Anthropic: एआई बढ़ा सकता है अमीर-गरीब देशों के बीच की खाई, भारत में पहला ऑफिस खोलते ही एंथ्रोपिक की चेतावनी

जागृति
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति
Thu, 22 Jan 2026 05:39 PM IST
सार

India AI Office:

टेक कंपनियां एआई को लेकर हमेशा से दावा करती आई हैं कि ये हमारी जिंदगी को आसान बनाएगा और काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। कुछ टेक लीडर्स जैसे एलन मस्क तो ये तक कह चुके हैं कि भविष्य में इंसानों को काम करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी, लेकिन एंथ्रोपिक (Anthropic) की रिपोर्ट कुछ और ही बता रही है। जानें क्या

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Anthropic enters India issued warning opened saying rich countries ahead in AI race
एंथ्रोपिक - फोटो : AI

    विस्तार

    अमेजन और गूगल समर्थित एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक ने भारत में अपना पहला ऑफिस खोलते हुए एक चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है। कंपनी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार एआई का लाभ अमीर देशों तक सिमट रहा है, इससे कम आय वाले देशों के पीछे छूटने का गंभीर खतरा है। जहां विकसित देश एआई का उपयोग वर्क प्रोडक्टिविटी के लिए कर रहे हैं, वहीं विकासशील देश अब भी केवल एजुकेशनल उपयोग तक ही सीमित हैं।

    माइक्रोसॉफ्ट के ट्रेंड्स की तरह एंथ्रोपिक ने भी पाया कि अमीर देशों के पास एडवांस एआई के लिए भुगतान करने की क्षमता अधिक है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर प्रोडक्टिविटी में रफ्तार केवल विकसित देशों तक सीमित रही, तो गरीब देशों के लिए उनसे मुकाबला करना नामुमकिन हो जाएगा।

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    डेटा क्या कहता है?

    एंथ्रोपिक ने अपने क्लाउड चैटबॉट के साथ हुए 10 लाख से ज्यादा इंटरैक्शंस का विश्लेषण किया। इसमें फ्री यूजर्स, पेड सब्सक्राइबर्स और एंटरप्राइज क्लाइंट्स शामिल थे। स्टडी में पाया गया कि कम आय वाले देशों के यूजर्स अभी एआई के फ्री एक्सेस पर ही निर्भर हैं और इसका उपयोग बुनियादी शिक्षा के लिए कर रहे हैं। इसके विपरीत अमेरिका, यूके और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में एआई जटिल सॉफ्टवेयर इंजीरियरिंग पर्सनल प्रोडक्टिविटी और एंटरप्राइज कार्यों के लिए किया जा रहा है।

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    रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि ज्यादा पढ़े-लिखे यूजर्स एआई से बेहतर नतीजे निकाल पा रहे हैं। वे एडवांस प्रॉम्प्टस का इस्तेमाल करके ज्यादा प्रोडक्टिविटी हासिल करते हैं, जिससे स्किल और एजुकेशन गैप भी असामनता को बढ़ा सकता है। एंथ्रोपिक के रिसर्च का अनुमान है कि आने वाले दशक में लगभग 50 प्रतिशत नौकरियों में कम से कम 25 प्रतिशत कार्य एआई ही करेगा। पिछले साल ये आंकड़ा 36 प्रतिशत था। फिलहाल क्लाउड के सबसे बड़े यूजर बेस में अमेरिका, भारत, जापान, यूके और साउथ कोरिया शामिल हैं। वहीं ब्राजील और बाल्कन देशों में एंटरप्राइज यूज ज्यादा है, जबकि इंडोनेशिया एजुकेशनल AI यूज में आगे है।

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