ChatGPT Explained: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग और चैटजीपीटी, क्या खत्म हो जाएगी अब गूगल की प्रासंगिकता?

संकल्प सिंह
Sun, 22 Jan 2023 10:42 AM IST
सार

इन दिनों ओपन एआई द्वारा तैयार किया गया Chat GPT (Generative Pre-trained Transformer) काफी चर्चा का विषय बन हुआ है। दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में यह चैटबॉट गूगल और दूसरे सर्च इंजनों की प्रासंगिकता को खत्म कर सकता है।

विज्ञापन
ChatGPT Explained: What is OpenAI ChatGPT How It Will Reduce The relevancy Of Google Search Engine
ChatGPT Explained - फोटो : Istock

    विस्तार

    11 मई, 1997 इस तारीख को किसी जरूरी जगह पर नोट करके रख लीजिए। क्योंकि इसी दिन विश्व के महान शतरंज खिलाड़ी गैरी कास्परोव को डीप ब्लू नामक एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर ने चेस के खेल में हरा दिया। यह कोई आम घटना नहीं थी।

    कल्पना को विस्तार दीजिए और सोचिए जरा, शतरंज खेल के कुछ नियम और कायदे जानकर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को हरा दिया। वहीं भविष्य में जब कभी किसी हाइटेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पास मानव जाति के इतिहास का वह सारा ज्ञान आ जाएगा, जिसे हमने अपनी क्रमागत उन्नति में बटोरा है तब क्या होगा?

    विज्ञापन

    अब हम चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। ये डाटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग है। तकनीक के क्षेत्र में हो रहे विकास कई नई संभावनाओं को लेकर खड़े हैं। आने वाले वक्त में हम छोटे-छोटे कार्यों को करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निर्भर होंगे। हमारे घरों की साफ सफाई, सेल्फ ड्राइविंग कार से लेकर बातचीत और सवाल जवाब करने जैसे कामों में एआई शामिल होंगे।

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    साल 2013 में जैक्विन फोनिक्स और स्कारलेट जॉनसन की"Her"नामक एक शानदार फिल्म रिलीज हुई। इस मूवी में थ्योडोर (Joaquin Phoenix) नामक एक शख्स की कहानी को दिखाया गया है। थ्योडोर अपनी जिंदगी से तंग है। उदास भरी जिंदगी में उसे हर वक्त अकेलापन काटने के लिए दौड़ रहा है। इसी बीच वह एक खास तरह के कंप्यूटर वॉयस असिस्टेंट ऑपरेटिंग सिस्टम - समांथा (Scarlett Johansson) को खरीद कर लाता है।

    धीरे-धीरे थ्योडोर और समांथा (AI Voice Assistant Tool) के बीच बातचीत शुरू होती है। देखते ही देखते यह वॉयस असिस्टेंट टूल थ्योडोर की जिंदगी में प्यार के रंग घोलने लगती है। समांथा के साथ कुछ दिनों की बातचीत का नतीजा यह निकलता है कि थ्योडोर को इस वॉयस असिस्टेंट टूल से प्यार हो जाता है।

    शायद जिस डिस्टोपियन भविष्य में हम जा रहे हैं। वहां तकनीक इतनी ज्यादा सघन (Intense) रूप ले लेगी कि वह हमारे विचारों और भावनाओं में अपनी जगह बना ले।Spike Jonzeद्वारा निर्देशित फिल्म"Her"यही संदेश देती हुई दिखती है।

    ChatGPT Explained
    ChatGPT Explained - फोटो : Social Media

    इन दिनों ओपन एआई द्वारा तैयार किया गया ChatGPT (Generative Pre-trained Transformer) काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में यह चैटबॉट गूगल और दूसरे सर्च इंजन की प्रासंगिकता को खत्म कर सकता है।

    क्या है चैटजीपीटी

    चैटजीपीटी एक डीप मशीन लर्निंग बेस्ड चैट बॉट है। इस पर आप जो सवाल पूछते हैं। उसका यह लगभग सटीक उत्तर देता है। हालांकि, कई बार चैटजीपीटी द्वारा दिए गए उत्तर में संदर्भों की कमी होती है। गौरतलब बात है कि इसके उत्तर अधिकतर मामलों में एकदम सटीक होते हैं। यही वजह है, जिसके चलते महज कुछ ही दिनों में चैटजीपीटी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है। चैटजीपीटी से आप किसी गहरे दार्शनिक सवालों से लेकर अपनी छोटी छोटी समस्याओं के बारे में पूछ सकते हैं।

    इस एआई चैटबॉट टूल की असीम संभावनाएं भविष्य में दिख रही हैं। इस चैट बॉट टूल से आप विभिन्न विषयों पर अच्छे और यूनिक आर्टिकल लिखवा सकते हैं। अगर आप एक ब्लॉगर हैं, तो ये चैट बॉट आपको एक एसईओ फ्रेंडली आर्टिकल लिखकर भी दे सकता है। इसके अलावा उसे आप कैसे सर्च इंजन पर रैंक करा सकते हैं। उसके लिए ये टूल आपको अच्छे कीवर्ड्स और यूआरएल भी देता है। गौरतलब बात है कि चैटजीपीटी की अभी बीटा टेस्टिंग चल रही है। इस चैटबॉट में अभी भी कई तरह की खामियां हैं, जिन्हें आने वाले समय में ठीक किया जाएगा।

    ओपन एआई कंपनी ने किया तैयार

    चैटजीपीटी को Openai कंपनी ने तैयार किया है। ओपन एआई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रिसर्च करने वाली कंपनी है। इसकी शुरुआत साल 2015 में एलन मस्क और सैम अल्टमैन ने मिलकर की थी। हालांकि, साल 2018 में एलन मस्क ने इस कंपनी को छोड़ दिया। इस कंपनी ने चैटजीपीटी को 30 नवंबर, 2022 के दिन लॉन्च किया। लॉन्च होने के महज पांच दिनों के भीतर ही 1 मिलियन से ज्यादा यूजर्स इससे जुड़ गए।

    चैटजीपीटी की सफलता को देखते हुए संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि निकट भविष्य में यह चैटबॉट गूगल को रिप्लेस कर सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चैट जीपीटी के पास आपके हर सवालों का जवाब है। विचारणीय बात यह है कि अभी इस चैट बॉट को इंटरनेट के साथ जोड़ा नहीं गया है। उसके बाद भी ये प्रोग्राम ऑफलाइन होकर आपके सभी सवालों के जवाब दे रहा है।

    गूगल और चैटजीपीटी

    अब तक हम किसी भी समस्या का हल या किसी विषय के बारे में जानने के लिए गूगल, याहू, बिंग जैसे सर्च इंजनों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। वहीं जो नई जनरेशन (Gen Z) आ रही है। वह ज्यादातर चीजों को सर्च करने के लिए गूगल का इस्तेमाल नहीं करती है।

    इंटरनेट की दुनिया की ये नई जनरेशन यानी Gen Z चीजों को फेसबुक, टिक टॉक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर ही सर्च कर लेती है। इसी वजह से ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर्स को शानदार और सटीक रिजल्ट देने के लिए ज्यादा से ज्यादा कंटेंट अपने भीतर स्टोर कर रहे हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि आज के समय हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सर्च इंजन बन रहा है।

    गूगल पर आप जब भी किसी चीज को सर्च करते हैं। उस दौरान सर्च इंजन पर कई वेबसाइटों के रिजल्ट आपके डिवाइस स्क्रीन पर शो होते हैं। गूगल पर जो सर्च रिजल्ट ऊपर की तरफ दिखते हैं। उन्हें एसईओ फ्रेंडली ढंग से लिखा गया होता। अगर आप ब्लॉगर या कंटेंट क्रिएटर हैं, तो अच्छे एसईओ का इस्तेमाल करके आप आसानी से अपने कंटेंट को गूगल सर्च इंजन पर रैंक करा सकते हैं।

    गूगल सर्च इंजन के साथ एक बड़ी दिक्कत यह है कि भले ही आपके आर्टिकल में कई कमियां हैं। वहीं अगर आपने उसका एसईओ अच्छे से किया है। ऐसे में वह गूगल सर्च इंजन पर रैंक हो जाएगा। ये गूगल की अब तक कि सबसे बड़ी समस्या है, जिसे वह सुलझा नहीं पाया है।

    ChatGPT Explained
    ChatGPT Explained - फोटो : Istock

    इसी वजह से गूगल पर कई बार हमें अपने समस्या का सटीक रिजल्ट पाने के लिए 10 से 15 वेबसाइटों से होकर गुजरना पड़ता है। इसमें यूजर्स का काफी समय बर्बाद होता है। चैटजीपीटी इसी निर्वात (Vacuum) को भरने का काम करता है। चैटजीपीटी किसी भी विषय पर आपके सवालों के लगभग सटीक उत्तर देता है।

    मैंने चैटजीपीटी से सवाल किया -

    • How To Impress a Girl Who is Interested in Science Fiction, Technology and Sports
    • Write an Article on Topic of Artificial Intelligence and its impact on mankind

    चैटजीपीटी इन जटिल सवालों के उत्तर दे रहा था। यही नहीं बताए गए इन विषयों पर आर्टिकल लिखकर भी दे रहा था। हालांकि, गूगल ये सब चीजें आपके लिए नहीं कर सकता है। गूगल पर अपने सवालों का उत्तर खोजने के लिए हमें कई विकल्पों से होकर गुजरना पड़ता है।

    वहीं चैट जीपीटी आपके उन्हीं सवालों का उत्तर लगभग सटीक ढंग से बिना किसी देरी के देता है। आने वाले पांच या दस सालों में यही भविष्य होने वाला है। गौरतलब बात है कि अभी चैटजीपीटी इंटरनेट से जुड़ा नहीं है। सोचिए जरा, जब ये इंटरनेट से कनेक्ट होगा और बड़े स्तर पर इसकी कंटेंट फीडींग होगी तब क्या होगा?

    भविष्य कई बड़ी संभावनाओं को लेकर खड़ा है। तकनीक के क्षेत्र में हो रहे विकास हमें एक डिस्टोपियन फ्यूचर में लेकर जा रहे हैं। अभी चैटजीपीटी के शुरुआती विकास के ऐसे नतीजे सामने आ रहे हैं। शायद कल को Her मूवी की तरह कोई समांथा जैसी वॉयस असिस्टेंट भी मार्केट में आ जाए।

    वृक्ष जितना लंबा होता है। उसकी जड़ें भी धरती में उतनी ही अंदर तक फैली होती हैं। मार्क्स ने द्वांदात्मकता को भौतिक सत्य बताया था। ऐसे में एक तरफ जहां आर्टफिशियल इंटेलिजेंस समाज में कई नई क्रांतियों को जन्म देगा। वहीं दूसरी तरफ हम तकनीक के डिस्टोपियन फ्यूचर में भी प्रवेश करेंगे, जहां तकनीक हमारी संवेदनाओं को गिरफ्त में ले सकता है।

    भविष्य में हर छोटी-छोटी चीजों को करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। इंसान के पास कुछ करने के लिए नहीं बचेगा। ऐसे में एक बहुत बड़ी उदासी या ऊब(Boredom)जन्म ले सकती है। ऐसे में इस दौरान इंसान की चेतना किस दिशा में सफर करेगी वो समय ही निर्धारित करेगा।

    तकनीक के विकास के क्रम में शायद एक समय ऐसा भी आएगा जब आर्टफिशियल इंटेलिजेंस इंसान को बुद्धिमत्ता की दौड़ में पीछे छोड़ दे। इंसानी दिमाग पैटर्न समझने में काफी तेज होता है। उसकी इसी क्षमता के कारण हमने कई विकसित सभ्यताओं और नए आविष्कारों को जन्म दिया।

    आज हम अपनी यही शक्ति मशीनों को दे रहे हैं। भविष्य में जब मशीनों को इंसान की इस शक्ति का एक्सपोजर मिलेगा, तो इससे एक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इंसानी मस्तिष्क एक सीमा के भीतर रहकर सूचनाओं को प्रोसेस करते हैं। वहीं बात जब मशीनों पर आती है, तो वह बड़ी ही तेजी से अपने भीतर डाटा की प्रोसेसिंग करके निष्कर्ष हमारे सामने रख देते हैं।

    भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनंत मात्रा में डाटा को संग्रह करके उतने ही बड़े परिणाम निकालने की क्षमता रखेंगे। ऐसे में एआई के उद्देश्य अगर हमारे उद्देश्यों से जरा भी बेमेल होते हैं, तो ये संपूर्ण मानवजाति पर खतरा साबित हो सकते हैं। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर कई विशेषज्ञ काफी चिंतित दिख रहे हैं।

    Login or Signup
    अपना शहर चुनें