केंद्र सरकार का वह खास 'टूल', जिसने ग्रेटा थनबर्ग और दिशा रवि की पावरफुल टूलकिट खोज निकाली
'वन स्टॉप प्लेटफार्म', इस टूल के साथ विभिन्न राज्यों की पुलिस के अलावा केंद्रीय जांच एजेंसियां भी जुड़ी हैं। इसे साइबर समन्वय केंद्र यानी साई कोर्ड पोर्टल भी कहते हैं। टूलकिट केस में साई कोर्ड की बड़ी भूमिका रही है...

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सोशल मीडिया में देश के खिलाफ तोड़फोड़ का मामला हो या साइबर अपराध की साजिश, इन सबसे निपटने के लिए केंद्र सरकार के पास भी एक अहम टूल है। अपने इसी टूल के जरिए केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां, ग्रेटा थनबर्ग और एक्टिविस्ट दिशा रवि मंडली की पावरफुल टूलकिट तक पहुंच सकीं। इस टूल में तकनीकी उपकरणों के अलावा वे कानूनी अधिकार भी शामिल हैं, जिसके जरिये गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम या ट्विटर जैसे वैश्विक सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जानकारी मांगी जाती है।
यह टूल जांच एजेंसियों को विधि सम्मत अवरोधन और निगरानी का भी अधिकार देता है। 'वन स्टॉप प्लेटफार्म', इस टूल के साथ विभिन्न राज्यों की पुलिस के अलावा केंद्रीय जांच एजेंसियां भी जुड़ी हैं। इसे साइबर समन्वय केंद्र यानी साई कोर्ड पोर्टल भी कहते हैं। टूलकिट केस में साई कोर्ड की बड़ी भूमिका रही है।
जांच एजेंसियों के एक बड़े अधिकारी के अनुसार, अब इस तरह के मामले बहुत जल्द पकड़ में आ जाते हैं। पहले ऐसे केसों तक पहुंचने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। किसी वक्त राज्यों से सहयोग नहीं मिलता था तो कभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म को संचालित कर रही कंपनी के पास सही तथ्य नहीं भेज पा रहे थे। नतीजा, कानूनी एजेंसियों को समय रहते सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी।
उदाहरण के लिए, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया में देशद्रोह या तोड़फोड़ की गतिविधि से संबंधित कोई केस दर्ज किया है और उसकी कई अहम कड़ियां हैदराबाद से जुड़ी हैं। यानी आईपी अड्रेस और दूसरे लिंक, ये सब किसी दूसरे राज्य में मिल रहे हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आपस में तालमेल नहीं बना पाती थीं। इस तरह की दिक्कतों को दूर करने के लिए वन स्टॉप प्लेटफार्म तैयार किया गया था। इसके लिए बाकायदा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के डीजी एवं आईजी की राय ली गई। प्रधानमंत्री मोदी ने दिसंबर 2018 साई कोर्ड का शुभारंभ किया था।
इसका फायदा यह हुआ कि तोड़फोड़ की गतिविधि हो या साइबर अपराध, ऐसे सभी मामलों में तेजी से समन्वय होने लगा। राज्यों की पुलिस को वह सूचना सांझा करनी ही पड़ती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस खास यूनिट पर निगरानी रखता है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ग्रेटा थनबर्ग ने दो सोशल मीडिया पोस्ट लिखी थीं। अपनी पहली पोस्ट में ग्रेटा ने दिल्ली के बाहर धरने पर बैठे किसानों का समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने दूसरी पोस्ट साझा की थी।
यह वही पोस्ट थी, जिसमें वह टूलकिट आगे बढ़ाई गई थी, जिसे लेकर अब देशद्रोह और तोड़फोड़ तक के मामले दर्ज हो गए हैं। गूगल डॉक्यूमेंट के तौर पर बनी इस किट में ‘अर्जेंट, प्रायर और ऑन ग्राउंड एक्शंस’ जैसी बातों को लेकर कुछ लिखा गया था। 'वन स्टॉप प्लेटफार्म' के जरिए दिल्ली पुलिस ने पहले ही दिन यह पता लगा लिया था कि इस केस की गहराई कितनी है। इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं, गूगल और सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफार्म के माध्यम से पुलिस केस के अंदर तक पहुंचती चली गई। लाल किला में मचा उपद्रव उसी टूलकिट के प्रोग्राम का एक हिस्सा रहा है। हैशटैग और टारगेट सब कुछ पहले से ही तय था।
जांच एजेंसियों को जब इस मामले का सुराग मिल गया, तो उसके बाद दो तरफा कार्रवाई हुई। एक, गूगल जैसे प्लेटफार्म से तमाम जानकारियां ले ली गईं और दूसरा, कथित तौर पर फोन इंटरसेप्ट किए गए। हालांकि यह सब केंद्र सरकार के उसी टूल में शामिल है। केंद्रीय जांच एजेंसी में काम कर चुके हरियाणा कैडर के एक आईपीएस अधिकारी कहते हैं, देश में कई एजेंसियों को यह पावर दी गई है। इसके बिना केस की तह तक जाना बहुत मुश्किल होता है।
आजकल तो साइबर टूल्स में भी इंटरसेप्ट प्रक्रिया का इस्तेमाल होता है। लाल किला केस हो या टूलकिट मामला, इनमें आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने अवश्य इंटरसेप्ट की मदद ली होगी। विधि प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा 'विधिसम्मत इंटरसेप्शन और मॉनिटरिंग' की जाती है। सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद ही इस मामले में आगे बढ़ा जाता है। यह प्रक्रिया 'इंडियन टेलीग्राफ (संशोधन) रुल्स 2014 के रुल 419ए के साथ पठित इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 की धारा 5(2) के तहत इस्तेमाल की जाती है।
केवल इतना ही नहीं, इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (सूचना का इंटरसेप्शन, मॉनिटरिंग और डिक्रिप्शन की प्रक्रिया और सुरक्षोपाय) नियम, 2009 के साथ पठित सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 के प्रावधानों का पालन करना जरूरी है। दिल्ली पुलिस ने अपने इन्हीं टूल के जरिए जनवरी में टूलकिट के किरदारों के बीच हुई जूम मीटिंग का पता लगाया था।