माइक्रोसॉफ्ट का अलर्ट: पहले आईटी कंपनी पर हमला, फिर ग्राहकों तक पहुंच; क्या है एआई से साइबर अटैक का नया खतरा?
-हैकर ग्रुप 'स्टॉर्म-0940' ने आर्टेक्स एआई टूल से कंपनियों के क्लाउड नेटवर्क को निशाना बनाया।
-कनेक्टवाइस की क्लाउड बैकअप सर्विस में सेंध लगाकर 3 घंटे से भी कम समय में एक्सेस हासिल किया।
-एआई ने प्रति मिनट 2,900 प्रयास कर 2,250 से ज्यादा कंपनियों में सेंध लगाई।
-कनेक्टवाइस ने सेवाएं बहाल कीं और ग्राहकों को खुद अपना सिस्टम जांचने की सलाह दी।

विस्तार
एआई का इस्तेमाल अब सिर्फ रोज के कामों को आसान बनाने के लिए नहीं हो रहा, बल्कि साइबर अपराधी भी अब इसका खूब फायदा उठा रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसे ही एक मामले को लेकर चेतावनी जारी की है। कंपनी के अनुसार, चीन से जुड़े Storm-0940 हैकर ग्रुप ने ARTEX नाम के AI-पावर्ड टूल की मदद से दुनिया भर के संगठनों को निशाना बनाया। इसमें आईटी कंपनी कनेक्टवाइज की क्लाउड बैकअप सर्विस के जरिए ग्राहकों के सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश की गई। माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि कुछ मामलों में हमलावर शुरुआती निशाना बनाने के तीन घंटे से भी कम समय में क्लाउड सिस्टम पर ऊंचे स्तर का एक्सेस हासिल करने में सफल रहे।
क्या है पूरा मामला?
- माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट के अनुसार, स्टॉर्म-0940 ने एआई एजेंट्स वाले आर्टेक्स टूल का इस्तेमाल साइबर हमले के कई चरणों को ऑटोमेट करने के लिए किया। इस टूल की मदद से हमलावर नेटवर्क की जानकारी जुटाने, अकाउंट्स में लॉगिन करने और सिस्टम में अपनी पहुंच बनाए रखने जैसी गतिविधियां कर सकते हैं।
- इसमें 2,250 से ज्यादा क्लाउड टेनेंट्स तक पहुंचने के लिए प्रति मिनट 2,900 साइन-इन प्रयास किए गए। यहां टेनेंट का मतलब क्लाउड में किसी कंपनी या संगठन का अलग डिजिटल वातावरण है। हालांकि, 2,250 से ज्यादा टेनेंट्स पर प्रयास या पहुंच की बात का यह मतलब नहीं है कि सभी कंपनियां पूरी तरह हैक हो गईं या सभी का डेटा चोरी हुआ। माइक्रोसॉफ्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस अभियान में कुल कितने संगठनों के सिस्टम वास्तव में प्रभावित हुए।
सीधे कंपनियों पर नहीं, सप्लाई चेन के जरिए हमला
- हैकर्स ने हर कंपनी के सिस्टम में अलग-अलग सेंध लगाने के बजाय सप्लाई चेन अटैक का रास्ता अपनाया। बता दें कि इस तरह के हमले में किसी ऐसी कंपनी या सर्विस को निशाना बनाया जाता है, जिसका इस्तेमाल कई दूसरी कंपनियां करती हैं। अगर हमलावर उस सर्विस तक पहुंच बना लेते हैं, तो उसके जरिए कई ग्राहकों के सिस्टम तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।
- इस मामले में कनेक्टवाइस की क्लाउड बैकअप सर्विस को निशाना बनाया गया। यह सर्विस आईटी सेवा देने वाली कंपनियों और उनके ग्राहकों के लिए इस्तेमाल होती है। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, हमलावरों ने इस रास्ते से कई संगठनों के माइक्रोसॉफ्ट 365 तक पहुंच बनाने की कोशिश की। इस तरह एक सर्विस पर हुआ हमला कई संगठनों के लिए सुरक्षा जोखिम बन गया।
कनेक्टवाइस ने क्या कदम उठाए?
- कनेक्टवाइस के सीईओ मैनी रिवेलो ने कहा कि हमले के पीछे चीन से जुड़ा कोई ग्रुप हो सकता है। कंपनी ने संदिग्ध गतिविधि सामने आने के बाद प्रभावित एप्स का कनेक्शन रोक दिया और अपनी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की।
- लेकिन सिर्फ कनेक्शन बंद कर देना हर मामले में पर्याप्त नहीं होता। अगर हमलावर पहले ही किसी ग्राहक के सिस्टम में अलग से पहुंच बना चुके हैं, तो मूल एप का कनेक्शन रोकने के बाद भी उनका एक्सेस बना रह सकता है। इसी वजह से ग्राहकों को अपने सिस्टम की अलग से जांच करने की सलाह दी गई है। उन्हें यह पता लगाना होगा कि कहीं किसी अनधिकृत अकाउंट, ऐप या पहचान के जरिए हैकर अब भी उनके नेटवर्क में मौजूद तो नहीं हैं।
- कनेक्टवाइस ने यह भी कहा है कि जांच और सुधार की प्रक्रिया जारी है। कंपनी की ओर से यह पुष्टि नहीं की गई है कि सभी ग्राहकों के सिस्टम प्रभावित हुए हैं।
आर्टेक्स एआई टूल कैसे करता है काम?
माइक्रोसॉफ्ट की रिपोर्ट में आर्टेक्स को एआई एजेंट्स पर आधारित एक टूल बताया गया है, जो साइबर हमले के अलग-अलग चरणों को ऑटोमेट कर सकता है। इसमें शुरुआती जानकारी जुटाने से लेकर सिस्टम तक पहुंचने और एक्सेस बनाए रखने की कोशिशें शामिल हो सकती हैं।
स्टॉर्म-0940 ने इसका इस्तेमाल खास तौर पर दो तरीकों से किया।
1. पासवर्ड स्प्रेइंग
- पासवर्ड स्प्रेइंग साइबर हमले का एक तरीका है। इसमें हमलावर कई अकाउंट्स पर कुछ आम या अनुमान लगाए जा सकने वाले पासवर्ड आजमाते हैं। इसका मकसद ऐसे अकाउंट ढूंढना होता है जिनकी सुरक्षा कमजोर हो या जिनका पासवर्ड आसानी से अनुमान लगाया जा सके।
- एआई टूल इस प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर और तेज गति से चला सकता है। माइक्रोसॉफ्ट ने स्टॉर्म-0940 की गतिविधियों में हजारों अकाउंट्स पर ऑटोमेटेड लॉगिन प्रयास देखे।
2. OAuth एप्स की अनुमतियों का गलत इस्तेमाल
- OAuth एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए किसी एप को दूसरे अकाउंट या सर्विस के कुछ संसाधनों तक पहुंच की अनुमति दी जा सकती है। इसका इस्तेमाल कई वैध ऐप्स भी करते हैं।
- लेकिन अगर किसी एप के पास जरूरत से ज्यादा अधिकार हों या उसकी पहचान का गलत इस्तेमाल हो जाए, तो हमलावर उन अनुमतियों के जरिए संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, इसमें हमलावरों ने एप की पहचान और अनुमतियों का दुरुपयोग करके क्लाउड वातावरण में पहुंच बनाने की कोशिश की।
हर मिनट 2,900 साइन-इन प्रयास, 2,250 से ज्यादा टेनेंट्स निशाने पर
- इसकी सबसे चिंताजनक बात इसकी रफ्तार को लेकर थी। माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, आर्टेक्स के जरिए प्रति मिनट 2,900 साइन-इन प्रयास किए गए और 2,250 से ज्यादा टेनेंट्स तक पहुंचने की कोशिश हुई।
- एआई एजेंट्स सिस्टम में पहुंच बनाने के बाद नेटवर्क की जानकारी जुटा सकते थे और कुछ मामलों में अपनी पहुंच बनाए रखने के लिए अकाउंट की जानकारी या अनुमतियों में बदलाव कर सकते थे। माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसे मामलों का भी जिक्र किया जिनमें हमलावरों ने क्रेडेंशियल्स बदलने और ज्यादा अधिकार हासिल करने की कोशिश की।
- ऐसे में हमलावरों के लिए सिस्टम में लंबे समय तक बने रहना संभव हो सकता है। इससे सुरक्षा टीमों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि शुरुआती सेंध के बाद और क्या-क्या बदला गया है।
- माइक्रोसॉफ्ट ने चेताया कि प्रति मिनट हजारों साइन-इन प्रयासों की रफ्तार से सुरक्षा टीमों को संदिग्ध गतिविधि पहचानने और कार्रवाई करने के लिए बहुत कम समय मिलता है। हालांकि, केवल लॉगिन सफल होने से यह साबित नहीं होता कि डेटा चोरी भी हुआ है।
चीन से जुड़े स्ट्रॉम-0940 पर शक
- माइक्रोसॉफ्ट स्ट्रॉम-0940 को चीन से जुड़े हैकिंग ग्रुप के तौर पर ट्रैक करता है। कंपनी ने इस ग्रुप को ऑर्टेक्स के इस्तेमाल और कनेक्टवाइज से जुड़े सप्लाई चेन हमले के साथ जोड़ा है।
- हालांकि, साइबर हमलों में किसी ग्रुप की भूमिका तय करना तकनीकी जांच और उपलब्ध सबूतों पर निर्भर करता है। चीन से जुड़े होने का दावा माइक्रोसॉफ्ट की थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट पर आधारित है।
- इस मामले में हमले का पूरा दायरा, प्रभावित संगठनों की अंतिम संख्या और कितने ग्राहकों का डेटा वास्तव में एक्सेस या चोरी हुआ, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
कंपनियों के लिए क्यों बढ़ रही है चिंता?
- एआई- पावर्ड टूल साइबर हमले के कई चरणों को तेजी से पूरा कर सकते हैं। इससे हमलावर कम समय में ज्यादा अकाउंट्स और नेटवर्क को निशाना बना सकते हैं। दूसरी ओर, कंपनियों की सुरक्षा टीमों को यह पहचानना पड़ता है कि कौन-सी गतिविधि सामान्य है और कौन-सी किसी हमले का हिस्सा।
- सप्लाई चेन अटैक का जोखिम इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि एक सर्विस कई संगठनों के सिस्टम से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में किसी एक ऐप या सर्विस की सुरक्षा में कमी का असर उसके कई ग्राहकों तक पहुंच सकता है। कनेक्टवाइज मामले में भी ग्राहकों को केवल सर्विस बहाल होने का इंतजार करने के बजाय अपने क्लाउड अकाउंट्स, एप अनुमतियों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच करने की जरूरत बताई गई है।