ICEBlock App: एपल और गूगल ने जासूसी के आरोप पर आइसब्लॉक एप हटाया, आपत्तिजनक कंटेंट का दिया हवाला
एपल ने एप स्टोर से आपत्तिजनक कंटेंट का हवाला देते हुए 10 लाख से ज्यादा यूजर्स वाले आइसब्लॉक एप को हटा दिया है, जो आईसीई एजेंट्स की लोकेशन ट्रैक करता था। जानें क्यों बढ़ा अमेरिका में इस एप को लेकर विवाद।

विस्तार
अमेरिकी प्रशासन के दबाव के बाद एपल और गूगल ने अपने-अपने एप स्टोर्स से एक ऐसा विवादित एप हटा दिया है, जो अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंट्स की लोकेशन और गतिविधियों को गुमनाम रूप से ट्रैक और रिपोर्ट करने की सुविधा देता था। इस एप का नाम आइसब्लॉक है और इसे हटाए जाने के बाद अमेरिका में बहस तेज हो गई है।आइसब्लॉक एप क्यों हुआ बैन?
आइसब्लॉक एक फ्री एप था, जिसे करीब 10 लाख से ज्यादा यूजर्स इस्तेमाल कर रहे थे। इस एप के जरिए लोग आईसीई एजेंट्स की मौजूदगी की सूचना शेयर कर सकते थे। एप के डेवलपर के मुताबिक एपल ने इसे "आपत्तिजनक कंटेंट" का हवाला देकर हटाया है। गूगल ने भी इसी तरह के कई एप्स को अपने प्ले स्टोर से हटाते हुए कहा कि ये “पॉलिसी और यूजर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन” कर रहे थे।एप डेवलपर ने क्या कहा?
आइसब्लॉक के डेवलपर जोशुआ आरोन ने एपल और गूगल के कदम की कड़ी आलोचना की और कहा, "हमें लगता है कि यह कदम ट्रंप प्रशासन के दबाव में उठाया गया है। हम इसका विरोध करेंगे और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।"एपल का जवाब
एपल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एप स्टोर को सुरक्षित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनाने के लिए यह कदम उठाया गया। कंपनी के अनुसार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों से मिली जानकारी में यह एप सुरक्षा जोखिम से जुड़ा बताया गया था।बढ़ता विवाद और चढ़ता राजनीतिक रंग
अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों को लेकर पहले से ही विवाद गहराया हुआ है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में इमिग्रेशन पर छापेमारी अभियान तेज किए हैं। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने साफ कहा कि ऐसे क्राउडसोर्सिंग एप्स "फ्री स्पीच" के तहत सुरक्षित नहीं हैं और इनके डेवलपर्स पर कार्रवाई हो सकती है।आइसब्लॉक जैसे और भी एप्स मौजूद
हालांकि आइसब्लॉक को हटाने के बाद सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि गूगल मैप्स और वेज जैसे एप्स अब भी उपलब्ध हैं, जो पुलिस चेकिंग, स्पीड ट्रैप और अन्य लोकेशन की जानकारी दिखाते हैं। पिछले महीने डैलस में आईसीई फैसिलिटी पर गोलीबारी करने वाले एक हमलावर ने भी आईसीई एजेंट्स को ट्रैक करने वाले एप्स की तलाश की थी। कुल मिलाकर, एपल और गूगल का यह कदम सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (फ्री स्पीच) के बीच संतुलन पर एक नई बहस खड़ी कर रहा है।