अब चिकित्सकों की लिखी दवाओं में गलती पकड़ रहा एआई: 28 लाख पर्चियों में हुआ सुधार; कैसे काम करता है यह सिस्टम?
अब हेल्थकेयर में भी एआई और डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल मरीजों की सुरक्षा बेहतर करने के लिए किया जा रहा है। नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि एआई अब प्रिस्क्रिप्शन लिखते समय ही गलत दवाओं के कॉम्बिनेशन को पकड़ रहा है। 28 लाख पर्चियों के विश्लेषण में पाया गया कि इस तकनीक से गलतियों में 8.6% की कमी आई है। जानिए आखिर कैसे यह एआई टूल डॉक्टरों का मददगार बन रहा है...

विस्तार
अक्सर मरीज एक साथ कई बीमारियों की दवांए लेते हैं। ऐसे में अगर डॉक्टर कोई नई दवा लिखता है, तो यह देखना बेहद जरूरी होता है कि वह पुरानी दवाओं के साथ मिलकर कोई साइड इफेक्ट या रिएक्शन तो नहीं करेगी। इसी गंभीर डॉक्टरी भूल को रोकने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नानयांग बिजनेस स्कूल (नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी) के शोधकर्ता शियाओदान शाओ, विवेक चौधरी और अर्नब मजूमदार की ओर से किए गए एक अध्ययन में यह बड़ी सफलता सामने आई है।
1,700 डॉक्टरों और 28 लाख पर्चियों पर हुआ अध्ययन
नौ सितंबर 2026 को प्रकाशित इस रिसर्च में करीब 1,700 डॉक्टरों और लगभग 28 लाख दवा पर्चियों (प्रिस्क्रिप्शन ) का विश्लेषण किया गया। स्टडी से पता चला कि एआई सिस्टम की मदद से डॉक्टर्स की ओर से की जाने वाली गलतियों में 8.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई और 28 लाख पर्चियों में समय रहते सुधार किया गया।
गलती होने के बाद नहीं, दवा लिखते वक्त ही चेतावनी
इस एआई डिजिटल सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत है कि यह डॉक्टर को पर्ची लिखते समय ही सचेत कर देता है। जब भी डॉक्टर मरीज को कोई नई दवा देता है, कंप्यूटर सिस्टम मरीज की पहले से चल रही दवाओं और नई दवा के मिश्रण से होने वाले संभावित खतरों की तुरंत स्क्रीन पर जानकारी दे देता है। इससे डॉक्टर को पर्ची फाइनल करने से पहले ही दवा बदलने या सही खुराक चुनने का मौका मिल जाता है।
व्यस्त डॉक्टर्स के लिए साबित हो रहा वरदान
अध्ययन में पाया गया कि इस डिजिटल अलर्ट सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा उन डॉक्टरों को मिला, जिन पर मरीजों का काफी दबाव रहता है और जो रोजाना भारी संख्या में मरीज देखते हैं। वर्कलोड अधिक होने की वजह से होने वाली मानवीय चूक को इस एआई ने काफी हद तक खत्म कर दिया।
चेतावनी से सीख भी रहे हैं डॉक्टर
रिसर्च में एक और दिलचस्प बदलाव देखा गया। शुरुआत में डॉक्टरों ने एआई की चेतावनी देखकर अपनी लिखी दवाओं में सुधार किया। लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ डॉक्टरों ने एआई के पिछले सुझावों से सीखना शुरू कर दिया, जिससे वे पर्ची लिखते समय पहले से ही ज्यादा सावधानी बरतने लगे।