आईफोन 18 लॉन्च: जिस 'आईफोन' ने एपल को बनाया दुनिया का दिग्गज, वह कभी उसका था ही नहीं! जानें पूरी कहानी

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 09 Sep 2026 03:18 PM IST
सार

एपल आज अपने मेगा इवेंट में आईफोन 18 प्रो और फोल्डेबल डिवाइस पेश करने जा रहा है। पिछले 19 वर्षों में 300 करोड़ से ज्यादा आईफोन बिक चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि आईफोन नाम पर एपल का अधिकार शुरू से नहीं था। सिस्को के साथ कानूनी विवाद के बाद दोनों कंपनियों में समझौता हुआ। लॉन्च से पहले जानिए एपल और सिस्को के बीच दुनिया से सबसे चर्चित विवाद की कहानी।

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जानिए क्या है आईफोन के नाम से जुड़ा पुराना विवाद। - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    एपल आज दुनिया के सबसे बड़े टेक ब्रांड्स में शामिल है और आईफोन उसकी पहचान बन चुका है। 2007 में स्टीव जॉब्स ने पहला आईफोन दुनिया के सामने रखा था और तब से इसकी लोकप्रियता कभी भी कम नहीं हुई। आज आईफोन की बिक्री का आंकड़ा 300 करोड़ यूनिट्स को पार कर गया है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जिस "आईफोन" के लिए आज एपल इतनी चर्चित हैं, वह नाम उसका कभी था ही नहीं।

    दरअसल, पहले आईफोन के लॉन्च होती ही कंपनी कानूनी पचड़े में फंस गई थी। 2007 में जब स्टीव जॉब्स ने दुनिया के सामने पहला आईफोन पेश किया, तब इस नाम पर पहले से एक दूसरी कंपनी का अधिकार था। आइए जानते हैं आईफोन के नाम को लेकर एपल किस कानूनी पेंच में फंसी थी।

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    सिस्को के पास था 'आईफोन' का नाम

    ज्यादातर लोग मानते हैं कि 'iPhone' नाम एपल का ही आविष्कार है, लेकिन हकीकत में यह ट्रेडमार्क सिस्को के पास था। 1996 में 'इन्फो गियर' नाम की एक अमेरिकी कंपनी ने इस नाम को रजिस्टर्ड कराया था और इसी नाम से एक इंटरनेट टचस्क्रीन फोन लॉन्च किया था।

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    साल 2000 में सिस्को (Cisco) ने इन्फो गियर को खरीद लिया, जिससे आईफोन नाम का कानूनी अधिकार सिस्को के पास आ गया। सिस्को की एक डिवीजन 'लिंक्सिस' 2006 से इस नाम के तहत वायरलेस वीओआईपी (इंटरनेट से चलने वाले) फोन बेच भी रही थी। जब स्टीव जॉब्स ने 9 जनवरी 2007 को दुनिया के सामने पहले आईफोन की घोषणा की, तो उसके ठीक अगले ही दिन सिस्को ने एपल पर ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा दायर कर दिया था।

    बिना अनुमति नाम का किया इस्तेमाल

    एपल और सिस्को के बीच इस नाम को इस्तेमाल करने के लिए कई वर्षों से बातचीत चलती रही। सिस्को चाहती थी कि एपल उनका नाम शेयर करने के बदले दोनों कंपनियों के डिवाइसेज को आपस में कनेक्ट (इंटरोपरेबिलिटी) करने की अनुमति दे। बातचीत किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सकी थी, लेकिन स्टीव जॉब्स ने बिना किसी फाइनल एग्रीमेंट या अनुमति के ही 2007 में मंच से 'आईफोन' नाम का एलान कर दिया।

    कैसे हुई सुलह?

    यह कानूनी लड़ाई लंबी नहीं खिंची। लगभग छह हफ्ते बाद ही, 21 फरवरी 2007 को दोनों कंपनियों ने कोर्ट के बाहर आपसी समझौता करते हुए विवाद को खत्म करने का एलान किया।

    • दोनों कंपनियां दुनिया भर में अपने-अपने प्रोडक्ट्स के लिए 'आईफोन' नाम का इस्तेमाल करने पर सहमत हुईं। एपल अपने स्मार्टफोन के लिए और सिस्को अपने वीओआईपी (VoIP) इंटरनेट फोन के लिए इस नाम का इस्तेमाल जारी रख सकती थी।
    • दोनों कंपनियों ने सुरक्षा, कंज्यूमर और बिजनेस कम्युनिकेशन के क्षेत्रों में एक साथ मिलकर काम करने और अपने प्रोडक्ट्स को एक-दूसरे के अनुकूल बनाने की संभावनाओं पर सहमति जताई।
    • इस समझौते के बदले एपल ने सिस्को को कितने पैसे दिए, इसकी वित्तीय शर्तों को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। दोनों में से किसी भी कंपनी ने कभी यह खुलासा नहीं किया कि इस नाम को पाने के लिए पैसों का लेन-देन हुआ था या नहीं, हालांकि खबरें थीं कि एपल ने इसके लिए एक बड़ी रकम चुकाई थी।

    क्यों खास था पहला आईफोन?

    • एपल का आईफोन को 9 जनवरी 2007 को लॉन्च हुआ था। उस समय के हिसाब से आईफोन तकनीकी रूप से काफी मॉडर्न और एडवांस था। दरअसल, उस समय एपल के सीईओ स्टीव जॉब्स ने आईफोन को लॉन्च करते समय इसे तीन डिवाइस का मेल बताया था। उनका कहना था कि ये मोबाइल फोन, टच कंट्रोल वाला वाइडस्क्रीन आईपॉड और इंटरनेट कम्युनिकेशन डिवाइस का मेल है।
    • पहले आईफोन में 3.5 इंच का टचस्क्रीन डिस्प्ले, 2 मेगापिक्सल कैमरा, वाई-फाई और ईडीजीई कनेक्टिविटी थी। इसमें ईमेल, वेब ब्राउजिंग, मैप्स और आईपॉड जैसे फीचर्स एक ही डिवाइस में दिए गए थे। सबसे बड़ा बदलाव इसका मल्टी-टच इंटरफेस था, जिसे उंगली से टैप, स्वाइप और अन्य जेस्चर के जरिए चलाया जा सकता था।
    • उस दौर में कई लोकप्रिय फोन में फिजिकल कीपैड या छोटे बटन होते थे। बिजनेस यूजर्स के बीच ब्लैकबेरी जैसे फोन काफी लोकप्रिय थे, जबकि नोकिया और मोटोरोला जैसे ब्रांड अलग-अलग डिजाइन और फीचर्स के साथ बाजार में मजबूत स्थिति में थे।
    • आईफोन ने फोन इस्तेमाल करने का तरीका बदलने पर जोर दिया। इसमें सामने लगभग पूरा हिस्सा स्क्रीन के लिए था और नेविगेशन के लिए किसी स्टायलस की जरूरत नहीं थी। उंगली से स्क्रीन पर टैप और स्वाइप करके काम किया जा सकता था।

    बिक्री के टूटे सारे रिकॉर्ड

    हमेशा से प्रीमियम कीमत होने के बावजूद इस डिवाइस ने लोगों के दिलों पर जो राज किया है, वह इसके बिक्री के आंकड़ों से साफ झलकता है। पहले आईफोन की लॉन्चिंग के बाद से अब तक वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ से अधिक आईफोन बेचे जा चुके हैं। वर्तमान समय की बात करें तो पूरी दुनिया में करीब 250 करोड़ आईफोन सक्रिय रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। साल 2018 में इन सक्रिय आईफोन की संख्या 130 करोड़ के आसपास थी। 8 साल के अंतराल में आईफोन के एक्टिव यूजर्स की संख्या में लगभग 120 करोड़ का भारी इजाफा हुआ है।

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