खत्म हो सकता है ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ का दौर: Anthropic के को-फाउंडर बोले- अब AI खुद लिखेगा अपने निर्देश
Prompt Engineering: AI को निर्देश देने के लिए लंबे-लंबे प्रॉम्प्ट लिखने का दौर जल्द बीत सकता है। Claude Code के निर्माता और एंथ्रोपिक (Anthropic) के को-फाउंडर बोरिस चेर्नी का मानना है कि भविष्य ‘लूप इंजीनियरिंग’ का है, जहां AI एजेंट खुद अपने लिए निर्देश तैयार करेंगे। इससे इंसानों की भूमिका कोड लिखने वाले से बदलकर AI मैनेजर जैसी हो सकती है।

विस्तार
AI इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों से "प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग" को एक महत्वपूर्ण कौशल माना जाता रहा है। माना जाता था कि जो व्यक्ति AI को बेहतर निर्देश देना जानता है, वही उससे सबसे अच्छे रिजल्ट हासिल कर सकता है। लेकिन अब इस सोच को चुनौती मिल रही है।
Claude Code के निर्माता और एआई कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के को-फाउंडर बोरिस चेर्नी का कहना है कि अब वह दौर खत्म होने की ओर बढ़ रहा है, जब इंसान AI के लिए हर निर्देश खुद लिखते थे। उनके मुताबिक, आने वाले समय में AI एजेंट खुद अपने लिए निर्देश तैयार करेंगे और इंसानों की भूमिका केवल पूरे सिस्टम को डिजाइन और मॉनिटर करने तक सीमित रह जाएगी।क्या है ‘लूप इंजीनियरिंग’?
- एक इंटरव्यू में चेर्नी ने बताया कि AI का भविष्य "लूप इंजीनियरिंग" में है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें AI एजेंट लगातार खुद को निर्देश देते हुए किसी कार्य को पूरा करने की दिशा में काम करते रहते हैं।
- सरल शब्दों में कहें तो, अगर किसी AI मॉडल को केवल एक लक्ष्य दे दिया जाए, तो वह बार-बार नए निर्देश बनाकर तब तक काम जारी रख सकता है, जब तक वह पूरा न हो जाए। इसके लिए हर कदम पर इंसान को नया प्रॉम्प्ट देने की जरूरत नहीं पड़ती।
- चेर्नी ने कहा कि अब वह सीधे प्रॉम्प्ट नहीं लिखते। इसके बजाय एक AI एजेंट Claude के लिए निर्देश तैयार करता है और फिर वही पूरे काम का समन्वय करता है।
- यह सोच सिर्फ एंथ्रोपिक तक सीमित नहीं है। OpenAI से जुड़े OpenClaw के निर्माता पीटर स्टीनबर्गर भी मानते हैं कि अब लोगों को AI को सीधे निर्देश देने के बजाय ऐसे लूप तैयार करने चाहिए जो AI एजेंट्स को खुद निर्देश दे सकें।
आसान नहीं है लूप इंजीनियरिंग
हालांकि यह तकनीक इंसानी मेहनत कम कर सकती है, लेकिन इसकी अपनी चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चिंता लागत को लेकर है। जब कई AI एजेंट और सब-एजेंट एक साथ काम करते हैं, तो बड़ी मात्रा में टोकन खर्च होते हैं, जिससे लागत तेजी से बढ़ सकती है।
पीटर स्टीनबर्गर का सुझाव है कि एजेंट्स को हर कुछ मिनट में सक्रिय करने के बजाय घंटे या दिन के हिसाब से चलाना ज्यादा किफायती हो सकता है। वहीं एडी ओसमानी का कहना है कि सब-एजेंट्स का उपयोग तभी किया जाना चाहिए जब उनकी असल में जरूरत हो।बदल रही है AI पेशेवरों की भूमिकाचेर्नी के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि AI इंडस्ट्री में अब केवल कोड लिखने या प्रॉम्प्ट तैयार करने की क्षमता ही पर्याप्त नहीं होगी। भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण कौशल AI सिस्टम्स को डिजाइन करना, एजेंट्स के बीच समन्वय स्थापित करना और उनके काम की निगरानी करना हो सकता है। यानी आने वाले वर्षों में AI इंजीनियर्स की भूमिका प्रॉम्प्ट लिखने वाले से बदलकर AI मैनेजर की हो सकती है।
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