापन चैटजीपीटी के जवाबों से अलग रहेंगे और प्राइवेसी को प्राथमिकता दी जाएगी। अगर टेस्टिंग सफल रहती है, तो चैटजीपीटी में एआई से इमेज बनाने के दौरान दिखने वाले ये विजुअल विज्ञापन में आने वाले समय में एआई प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन के एक नए तरीके की शुरुआत कर सकते हैं।