Apple: ड्रैगन को झटका देने की तैयारी में अमेरिका, एपल से कहा- घरेलू कंपनियों से ही खरीदें मेमोरी चिप्स

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Mon, 17 Aug 2026 03:21 PM IST
सार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भारी मांग के बीच दुनिया भर में मेमोरी चिप्स का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस बीच ट्रंप प्रशासन ने दिग्गज टेक कंपनी एपल पर चीनी मेमोरी चिप्स से दूर रहने का दबाव बढ़ा दिया है। जानिए इस खींचतान का असर क्या होगा।

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एपल पर चीन के चिप न खरीदने का दबाव बढ़ा - फोटो : एपल

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आंधी ने इस वक्त पूरी दुनिया के तकनीकी बाजार की रफ्तार बदल दी है। इसी बूम ने अब दुनिया की सबसे मूल्यवान टेक कंपनी एपल के लिए एक नया सिरदर्द पैदा कर दिया है। एआई डेटा सेंटर्स की बेतहाशा बढ़ती मांग के चलते वैश्विक बाजार में मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत हो गई है। जब एपल ने अपनी सप्लाई चेन को दुरुस्त रखने के लिए विकल्पों की तलाश शुरू की, तो अमेरिकी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। अमेरिका की ट्रंप सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कंपनी अपने स्मार्टफोन्स में चीनी मैन्युफैक्चरर्स से मेमोरी चिप्स खरीदने से परहेज करे। इस निर्देश के बाद एपल पर चीन से चिप न खरीदने का दबाव बढ़ गया है।ट्रंप प्रशासन ने एपल को क्या कहा?वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने एपल को बताया है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी कंपनियों द्वारा चीन से मेमोरी चिप्स खरीदने के पक्ष में नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, एपल के डिवाइसेज में इस्तेमाल की संभावना को देखते हुए चीन की चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज और यांग्त्जी मेमोरी टेक्नोलॉजीज के मेमोरी चिप्स की टेस्टिंग की जा रही है। हालांकि, एपल ने इन चिप्स की टेस्टिंग की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    मेमोरी की कमी से एपल की बढ़ी परेशानी

    • एआई से जुड़े डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियां बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं। इस बढ़ी हुई मांग के कारण बाजार में चिप्स की उपलब्धता प्रभावित हुई है और कीमतों में भी तेजी आई है।
    • महंगे मेमोरी कंपोनेंट्स का असर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों की लागत पर पड़ा है। पिछले कुछ महीनों में एपल समेत कुछ हैंडसेट कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन्स की रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी भी की है।

    एपल के पास क्या विकल्प हैं?

    • एपल ने कहा है कि मेमोरी चिप्स की कमी को देखते हुए उसे अलग-अलग विकल्पों पर विचार करना होगा। इनमें मौजूदा सप्लायर्स को अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में मदद करना भी शामिल है। हालांकि, अमेरिकी दबाव के बावजूद एपल के लिए चीन से दूसरे कंपोनेंट्स खरीदने का विकल्प अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
    • अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजीज ने ट्रंप प्रशासन से एपल को चीन में बने मेमोरी चिप्स इस्तेमाल करने से रोकने का अनुरोध किया है। कंपनी का तर्क है कि एपल जैसे बड़े ग्राहक अगर चीनी चिप्स की ओर जाते हैं, तो इससे अमेरिका में महत्वपूर्ण मेमोरी कंपोनेंट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान पहुंच सकता है।

    iPhone 18 सीरीज की एंट्री के बीच बढ़ी चुनौती

    • एपल के लिए यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनी बाजार में नए आईफोन को लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी सितंबर में iPhone 18 सीरीज को लॉन्च करेगी, जिसमें फोल्डेबल iPhone यानी iPhone Ultra को भी पेश किए जाने की चर्चा है।
    • रिपोर्ट के मुताबिक, इसे अगले महीने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ लॉन्च किया जा सकता है। ऐसे में मेमोरी चिप्स की कीमत और सप्लाई से जुड़ी चुनौती एपल की नई डिवाइस रणनीति के लिए भी अहम हो सकती है।
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