एआई से 'रोजगार संकट' का खतरा: खत्म हो सकती हैं एंट्री-लेवल की नौकरियां, Anthropic सीईओ ने दी बड़ी चेतावनी

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Tue, 19 May 2026 01:27 PM IST
सार

Anthropic CEO Warning:

एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो एमोदेई ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि एआई की तेज प्रगति एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर जॉब्स को खत्म कर सकती है और इससे गंभीर रोजगार संकट पैदा हो सकता है। एक इंटरव्यू में एमोदेई ने कहा कि एआई की क्षमता पिछले दो वर्षों में बेहद तेजी से बढ़ी है। एमोदेई के अनुसार डॉक्युमेंट समरी बनाना, फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करना, रिसर्च, ब्रेनस्टॉर्मिंग और डेटा एनालिसिस जैसे काम एआई बहुत तेजी से सीख रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर फाइनेंस, कंसल्टिंग, टेक और एडमिनिस्ट्रेशन जैसे सेक्टर्स की शुरुआती नौकरियों पर पड़ सकता है।

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Anthropic CEO Warns AI Could Trigger ‘Serious Employment Crisis’ By Replacing Entry-Level Jobs
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो एमोदेई - फोटो : एएनआई

    विस्तार

    एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो एमोदेई ने दुनिया भर के युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि एआई की तेजी से बढ़ती ताकत की वजह से जल्द ही एक बड़ा रोजगार संकट पैदा हो सकता है। इसके कारण कई इंडस्ट्रीज में शुरुआती स्तर (एंट्री-लेवल) की व्हाइट-कॉलर नौकरियां हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं। एक इंटरव्यू में एमोदेई ने एआई की रफ्तार और नौकरियों पर इसके असर को लेकर कई चौंकाने वाली बातें साझा कीं।

    कितनी तेजी से स्मार्ट हो रहा है एआई?

    एमोदेई ने बताया कि एआई पिछले केवल दो वर्षों में बहुत तेजी से एडवांस हुआ है। उन्होंने कहा, 'दो साल पहले तक एआई एक होशियार हाई स्कूल स्टूडेंट के स्तर का था, लेकिन आज यह एक होशियार कॉलेज स्टूडेंट के स्तर पर पहुंच गया है और लगातार उससे भी आगे जा रहा है।'

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    किन नौकरियों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा?

    हालांकि एआई के फायदे मेडिसिन और एनर्जी जैसे सेक्टर्स में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। लेकिन यह उन नौकरियों के लिए एक बड़ा खतरा भी साबित हो सकता है जो डेटा, एनालिसिस और एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़ी हैं। खास तौर पर फाइनेंस, कंसल्टिंग और टेक सेक्टर की एंट्री-लेवल नौकरियां सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

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    एआई की कार्यक्षमता इतनी ज्यादा है कि यह आसानी से लंबे डॉक्यूमेंट्स की समरी तैयार कर सकता है। नए आइडियाज पर ब्रेनस्टॉर्मिंग कर सकता है और जटिल फाइनेंशियल रिपोर्ट्स भी बना सकता है। एमोदेई के अनुसार, ऐसी नौकरियों में एआई पहले इंसानों की मदद करेगा। लेकिन बहुत जल्द ही यह पूरी तरह से उनकी जगह ले लेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि हमें इस बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। क्योंकि आने वाले 1 से 5 वर्षों के भीतर ही इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

    'हम एआई की रफ्तार को रोक नहीं सकते'

    एमोदेई ने एक कड़वी सच्चाई साझा करते हुए कहा कि हालांकि कई दिग्गज कंपनियों के सीईओ बंद कमरों में इस संभावित संकट पर चर्चा तो कर रहे हैं। लेकिन अभी तक आम जनता और कानून बनाने वाले नीति-निर्माताओं को इस चुनौती की गंभीरता का सही अंदाजा नहीं है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि इस 'एआई बस' को रोकना अब मुमकिन नहीं है, क्योंकि यह केवल किसी एक कंपनी या देश की मर्जी का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ग्लोबल कॉम्पिटिशन का हिस्सा बन चुका है। विशेष रूप से अमेरिका और चीन के बीच चल रही तकनीकी होड़ का जिक्र करते हुए एमोदेई ने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, अगर अमेरिका की शीर्ष छह एआई कंपनियां काम करना बंद भी कर दें तो भी चीन की प्रगति नहीं रुकेगी और वह इस क्षेत्र में बढ़त बना लेगा। इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव के कारण एआई के विकास की रफ्तार का थमा पाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

    क्या है इसका समाधान?

    एमोदेई का मानना है कि सब कुछ खत्म नहीं हुआ है और अगर सरकारें और टेक कंपनियां समय रहते सक्रिय कदम उठाएं, तो इस बदलाव के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके समाधान के रूप में उन्होंने कुछ बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

    सबसे पहले, स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए डेटा का होना जरूरी है; इसी दिशा में एंथ्रोपिक खुद एक 'इकोनॉमिक इंडेक्स' तैयार कर रही है, जो इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि एआई का नौकरियों पर असल में क्या असर पड़ रहा है। इसके साथ ही, वर्कफोर्स को तैयार करना भी अनिवार्य है। एमोदेई का मानना है कि लोगों को एआई टूल्स का सही और प्रभावी इस्तेमाल सिखाना होगा, ताकि वे खुद को नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के काबिल बना सकें।

    वहीं, अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए उन्होंने एक चौंकाने वाला लेकिन दूरदर्शी सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि आने वाले समय में सरकार को एक सख्त कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है, जिसके तहत एंथ्रोपिक जैसी एआई विकसित करने वाली कंपनियों पर विशेष टैक्स लगाया जा सकता है। यह कदम संभवतः उन लोगों की मदद के लिए होगा जो इस तकनीक के कारण अपनी आजीविका खो सकते हैं।

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