Indian Army: एआई से लैस सॉफ्टवेयर विकसित कर रही है सेना, हथियारों की तैनाती और मूवमेंट के पैटर्न को पहचानेंगे

जलज मिश्रा
अभिषेक यादव, नई दिल्लीजलज मिश्रा
Fri, 08 Dec 2023 06:25 AM IST
सार

इस तरह के कुछ सॉफ्टवेयर इस समय काम में भी लिए जाने लगे हैं जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को तेजी से हालात के विश्लेषण और कार्रवाई के दौरान कमांडरों को तत्काल निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं।

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Army is developing AI equipped software will recognize the patterns of deployment and movement of weapons
Indian Army - फोटो : Social Media

    विस्तार

    भारतीय सेना सैन्य-श्रेणी के ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित कर रही है जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक पर आधारित निर्णय लेने की खूबियां होंगी। वे खुद ही हालात का विश्लेषण करने और अनुमान लगाने में सक्षम होंगे। इनसे सूचनाएं जुटाने और कार्रवाई करने की सेना की कुशलता और बेहतर होगी। इसके लिए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ समन्वय किया गया है।

    इस तरह के कुछ सॉफ्टवेयर इस समय काम में भी लिए जाने लगे हैं जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को तेजी से हालात के विश्लेषण और कार्रवाई के दौरान कमांडरों को तत्काल निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं। यह एआई सॉफ्टवेयर कैसे उपयोगी साबित होंगे, सेना के सूत्रों ने रोचक उदाहरण से बताया कि इनके जरिए दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक ऑर्डर ऑफ बैटल (ऑरबैट) का अनुमान लगा सकेगा। यह दुश्मन की स्थिति, हथियारों की तैनाती व मूवमेंट के पैटर्न पहचानने में भी मदद करेंगे। वहीं सूत्रों ने यह भी बताया कि दूरसंचार इंजीनियरिंग सैन्य कॉलेज एक एआई शोध व विकास हब के रूप में काम कर रहा है। इसके जरिए सिचुएशनल अवेयरनेस मॉड्यूल फॉर आर्मी और एडवांस पैटर्न रिकग्निशन सॉफ्टवेयर विकसित किए गए हैं।

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    साइबर सुरक्षा पर भी जोर

    सेना में आईटी उपकरणों और ऑनलाइन नेटवर्क का उपयोग बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा बढ़ाना भी जरूरी हो चुका है। इसे देखते हुए सिक्युरिटी ऑपरेशन सेंटर 2.0 से सेना को जोड़ा जा रहा है। इससे बेहतर साइबर सुरक्षा व फॉरेंसिक टूल्स विकसित करने में मदद मिलेगी।

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    ‘प्रोजेक्ट शौर्य संकलन’ डिजिटल युग में सुरक्षित रखेगा सेना की विरासत

    जल्द जारी होने जा रहा ‘प्रोजेक्ट शौर्य संकलन’ सेना के तकनीक को अपनाने की मंशा से मिला अहम परिणाम है। इसके जरिए सेना के इतिहास और शौर्य गाथाओं को सहेजा जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि सेना की समृद्ध विरासत डिजिटल युग में पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसी तरह रक्षा मंत्रालय के अधीन जमीनों के रिकॉर्ड ‘रक्षा भूमि’ प्लेटफॉर्म पर रखे जा रहे हैं। वहीं सृजन परियोजना के जरिए वित्तीय लेन-देन के ब्यौरे रखे जा रहे हैं।

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