Ashwini Vaishnav: एआई का नैतिकतापूर्ण उपयोग जरूरी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की साझा मानकों की वकालत

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 02 May 2025 02:59 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विजुअल और एंटरटेनमेंट समिट (WAVES) के तहत आयोजित ‘ग्लोबल मीडिया डायलॉग’ को संबोधित करते हुए देश में एआई (AI) के नैतिक उपयोग और साझा मानकों की जरूरत पर प्रकाश डाला।

ashwini vaishnav advocates for shared standards and clear rules for ethical use of artificial intelligence
अश्विनी वैष्णव - फोटो : Ashwini Vaishnav/X

    विस्तार

    केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक इस्तेमाल के लिए साझा मानकों और स्पष्ट नियमों की सख्त जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने नई तकनीकों के लिए संयुक्त कोष और सरकार, उद्योग तथा क्रिएटर्स के बीच मजबूत साझेदारी की भी वकालत की।

    वैष्णव मुंबई में चल रहे वर्ल्ड ऑडियो, विजुअल और एंटरटेनमेंट समिट (WAVES) के तहत आयोजित ‘ग्लोबल मीडिया डायलॉग’ को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर विदेश मंत्री एस जयशंकर, सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन और कई देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

    उन्होंने कहा कि यह वैश्विक संवाद रचनात्मकता, संस्कृति और सहयोग की भावना पर आधारित है। वैष्णव ने कहा, "सरकार का दायित्व है कि वह हर व्यक्ति को अपनी कहानी दुनिया तक पहुंचाने का समान अवसर दे। हमें स्थानीय कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन देना होगा और बौद्धिक संपदा अधिकारों को मजबूती से लागू करना होगा।"

    उन्होंने यह भी कहा कि सांस्कृतिक विविधताओं को सहेजने और बढ़ावा देने वाली नीतियों का समर्थन जरूरी है, क्योंकि यही संस्कृति लोगों को सीमाओं के पार जोड़ती है।

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दुनिया भर में अब स्थानीय कहानियों पर ध्यान केंद्रित हो रहा है और ऐसे में लोगों के बीच और देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना अहम हो गया है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा "सरकार, उद्योग और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच सहयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। हमें को-प्रोडक्शन ट्रीटी जैसे व्यावहारिक उपायों की जरूरत है, जिससे लाइसेंसिंग और टैलेंट मूवमेंट आसान हो सके। इसके साथ ही नई तकनीकों के लिए संयुक्त कोष, साझा मानक और एआई के नैतिक इस्तेमाल के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बेहद जरूरी हैं।”

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