एआई से व्यक्तिगत बातें कर रहे जेन-जी: युवाओं का बना इमोशनल सपोर्ट, 18 देशों के सर्वे में दिखा नया ट्रेंड

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Tue, 08 Sep 2026 11:53 AM IST
सार

जेन-जी के लिए एआई अब सिर्फ पढ़ाई या जानकारी जुटाने का साधन नहीं रहा। कैस्परस्की के सर्वे में सामने आया कि भारत समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 32 प्रतिशत युवा एआई को दोस्त की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और अपनी पर्सनल बातें भी शेयर करते हैं। एंटीवायरस फर्म ने इस ट्रेंड को डेटा सुरक्षा पर गंभीर खतरा बताते हुए सतर्क रहने की चेतावनी दी है। भारत में भी यह चलन तेजी से बढ़ रहा है।

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ai use among gen z in asia pacific increases 32 percent youth in india considers as friend report kaspersky
एआई से दोस्ती बढ़ा रहे जेन-जी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब सिर्फ सवालों के जवाब पाने, पढ़ाई करने या काम आसान बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। खासतौर पर जेन जी यानी युवा पीढ़ी के लिए यह तकनीक रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही है। साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की के एक नए अध्ययन में सामने आया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जेन जी के बीच एआई का इस्तेमाल सबसे ज्यादा बढ़ा है। हैरानी की बात यह है कि बड़ी संख्या में युवा अब एआई को सिर्फ एक डिजिटल टूल नहीं, बल्कि दोस्त की तरह भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

    कैस्परस्की के मार्च 2026 में किए गए इस सर्वे में 18 देशों के 7,200 लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन से पता चलता है कि एआई के साथ युवाओं का रिश्ता तेजी से व्यक्तिगत होता जा रहा है। इससे एक तरफ तकनीक की बढ़ती स्वीकार्यता दिखाई दी, तो दूसरी तरफ निजी जानकारी और गलत सूचनाओं से जुड़े सुरक्षा जोखिम भी सामने दिखे।

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    हर दिन एआई का इस्तेमाल कर रहे जेन-जी

    • सर्वे के मुताबिक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 50 प्रतिशत जेन-जी हर दिन या लगभग हर दिन एआई का इस्तेमाल करते हैं। यह हिस्सा सर्वे में शामिल दूसरी आयु वर्गों की तुलना में सबसे ज्यादा है।
    • एआई के इस्तेमाल के पीछे सबसे बड़ी वजह जानकारी हासिल करना है। करीब 57 प्रतिशत युवा एआई का इस्तेमाल जानकारी खोजने के लिए करते हैं। वहीं 54 प्रतिशत इसका उपयोग पढ़ाई में और 50 प्रतिशत नए विचार तैयार करने के लिए करते हैं।
    • इन आंकड़ों से साफ है कि युवाओं के लिए एआई अब किसी विशेष काम के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक नहीं रह गई है। पढ़ाई, रिसर्च, आइडिया तैयार करने और रोजमर्रा के डिजिटल कामों में इसकी मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।

    एक तिहाई युवा एआई को मानते हैं दोस्त

    • सर्वे का सबसे दिलचस्प हिस्सा एआई के साथ भावनात्मक जुड़ाव को लेकर सामने आया है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 32 प्रतिशत जेन-जी ने कहा कि वे एआई का इस्तेमाल दोस्त की तरह करते हैं।
    • यह अनुपात दूसरी पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा है। अलग-अलग देशों में भी यह चलन देखने को मिला। इंडोनेशिया में 39 प्रतिशत, वियतनाम में 35 प्रतिशत, थाईलैंड में 34 प्रतिशत, मलेशिया में 33 प्रतिशत और भारत में 32 प्रतिशत जेन-जी ने एआई को दोस्त की तरह इस्तेमाल करने की बात कही।
    • इससे संकेत मिलता है कि कुछ युवाओं के लिए एआई अब केवल सूचना देने वाला सिस्टम नहीं है। वे बातचीत करने, अपनी बातें साझा करने और कभी-कभी भावनात्मक सहारे के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

    निजी परेशानियां भी एआई से साझा कर रहे युवा

    • एआई के साथ बातचीत के और व्यक्तिगत होने का एक और संकेत सर्वे में मिला है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 34 प्रतिशत जेन-जी उत्तरदाताओं ने बताया कि वे एआई के साथ ऐसी निजी बातें साझा करते हैं, जिन्हें वे दूसरे लोगों से कहने में सहज महसूस नहीं करते।
    • इस मामले में वियतनाम सबसे आगे रहा, जहां 42 प्रतिशत युवाओं ने ऐसी बातों का जिक्र किया। इसके बाद भारत में 37 प्रतिशत और इंडोनेशिया में 36 प्रतिशत युवाओं ने एआई से निजी मुद्दों पर चर्चा करने की बात कही।
    • युवाओं को एआई के साथ बातचीत अपेक्षाकृत निजी लग सकती है, लेकिन सर्वे के निष्कर्ष एक अहम चेतावनी भी देते हैं। एआई इंसानी दोस्त नहीं है और उसके जवाब हमेशा सही या उपयुक्त हों, इसकी गारंटी नहीं होती। निजी जानकारी साझा करते समय यूजर्स को यह मानकर चलना चाहिए कि एआई सेवा में डाला गया डेटा स्वतः गोपनीय नहीं माना जा सकता।

    एआई पर भरोसा बढ़ा, लेकिन सावधानी कम

    • जेन-जी एआई को तेजी से अपना रही है, लेकिन सुरक्षा को लेकर व्यवहार उतना मजबूत नजर नहीं आता। सर्वे में सिर्फ 45 प्रतिशत जेन-जी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे एआई सेवाओं का इस्तेमाल करते समय नियमित रूप से सुरक्षा सावधानियां बरतते हैं।
    • वहीं 51 प्रतिशत लोग सिर्फ कभी-कभार सावधानी अपनाते हैं। यानी आधे से ज्यादा युवा हर बार एक जैसी सुरक्षा आदतों का पालन नहीं करते।
    • मलेशिया में 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे केवल कभी-कभार सावधानी बरतते हैं। यह चीन के बाद सर्वे में शामिल बाजारों में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा रहा। इंडोनेशिया में यह अनुपात 43 प्रतिशत दर्ज किया गया।

    कौन-सी सावधानियां जरूरी हैं?

    • एआई का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा के लिए बहुत जटिल कदम उठाने की जरूरत नहीं है। सबसे पहली आदत यह होनी चाहिए कि महत्वपूर्ण जानकारी को किसी दूसरी विश्वसनीय जगह से भी जांचा जाए। एआई का जवाब सही लग रहा हो, तब भी संवेदनशील मामलों में उसे अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए।
    • खास तौर पर पढ़ाई, वित्तीय फैसले, कानूनी मामलों और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। एआई से मिली गलत जानकारी का असर सीधे किसी व्यक्ति के निर्णय पर पड़ सकता है।
    • इसके अलावा पासवर्ड, बैंक या भुगतान संबंधी जानकारी, पहचान दस्तावेज, निजी संदेश और गोपनीय फाइलें एआई सेवाओं में साझा करने से बचना चाहिए।

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर खतरे भी बढ़े

    • कैस्परस्की के मुताबिक एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नकली एआई सेवाओं, फिशिंग और धोखाधड़ी से जुड़े खतरे भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। साइबर अपराधी लोकप्रिय एआई सेवाओं जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट या एप्लिकेशन के जरिए यूजर्स को निशाना बना सकते हैं।
    • कंपनी का कहना है कि डिवाइस की सुरक्षा के साथ डिजिटल सुरक्षा की बुनियादी समझ भी जरूरी है। कैस्परस्की के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में साइबर स्वच्छता जैसी आदतों पर जोर दिया जाता है, ताकि यूजर्स संदिग्ध लिंक, फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन धोखाधड़ी को पहचान सकें।
    • जेन-जी को ध्यान में रखते हुए कैस्परस्की ने ‘केस 404’ नाम का एक ऑनलाइन इंटरैक्टिव गेम भी शुरू किया है। इसके जरिए खिलाड़ियों को साइबर अपराध, फिशिंग और डिजिटल ठगी जैसे खतरों को पहचानने की जानकारी दी जाती है।

    विशेषज्ञों ने किया खतरे से आगाह

    • कैस्परस्की एआई टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर के ग्रुप मैनेजर व्लादिस्लाव तुश्कानोव ने कहा कि जेन जी दूसरी पीढ़ियों की तुलना में एआई के नए ट्रेंड को तेजी से अपना रही है। उनके मुताबिक युवाओं का एआई को दोस्त के तौर पर इस्तेमाल करना यह दिखाता है कि इंसान और तकनीक का रिश्ता कितनी तेजी से बदल रहा है।
    • हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का व्यक्तिगत महसूस होना और उसका वास्तव में निजी या भरोसेमंद होना दो अलग बातें हैं। युवाओं को एआई की सुविधा के साथ जानकारी की जांच, निजी डेटा की सुरक्षा और मिले हुए जवाबों पर आलोचनात्मक नजर रखना सीखना होगा।
    • एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए कैस्परस्की के प्रबंध निदेशक एड्रियन हिया ने भी कहा कि जब हर तीन में से करीब एक जेन-जी यूजर एआई को दोस्त की तरह देखने लगे, तो यह तकनीक केवल एक टूल नहीं रह जाती। ऐसे में यह समझना ज्यादा जरूरी हो जाता है कि एआई से क्या साझा करना है और किस जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।

    एआई से दोस्ती बढ़ रही है, तो सावधानी भी जरूरी

    • कैस्परस्की का यह अध्ययन बताता है कि जेन-जी और एआई के बीच का रिश्ता तेजी से बदल रहा है। युवा पढ़ाई, जानकारी और नए विचारों के साथ-साथ निजी बातचीत के लिए भी एआई का सहारा ले रहे हैं। भारत में भी एक बड़ी संख्या में युवा एआई को दोस्त की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
    • लेकिन सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। एआई से बातचीत जितनी निजी होती जाएगी, उतना ही जरूरी होगा कि यूजर अपनी संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रखें, महत्वपूर्ण जवाबों की पुष्टि करें और हर एआई प्लेटफॉर्म को पूरी तरह भरोसेमंद मानने से बचें। आने वाले समय में एआई कौशल के साथ साइबर सुरक्षा की समझ भी जेन-जी के लिए उतनी ही जरूरी हो सकती है।
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