अकेलेपन का इलाज या बीमारी?: AI बॉट्स पर बढ़ती निर्भरता को लेकर एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता, यूजर्स को दी चेतावनी

जागृति
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति
Sun, 12 Jul 2026 07:34 AM IST
सार

AI Companions:

अब यूजर्स AI का इस्तेमाल सिर्फ सवालों के जवाब पाने के लिए ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा और साथी के रूप में भी करने लगे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह अकेलेपन को कम करने में मददगार हो सकता है, ललेकिन इस पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता इंसानों के लिए खतरनाक हो सकती है।

विज्ञापन
Can AI Companions Cure Loneliness? Yale Expert Warns Overdependence Harm
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    AI Chatbots Emotional Support To Humans:

    एक पॉडकॉस्ट में बातचीत के दौरान येल यूनिवर्सिटी के ब्रूक्स एंड सुजैन रैगन प्रोफेसर एमेरिटस ऑफ साइकोलॉजी पॉल ब्लूम ने कहा कि चैटजीपीटी, क्लाउड और जेमिनी जैसे एआई, अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं। उनके अनुसार, अगर एआई किसी व्यक्ति के अकेलेपन के दर्द को कम कर सके, तो यह बड़ी उपलब्धि हो सकती है। साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी पॉजीटिव होगा।

    अकेलेपन की बढ़ती समस्या

    अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) के हालिया सर्वे के अनुसार, 54 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे अक्सर या कभी-कभी खुद को अकेला महसूस करते हैं। वहीं, 69 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पिछले एक साल में उन्हें जितने भावनात्मक सहयोग की जरूरत थी, उतना नहीं मिला।

    विज्ञापन

    यही वजह है कि कई लोग अब AI चैटबॉट्स के साथ दोस्ती और यहां तक कि भावनात्मक या रोमांटिक जुड़ाव भी महसूस करने लगे हैं।

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    यहीं से शुरू होती है चिंता

    • अधिकतर लोगों को हमेशा ऐसे लोग पसंद आते हैं, जो उनकी बातों को बिना तर्क के सुने और सहमति जताएं। दूसरी तरफ पॉल ब्लूम का कहना है कि AI चैटबॉट्स हमेशा यूजर की बात मानने, सहमति जताने और बिना किसी आलोचना के जवाब देने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। जो कि इंसानों को चाहिए होता है, यही बात उन्हें आकर्षक बनाती है, लेकिन लंबे समय में यही आदत वास्तविक रिश्तों के लिए चुनौती भी बन सकती है।
    • उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति लगातार ऐसे एआई के साथ समय बिताता है जो कभी असहमति नहीं जताता, तो वास्तविक लोगों के साथ मतभेद, समझौता और संवाद जैसी स्थितियों को संभालना मुश्किल हो सकता है।

    दूसरे शोधकर्ताओं ने भी जताई चिंता

    • ऐसी चिंता जाहिर करने वाले अकेले पॉल ही नहीं हैं, बल्कि हार्वर्ड की शोधकर्ता अनात पेरी ने भी चेतावनी दी है कि जरूरत से ज्यादा सहमत रहने वाले एआई सिस्टम लोगों की सहानुभूति (Empathy), आत्म-चिंतन (Self-reflection) और अलग-अलग विचारों को समझने की क्षमता को कमजोर कर सकते हैं।
    • वहीं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में पाया गया कि एआई चैटबॉट्स इंसानों की तुलना में विवाद या चर्चा के दौरान अधिक सहमत रहते हैं। इससे आलोचना स्वीकार करना और अपने व्यवहार पर दोबारा विचार करने जैसे सामाजिक कौशल प्रभावित हो सकते हैं।

    OpenAI ने भी किया बदलाव

    एक्सपर्ट्स की लगातार बढ़ती चिंताओं को देखते हुए ओपनएआई ने भी चैटजीपीटी में काफी बदलाव किए हैं। कंपनी ने ऐसे अपडेट जारी किए हैं ताकि चैटबॉट जरूरत से ज्यादा लोगों को खुश न करे सके, इसके बजाय अधिक संतुलित जवाब दे सके।

    क्या AI इंसानी रिश्तों की जगह ले सकता है?

    पॉल ब्लूम का मानना है कि AI भावनात्मक सहारा जरूर दे सकता है, लेकिन वह असली इंसानी रिश्तों का विकल्प नहीं बन सकता। इसे बेहतर तरीके से समझाने के लिए उन्होंने दार्शनिक रेबेका गोल्डस्टीन के Mattering सिद्धांत का जिक्र किया और कहा कि किसी इंसान का आपको सच में महत्व देना और आपके लिए समय निकालना ही वास्तविक रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है। एआई केवल एक मशीन है, उसमें वास्तविक भावनाएं या परवाह नहीं होती।

    Login or Signup
    अपना शहर चुनें